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दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: पीएम की विदेश यात्राओं के उड़ान संबंधी रिकॉर्ड नहीं होंगे सार्वजनिक, बताई ये वजह
Tue, 20 Oct 2026 09:05 AM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 20 Oct 2026 09:05 AM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री की भारतीय वायुसेना के विमानों से की गई विदेश यात्राओं के उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का सीआईसी का आदेश रद कर दिया है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने एयर हेडक्वार्टर्स के पर्सनल सर्विसेज निदेशालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।
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पीएम मोदी
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
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दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भारतीय वायुसेना के विमानों से की गई विदेश यात्राओं के उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि इन संवेदनशील जानकारियों के खुलासे से राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने एयर हेडक्वार्टर्स के पर्सनल सर्विसेज निदेशालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि वायुसेना द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(जी) के तहत जानकारी देने से इनकार करना उचित था।
सीआईसी ने 8 जुलाई 2020 को वायुसेना को निर्देश दिया था कि वह मोदी और मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से संबंधित उपलब्ध स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (एसएफआर-II) की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराए।
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हाई कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि सुरक्षा कर्मियों के नाम और पहचान संबंधी विवरण हटाने के बाद भी संभावित सुरक्षा जोखिम समाप्त नहीं होते। न्यायमूर्ति महाजन ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च होने का मात्र तथ्य सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली जानकारी जारी करने का औचित्य नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सक्षम प्राधिकारी सुरक्षा जोखिम का आकलन कर चुका हो, तो सीआईसी या न्यायालय को सुरक्षा एजेंसियों के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं थोपना चाहिए।
आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ मामला
यह मामला सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा के 5 जून 2018 को दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने 1 अप्रैल 2013 से आवेदन की तारीख तक प्रधानमंत्रियों की भारतीय वायुसेना के विमानों से हुई विदेश यात्राओं का विवरण मांगा था। वायुसेना ने मोदी की कुछ यात्राओं की जानकारी दी और बताया कि 1 अप्रैल 2013 से 25 मई 2014 तक मनमोहन सिंह ने वायुसेना के विमान से कोई यात्रा नहीं की थी। हालांकि, उड़ान रिकॉर्ड के पार्ट-I और पार्ट-II की प्रतियां देने से इनकार कर दिया गया।
सार्वजनिक हित की दलील खारिज
वायुसेना ने कहा कि इन दस्तावेजों में विमान, एयरक्रू, यात्रियों और विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के कर्मियों से संबंधित संवेदनशील विवरण शामिल हैं। अन्य सार्वजनिक सूचनाओं के साथ इनका विश्लेषण करने पर सुरक्षा व्यवस्था और तैनाती के पैटर्न का पता लगाया जा सकता है। बत्रा ने दलील दी थी कि विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च होने के कारण यह जानकारी सार्वजनिक हित में जारी की जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
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न्यायमूर्ति अमित महाजन ने एयर हेडक्वार्टर्स के पर्सनल सर्विसेज निदेशालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि वायुसेना द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(जी) के तहत जानकारी देने से इनकार करना उचित था।
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सीआईसी ने 8 जुलाई 2020 को वायुसेना को निर्देश दिया था कि वह मोदी और मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से संबंधित उपलब्ध स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स (एसएफआर-II) की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराए।
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हाई कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि सुरक्षा कर्मियों के नाम और पहचान संबंधी विवरण हटाने के बाद भी संभावित सुरक्षा जोखिम समाप्त नहीं होते। न्यायमूर्ति महाजन ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च होने का मात्र तथ्य सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने वाली जानकारी जारी करने का औचित्य नहीं बनता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब सक्षम प्राधिकारी सुरक्षा जोखिम का आकलन कर चुका हो, तो सीआईसी या न्यायालय को सुरक्षा एजेंसियों के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं थोपना चाहिए।
आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ मामला
यह मामला सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा के 5 जून 2018 को दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने 1 अप्रैल 2013 से आवेदन की तारीख तक प्रधानमंत्रियों की भारतीय वायुसेना के विमानों से हुई विदेश यात्राओं का विवरण मांगा था। वायुसेना ने मोदी की कुछ यात्राओं की जानकारी दी और बताया कि 1 अप्रैल 2013 से 25 मई 2014 तक मनमोहन सिंह ने वायुसेना के विमान से कोई यात्रा नहीं की थी। हालांकि, उड़ान रिकॉर्ड के पार्ट-I और पार्ट-II की प्रतियां देने से इनकार कर दिया गया।
सार्वजनिक हित की दलील खारिज
वायुसेना ने कहा कि इन दस्तावेजों में विमान, एयरक्रू, यात्रियों और विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के कर्मियों से संबंधित संवेदनशील विवरण शामिल हैं। अन्य सार्वजनिक सूचनाओं के साथ इनका विश्लेषण करने पर सुरक्षा व्यवस्था और तैनाती के पैटर्न का पता लगाया जा सकता है। बत्रा ने दलील दी थी कि विदेश यात्राओं पर सार्वजनिक धन खर्च होने के कारण यह जानकारी सार्वजनिक हित में जारी की जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।