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दिल्ली हाईकोर्ट: विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए एक सामान्य बैंकिंग कोड की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब

Tue, 05 Apr 2022 06:39 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 05 Apr 2022 06:39 PM IST
सार

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 मई तय की है।

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Delhi High Court: Seeking response from Center on plea seeking a common banking code for foreign exchange transactions
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई-फाइल फोटो

विस्तार

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए एक सामान्य बैंकिंग कोड की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने तर्क रखा कि यह सुनिश्चित करना इसलिए भी आवश्यक है कि विदेशी धन किसी भी तरीके से अलगाववादियों, कट्टरपंथियों, नक्सलियों, माओवादियों, आतंकवादियों, देशद्रोहियों, धर्मांतरण माफिया और सिमी, पीएफआई और अन्य जैसे कट्टरपंथी संगठनों के खातों में स्थानांतरित न हो।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने उन्हें चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 25 मई तय की है।

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भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश की मांग की है कि भारतीय बैंकों में विदेशी धन जमा करने के लिए रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी), इंस्टेंट मनी पेमेंट सिस्टम (आईएमपीएस) और भुगतान के अन्य समान तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाए।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि यदि वीजा के लिए आव्रजन नियम किसी भी देश से किसी भी एयरलाइन के माध्यम से आने वाले विदेशियों के लिए समान है, तो विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए बैंकों में जमा विवरण भी उसी प्रारूप में होना चाहिए।

सिमी, पीएफआई जैसे संगठनों पर भी कसेगी नकेल

याचिका में कहा गया है कि यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है कि विदेशी धन किसी भी तरीके से अलगाववादियों, कट्टरपंथियों, नक्सलियों, माओवादियों, आतंकवादियों, देशद्रोहियों, धर्मांतरण माफिया और सिमी, पीएफआई और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के खातों में स्थानांतरित न हो।

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भारत में विदेशी बैंकों की शाखाओं सहित किसी भारतीय बैंक के माध्यम से विदेशी मुद्रा लेनदेन किए जाने पर जमाकर्ताओं के नाम और संख्या, मुद्रा के नाम और विदेशी मुद्रा और रूपांतरण दर की सटीक राशि शामिल करने के लिए निर्देश दिया जाए।

सुनवाई के दौरान याची ने कहा हमारे समाज को परेशान करने के लिए देश में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये आ रहे हैं। यह एक बहुत ही गंभीर खतरा है इसलिए एक समान बैंकिंग कोड होना जरूरी है। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी कहा कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

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