{"_id":"638bceaa937c4b638d467f8a","slug":"delhi-high-court-said-court-cannot-turn-a-blind-eye-if-bulldozers-run-on-justice-in-the-light","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- उजाले में न्याय पर बुलडोजर चले तो कोर्ट आंख नहीं मूंद सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- उजाले में न्याय पर बुलडोजर चले तो कोर्ट आंख नहीं मूंद सकता
Sun, 04 Dec 2022 04:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 04 Dec 2022 04:03 AM IST
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने शनिवार को कहा, लोकतंत्र की अंतरात्मा के रक्षक होने के नाते, जब दिन के उजाले में न्याय के सिरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा हो, तो कोर्ट आंख नहीं मूंद सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ सार्वजनिक भूमि पर बने एक धर्मार्थ अस्पताल की लीज डीड को रद्द करने वाला आदेश रद्द कर दिया।
विज्ञापन
जस्टिस चंद्र धारी सिंह की पीठ ने कहा, यह न्याय का उपहास है कि सार्वजनिक भूमि पर एक धर्मार्थ अस्पताल चलाने और ठोस अनुसंधान और उपचार सुविधाएं प्रदान करने जैसे नेक काम में योगदान देने वाली संस्था को लीज डीड रद्द करने की कठोरता का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
कानून, जिसे कल्याण सुनिश्चित करने के लिए एक साधन होना चाहिए, उसे वर्तमान मामले में अत्याचार के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया गया। एक सांविकधानिक अदालत और लोकतंत्र के विवेक-रक्षक होने के नाते, यह अदालत न्याय पर दिनदहाड़े बुलडोजर चलता देख अहम आंख नहीं मूंद सकते।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा, संस्था राज्य के कल्याण का काम कर रही है। इसके कारण होने वाले अनुचित उत्पीड़न से कानून के शासन का उत्पीड़न होगा। हाईकोर्ट खोसला मेडिकल इंस्टीट्यूट की एक अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसने शालीमार बाग में एक चिकित्सा अनुसंधान केंद्र और अस्पताल की स्थापना की थी।
याचिका में दिल्ली विकास प्राधिकरण के 1995 के आदेश को बरकरार रखते हुए एक निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें दिल्ली विकास प्राधिकरण के पट्टे को रद्द करने और संपत्ति को खाली करने का निर्देश दिया गया था।