कौन होगा दिल्ली कांग्रेस का नया बॉस?: अनिल चौधरी का कार्यकाल हुआ पूरा, ये तीन नाम रेस में आगे
मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिलेगा। क्योंकि अध्यक्ष अनिल चौधरी का कार्यकाल पूरा हो चुका है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली में कांग्रेस जल्द ही नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर सकती है। बीते बुधवार को कांग्रेस ने संगठन की मजबूती और आगामी चुनावों को लेकर बैठक की थी। कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रही हैं और नए अध्यक्ष की तलाश कर रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिलेगा। क्योंकि अध्यक्ष अनिल चौधरी का कार्यकाल पूरा हो चुका है। बीती शाम को राहुल गांधी ने दिल्ली कांग्रेस के करीब 10 नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की थी और सभी से नाम पूछे थे। अभी रेस में सबसे आगे देवेंद्र यादव का नाम चल रहा है। वहीं अरविंदर सिंह लवली और रोहित चौधरी भी रेस में हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस अगले दो से तीन दिनों के अंदर नाम का ऐलान कर सकती है।
राहुल गांधी ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की बैठक में दो टूक कहा कि काम करने वाले ही पार्टी में रहेंगे और उन्हें ही जिम्मेदारी मिलेगी। उन्होंने काम नहीं करने वाले नेताओं को आराम करने की सलाह दी, बेशक वे कितने ही वरिष्ठ नेता और कई चुनाव जीते हों। बुधवार को कांग्रेस आलाकमान के साथ बैठक में प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार ने शिकायत की कि यहां आए अधिकतर नेता न तो प्रदेश की बैठक में आते हैं और न ही धरना प्रदर्शन में शामिल होते हैं।
इस पर प्रदेश कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे रहे। राहुल ने शिकायत को गंभीरता लेते हुए वरिष्ठ नेताओं को अप्रत्यक्ष तौर पर फटकार लगाई। राहुल ने चेतावनी दी कि काम करना है तो वे पार्टी में रहें, अगर काम नहीं कर सकते है तो आराम करें। अब मौजूद गतिविधि व काम को देखकर ही पार्टी में जिम्मेदारी मिलेगी। लिहाजा, पार्टी को काम करने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है।
इस बीच दो-तीन नेताओं ने प्रदेश इकाई में गुटबाजी दूर करने का आग्रह किया। इस पर राहुल ने कहा कि गुटबाजी दूर करने के लिए कोई बाहर से नहीं आएगा। बैठक में मौजूद तमाम नेताओं में ही गुटबाजी है। लिहाजा, उन्हें स्वयं गुटबाजी दूर करनी होगी। वह पार्टी की बैठकों में शामिल हो और कार्यक्रमों में शिरकत करें। इसके अलावा वह पार्टी की नीतियों व सरकारों की ओर से किए जा रहे जनविरोधी कार्यों को लेकर जनता के बीच जाएं। इसके बाद गुटबाजी नहीं रहेगी।