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दिल्ली: अदालत ने मॉब लिंचिंग और हत्या के 20 वर्षीय आरोपी को अंतरिम जमानत देने से किया इनकार

Tue, 29 Jun 2021 11:00 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 29 Jun 2021 11:00 PM IST
सार

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने आरोपी अमित द्वारा अपनी पत्नी की तबीयत के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद कहा पत्नी की तबीयत खराब होने के संबंध में वह झूठ बोल रहा है।

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Court refused to grant interim bail to 20-year-old accused of mob lynching and murder
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अदालत ने मॉब लिंचिंग व हत्या के 20 वर्षीय आरोपी को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह एक ऐसा गंभीर मामला है, जिसमें आरोपी ने सक्रिय भूमिका निभाई है और अगर उसे रिहा किया जाता है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने आरोपी अमित द्वारा अपनी पत्नी की तबीयत के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद कहा पत्नी की तबीयत खराब होने के संबंध में वह झूठ बोल रहा है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सभी तथ्य देखने से प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि यह मॉब लिंचिंग का मामला है। अभियोजन पक्ष के मामले के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर अपराध में सक्रिय भूमिका निभाई है। मामले की जांच शुरुआती चरण में है और इस बात की पूरी संभावना है कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है या वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
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पुलिस के अनुसार पीड़ित सरफराज स्वरूप विहार में रात में पड़ोस में घूम रहा था तभी कुछ लोग उसे एक फैक्टरी में ले गए और लाठी-डंडों से पिटाई करने से पहले उसे निर्माण में इस्तेमाल भारी मशीन से बांध दिया। स्वरूप नगर थाने में 23 मई को हत्या का मामला दर्ज हुआ था।

आरोपी अमित ने गुर्दे से संबंधित बीमारियों से पीड़ित पत्नी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि उनके मुवक्किल की पत्नी को जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी गई है।

अदालत ने महिला की मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन किया तो यह देखा गया कि उसे कभी अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया और न ही उसे किसी बेड रेस्ट की सलाह दी गई। अदालत ने कहा कि पत्नी की मेडीकल की झूठी कहानी बनाई गई है जबकि आरोपी के परिवार में पत्नी की देखभाल के लिए कई लोग हैं।


सरकारी वकील हरविंदर नार ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरफराज की अमित और अन्य सह-आरोपियों ने बेरहमी से हत्या की गई थी और मामले की जांच आरंभिक स्थिति में है और अगर वह जमानत पर रिहा हो जाता है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या वह गवाहों को धमकी दे सकता है। उन्होंने कहा कि सरफराज बेरोजगार था, जबकि उसका भाई ई-रिक्शा चालक है और उसके पिता मजदूर हैं।

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