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सीएए-एनआरसी से गांधी का हिंदुस्तान नहीं रहेगा भारत: योगेंद्र यादव
Tue, 28 Jan 2020 07:58 PM IST
नोएडा ब्यूरो
अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2020 07:58 PM IST
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योगेंद्र यादव।
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में मजबूत भूमिका निभाने वाले योगेन्द्र यादव दिल्ली विधानसभा चुनाव में बिलकुल अलग दिख रहे हैं। उनकी पार्टी चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर चुनाव लड़ रही है, लेकिन वे खुद सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में पूरे देश में भ्रमण कर रहे हैं। अहम चुनाव के बीच उनकी भूमिका में यह बदलाव क्यों है, यह जानने के लिए हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने उनसे मुलाकात की और कई विषयों पर उनसे विस्तृत बातचीत की। पेश है वार्ता के प्रमुख अंश-
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प्रश्न- योगेंद्र जी, आप हरियाणा चुनाव में बहुत सक्रिय रहे और आपने एक सकारात्मक भूमिका निभाई। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव से आपने दूरी बना रखी है। ऐसा क्यों?
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मेरा यह स्पष्ट मत है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 देश की अखंडता के लिए बहुत बड़ा खतरा है। सीएए, एनआरसी और एनपीआर लागू होने से यह देश गोडसे का हिंदू राष्ट्र बन जाएगा, यह गांधी का हिंदुस्तान नहीं रह जाएगा। यही कारण है कि मैं उसकी मुखालफत पूरे देश में घूम-घूमकर कर रहा हूं। 30 जनवरी को इसके विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन की तैयारी कर रहा हूं। अगर मैं चुनाव में उतरता तो लोगों में यह संदेश जा सकता था कि मैं यह सब चुनावी लाभ के लिए कर रहा हूं। ऐसा संदेश देकर मैं इस आन्दोलन को कमजोर नहीं करना चाहता था। यही कारण है कि मैंने दिल्ली चुनाव से खुद को अलग कर लिया।
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प्रश्न- सत्ता पक्ष के द्वारा शाहीन बाग के प्रदर्शन को धार्मिक रंग देने की कोशिश हो रही है। इसे एक वर्ग विशेष का प्रदर्शन बताया जा रहा है। आप क्या कहेंगे?
इस आन्दोलन को दबाने के लिए सरकार के पास और कोई रास्ता नहीं है। इसे कमजोर करने के लिए वे इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं और हम सब इस चाल से पूरी तरह वाकिफ हैं। लेकिन अगर आप मेरे साथ असम चलें तो मैं आपको दिखा सकता हूं कि किस तरह सीएए ने लाखों हिंदुओ को एक पल में कहीं का नहीं छोड़ा है। इस काले कानून का सबसे ज्यादा विरोध हिंदुओं की तरफ से ही हो रहा है। ऐसे में सरकार की ऐसी कोई कोशिश कामयाब नहीं होने वाली।
प्रश्न- सरकार ने शाहीन बाग के प्रदर्शन को हटाने की अब तक कोई ठोस कोशिश नहीं की है। न तो केंद्र ने प्रदर्शनकारियों से कोई बात की है और न ही उन पर बल प्रयोग हुआ है। भाजपा नेता इसे एक धर्म विशेष से जोड़कर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में क्या आपको नहीं लगता कि शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन से धार्मिक ध्रुवीकरण हो सकता है और भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है?
देखिए, इस कानून का विरोध राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है। दिल्ली, लखनऊ, पटना, हैदराबाद, बंगलोर से लेकर नार्थ-ईस्ट तक इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली चुनाव इसके सामने बहुत छोटी चीज है। एक चुनाव के लिए इतने बड़े आन्दोलन को नहीं रोका जा सकता।
प्रश्न- शाहीन बाग के आन्दोलन की वजह से आसपास के लोगों की जिन्दगी प्रभावित हो रही है, उन्हें तकलीफ हो रही है। क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि प्रदर्शन के लिए एक शांतिपूर्ण स्थल का चुनाव कर लिया जाए। इससे प्रदर्शन भी चले और आम जनता को तकलीफ भी न हो?
आप आंदोलनों का इतिहास उठाकर देख लीजिए। इतना शांतिपूर्ण प्रदर्शन इतिहास में कभी नहीं हुआ है। प्रदर्शन स्थल से छात्रों के वाहनों और एम्बुलेंस को रास्ता दिया गया है। फिर भी, इतना अवश्य कहूंगा कि किसी भी आन्दोलन से जनता को थोड़ी-बहुत तकलीफ होती ही है। चूंकि यह आन्दोलन भी जनता के लिए ही होते हैं, मैं उनसे इसमें सहयोग की अपील करता हूं।
प्रश्न- प्रदर्शनकारी अपने हाथों में संविधान की प्रतियां लेकर विरोध कर रहे हैं। संविधान की प्रस्तावना का पाठ कर रहे हैं। सीएए को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ढेरों याचिकाएं लंबित हैं। ऐसे में क्या यह बेहतर नहीं होगा कि सीएए पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतज़ार कर लिया जाता? शायद इस आन्दोलन की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
मैं सोच-समझकर और बड़े दुःख के साथ कह रहा हूं कि आपातकाल से भी बुरी स्थिति दिख रही है। हमारे न्यायमूर्ति बहुत जानकार और समझदार हैं, उन पर कोई सवाल नहीं है। लेकिन एक नागरिक होने के नाते मेरी इतनी न्यूनतम उम्मीद थी कि सर्वोच्च अदालत सीएए की सुनवाई करते समय कम से कम स्टे लगाता, कहता कि सुनवाई होती रहेगी, लेकिन फिलहाल के लिए इसे स्थगित किया जाता है। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया जिसके कारण गहरी निराशा हुई है। संविधान नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है, लेकिन अब यहां खुद संविधान ही खतरे में है। मुझे लगता है कि जब खुद संविधान की ही रक्षा करनी हो तो यह काम जनता को ही करना पड़ता है। यही कारण है कि आज हम सड़कों पर हैं।