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किसान संसद: वायु प्रदूषण विधेयक पर किया निंदा प्रस्ताव पारित, पराली जलाने के मुद्दे पर हुई चर्चा

Wed, 04 Aug 2021 02:00 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 04 Aug 2021 02:00 AM IST
सार

किसान संसद में नए विधेयक में किसानों पर दंडात्मक प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही सांसदों से भी ऐसा करने की अपील की गई। किसान संसद ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि एमएसपी कानूनी गारंटी एक ठोस समाधान है। 

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condemnation motion passed on air pollution bill in kisan sansad
किसान संसद में मौजूद किसान - फोटो : amar ujala

विस्तार

किसान संसद में मंगलवार को पराली जलाने के मुद्दे सहित किसी न किसी बहाने किसानों को अपराधी बनाने के प्रयासों पर मंथन किया गया। सदस्यों ने कोविड लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अलोकतांत्रिक तरीके से एक आयोग के जरिये दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने के नाम पर एक अध्यादेश लाए जाने पर विरोध जताया। 

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किसान संसद में सदस्यों ने इस मामले पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार 30 दिसंबर 2020 को किसान प्रतिनिधियों से की गई प्रतिबद्धता से मुकर गई है। नए विधेयक में, दंड प्रावधान (धारा 14) के अपवाद जोड़ी गई है। किसानों को एक करोड़ रुपये तक का जुर्माने और पांच साल की जेल की सजा के प्रावधान से छूट दी जाएगी। पर्यावरण मुआवजा के नाम पर धारा 15 के रूप में किसानों पर एक नया दंड प्रावधान शामिल किया गया है। 
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किसान संसद में नए विधेयक में किसानों पर दंडात्मक प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही सांसदों से भी ऐसा करने की अपील की गई। किसान संसद ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि एमएसपी कानूनी गारंटी एक ठोस समाधान है। पराली जलाने के मुद्दे को हल करने के लिए किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। सदस्यों ने केंद्र सरकार से पराली जलाने के मुद्दे को ईमानदारी से संबोधित कर इसके समाधान के लिए पहल करने की अपील की।
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विरोध के बावजूद पास कर दिए गए 12 विधेयक 
संयुक्त किसान मोर्चा ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि लोकसभा ने विपक्ष के विरोध के बावजूद नागरिकों के हितों के मुद्दों को छोड़ 12 विधेयकों को पास कर दिया। केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के इस जनविरोधी व्यवहार की निंदा करता है। 

किसान संसद में शामिल होंगे विशेषज्ञ 
संसद के समानांतर चलने वाली किसान संसद में अर्थशास्त्री, कानून के जानकारों सहित अलग अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ सदन के अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इससे अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे किसानों को और समृद्ध किया जा सकेगा। 4-5 अगस्त को किसान संसद में न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी)की कानूनी गारंटी देने पर चर्चा की जाएगी। किसान सांसदों के साथ डॉ. देविंदर शर्मा, डॉ सुच्चा सिंह गिल, डॉ आर एस घुमन सहित दूसरे विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। 


किसानों को राजनीतिक दलों का भी समर्थन, जंतर मंतर पहुंचे नेता  
पिछले आठ महीनों से काले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को राष्ट्रीय लोकदल ने समर्थन दिया है। मंगलवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जंतर-मंतर पहुंचा और आंदोलनकारी किसानों से मुलाकात की। जयंत चौधरी ने सरकार से सवाल पूछा कि कोई सरकारी प्रतिनिधि किसानों के बीच क्यों नहीं पहुंचा। खिलाड़ियों, नेताओं से मुलाकात में गुरेज नहीं तो आखिरकार किसानों से सरकार की दूरी क्यों है। कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए आंदोलन संसद के करीब पहुंच गया है, फिर भी अंदर बैठे प्रतिनिधि जाग नहीं रहे। इस मौके पर दीपेन्द्र हुड्डा, प्रताप सिंह बाजवा, छाया वर्मा सहित राजनीतिक दलों ने किसानों को समर्थन दिया। सभी ने किसानों के इस संघर्ष का समर्थन करते हुए सरकार से उनके हितों की सुनवाई के लिए कदम उठाने को जरूरी बताया। साथ ही कहा कि अगर सरकार फिर भी ऐसा नहीं करती तो जनता इसका जवाब देगी। 

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