दिल्ली विश्वविद्यालय : चार वर्षीय प्रोग्राम को मिली मंजूरी, बैठक में भारी विरोध के बाद पास
अब इसे कार्यकारी परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बैठक में चार वर्षीय पाठ्यक्रम को रखे जाने से पहले ही शिक्षक और सदस्य इसको लेकर कड़ा विरोध जता रहे थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) अकादमिक काउंसिल की मंगलवार को देर रात तक चली बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत लाए जा रहे 4 वर्षीय डिग्री प्रोग्राम (एफवाईयूपी) को सदस्यों के भारी विरोध और आपत्ति के बाद पास कर दिया गया। अब इसे कार्यकारी परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। बैठक में एफवाईयूपी का प्रस्ताव रखे जाने से पहले ही शिक्षक और सदस्य इस पर भारी विरोध जता रहे थे।
इसके पास होने से बीए प्रोग्राम के बदले बीए ऑनर्स ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस हो गया है। वहीं पहले साल से जेनेरिक इलेक्टिव पेपर को हटा दिया गया है। पहले ऑनर्स में इसे पढ़ाया जाता था। इस पर भी 6 सदस्यों ने आपति दर्ज कराई। सभी कोर्स में तीसरे साल में 6 डिसिप्लिन स्पेसिफिक (डीएसई) पेपर पढ़ाए जाते थे। अब इन्हें घटाकर 4 कर दिया गया है। अब चार वर्षीय प्रोग्राम को डीयू की कार्यकारी परिषद् की बैठक में रखा जाएगा। वहां से पास होने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
इससे पूर्व, एनईपी को सदस्यों ने नकार दिया था। उन्होंने कई प्रावधानों का विरोध करते हुए एनईपी का प्रारूप विभागों, शिक्षक काउंसिल के पास सुझाव के लिए भेजने की वकालत की। बैठक में कोरोना महामारी से जान गंवाने वाले शिक्षकों और गैरशैक्षिक कर्मियों के परिजन को नौकरी देने का मुद्दा भी उठा। बैठक में एसी सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए।
एसी सदस्य आलोक रंजन पांडेेेय ने तदर्थ शिक्षकों के समायोजन, कोरोना महामारी से जान गंवाने वाले शिक्षकों व गैरशिक्षकों के परिजनों को नौकरी देने, मातृत्व अवकाश, प्रमोशन का मुद्दा उठाया। एसी सदस्य कपिला ने कहा कि एनईपी के ड्रॉफ्ट को विभागों व शिक्षक काउंसिल के पास सुझाव के लिए भेजना चाहिए।
एसी सदस्य डॉ. सुनील कुमार व डॉ. आशा रानी ने उन सभी प्रावधानों का विरोध किया, जो सेवा शर्तों, शिक्षकों की संख्या और स्थिति पर प्रतिकूल असर डालते हैं। उन्होंने कहा कि एनईपी समिति की सिफारिशों पर व्यापक विचार.विमर्श होना चाहिए। संबंधित सांविधानिक निकायों के सदस्यों सहित सभी हितधारकों से फीडबैक के लिए इसे भेजा जाए। उन्होंने अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट पर भी विरोध जताया।
डीटीए अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने कहा कि वर्ष 2013 में एफवाईयूपी के अनुभव से पता चलता है कि छात्रों ने चौथे वर्ष के लिए अतिरिक्त खर्च के विचार को खारिज कर दिया। चौथा वर्ष जुड़ने से कक्षाओं, प्रयोगशालाओं आदि से बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में 196 क्रेडिट शामिल हैं। इसमें केवल 84 क्रेडिट मुख्य पाठ्यक्रमों को आवंटित किए गए हैं।
डूटा का कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के आह्वान पर कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। कार्यालय के अंदर अकादमिक काउंसिल की बैठक चलती रही और बाहर शिक्षकों का प्रदर्शन। आगामी अकादमिक सत्र में एनईपी-2020 लागू करने के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने भाग लिया। एनईपी को अकादमिक मामलों की स्थायी समिति ने सोमवार को ही मंजूरी दे दी थी।
शिक्षकों का कहना है कि मिश्रित अध्ययन के नाम पर लाई जा रही यह प्रणाली मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज को बढ़ावा देती है। प्रदर्शन में शामिल क्रांतिकारी युवा संगठन ने कहा कि इस फैसले से डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के छात्रों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा। उनके लिए औपचारिक शिक्षा के सभी रास्ते बंद हो जायेंगे। मल्टीपल एग्जिट पॉइंट्स के कारण कमजोर वर्ग के छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। एनईपी-2020 से शिक्षकों के लिए नौकरियों में भारी गिरावट आएगी, क्योंकि उनका कार्यभार कम कर दिया जाएगा।
अकादमिक काउंसिल ने एनईपी को नकारा
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में मंगलवार को आयोजित अकादमिक काउंसिल (एसी) की बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को सदस्यों ने नकार दिया। उन्होंने कई प्रावधानों का विरोध करते हुए एनईपी का प्रारूप विभागों, शिक्षक काउंसिल के पास सुझाव के लिए भेजने की वकालत की। बैठक में कोरोना महामारी से जान गंवाने वाले शिक्षकों और गैरशैक्षिक कर्मियों के परिजन को नौकरी देने का मुद्दा भी उठा। शिक्षक एनईपी के तहत लाए जा रहे 4 वर्षीय स्नातक प्रोग्राम (एफवाईयूपी) पर लगातार आपत्ति जता रहे हैं। बैठक आधी रात तक जारी रहने की संभावना है।
मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई एसी बैठक में खबर लिखे जाने तक शून्य काल चल रहा था। एनईपी पर बहस शुरू नहीं हो सकी थी। एसी सदस्यों ने अलग-अलग मुद्दे उठाए। एजेंडा पेश नहीं किए जाने के कारण विभिन्न प्रस्तावों पर मंजूरी नहीं मिल सकी। एसी सदस्य आलोक रंजन पांडेेेय ने तदर्थ शिक्षकों के समायोजन, कोरोना महामारी से जान गंवाने वाले शिक्षकों व गैरशिक्षकों के परिजनों को नौकरी देने, मातृत्व अवकाश, प्रमोशन का मुद्दा उठाया। एसी सदस्य कपिला ने कहा कि एनईपी के ड्रॉफ्ट को विभागों व शिक्षक काउंसिल के पास सुझाव के लिए भेजना चाहिए। उन्होंने कहा 7वें व 8वें सेमेस्टर में रिसर्च के पेपर को शामिल करने और इसमें 20-25 घंटे का रिसर्च सॉफ्टवेयर शामिल करना होगा। छात्र बिना कार्यप्रणाली के रिसर्च कैसे करेगा।
एसी सदस्य डॉ. सुनील कुमार व डॉ. आशा रानी ने उन सभी प्रावधानों का विरोध किया, जो सेवा शर्तों, शिक्षकों की संख्या और स्थिति पर प्रतिकूल असर डालते हैं। उन्होंने कहा कि एनईपी समिति की सिफारिशों पर व्यापक विचार.विमर्श होना चाहिए। संबंधित सांविधानिक निकायों के सदस्यों सहित सभी हितधारकों से फीडबैक के लिए इसे भेजा जाए। उन्होंने अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट पर भी विरोध जताया।
डीटीए अध्यक्ष डॉ. हंसराज सुमन ने कहा कि वर्ष 2013 में एफवाईयूपी के अनुभव से पता चलता है कि छात्रों ने चौथे वर्ष के लिए अतिरिक्त खर्च के विचार को खारिज कर दिया। चौथा वर्ष जुड़ने से कक्षाओं, प्रयोगशालाओं आदि से बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। स्नातक पाठ्यक्रम के पहले या दूसरे वर्ष के बाद प्रमाणपत्र या डिप्लोमा के साथ संस्थान छोड़ने वालों की नौकरी की संभावनाओं पर भी कोई स्पष्टता नहीं है। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में 196 क्रेडिट शामिल हैं। इसमें केवल 84 क्रेडिट मुख्य पाठ्यक्रमों को आवंटित किए गए हैं।