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एम्स का अध्ययन : दूसरे से तीसरे सप्ताह में कोरोना मरीज को भर्ती करना जरूरी 

Thu, 19 Aug 2021 03:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 19 Aug 2021 03:41 AM IST
सार

  • दूसरी लहर में दो हजार से ज्यादा गंभीर मरीज हुए भर्ती, 19 फीसदी की हुई मौत
  • एम्स के डॉक्टरों ने अध्ययन में निकाला निष्कर्ष, 14 दिन बाद कोरोना बन रहा गंभीर

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AIIMS study: It is necessary to admit corona patient in second to third week
demo pic - फोटो : PTI

विस्तार

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों का मानना है कि दूसरे से तीसरे सप्ताह के बीच कोरोना मरीजों को भर्ती करना जरूरी है क्योंकि इस अवधि के दौरान मरीजों की हालत में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है। डॉक्टरों ने एक चिकित्सीय अध्ययन के जरिए यह निष्कर्ष निकाला है। 

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इस अध्ययन में दूसरी लहर के दौरान एम्स में भर्ती हुए दो हजार मरीजों की केस हिस्ट्री पर समीक्षा की गई थी। अध्ययन के दौरान इनमें से 19 फीसदी मरीजों की मौत तक हुई। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में 14 दिन बाद कोरोना गंभीर स्थिति में बदलने लगता है। 
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मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्ययन में 2080 मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें इस साल अप्रैल से जून माह के बीच भर्ती किया गया था। इनमें से 19.50 फीसदी मरीजों की मौत दर्ज की गई है जोकि अब तक की स्थिति में सबसे अधिक है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद एक मरीज को कम से कम आठ दिन रुकना पड़ा था। इन मरीजों में हर आयु वाले शामिल थे। एम्स के आठ विभागों ने मिलकर यह अध्ययन किया है। 
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एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि अध्ययन के दौरान 89 मरीजों की मौत अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर हो चुकी थी। जबकि अधिकांश 342 मरीजों की मौत रेस्पिरेटरी हाइपोक्सिया के चलते हुई। इन मरीजों में संक्रमण काफी तेजी से फैल चुका था और समय रहते इन्हें उपचार नहीं मिल सका। वहीं 28 मरीज ऐसे भी थे जिन्हें संक्रमण के दौरान हार्ट अटैक आने से मौत हुई। 

डॉक्टरों ने अध्ययन में लिखा है कि अस्पताल में जल्दी प्रवेश देने से मृत्युदर को कम किया जा सकता है। हालांकि संक्रमण होने के पहले सप्ताह के दौरान मृत्युदर को कम नहीं किया जा सकता। उन्होंने यहां तक कहा है कि टीकाकरण के जरिए मृत्युदर को रोका जा सकता है लेकिन अगर संक्रमण होने के बाद मरीज में एआरडीएस विकसित होता है तो उसे अस्पताल में भर्ती करना जरूरी है। इस स्थिति में मरीज की हालत काफी बिगड़ने लगती है और हर पल मौत की आशंका बढ़ने लगती है। 


कोरोना के साथ किडनी फेल होने से बढ़ी मौतें
अध्ययन में पता चला है कि कोरोना संक्रमण के गंभीर होने के साथ ही मरीजों में किडनी फेल भी हुई हैं जिसके चलते सबसे ज्यादा मृत्युदर इन मरीजों में दर्ज की गई है। 188 ऐसे मरीजों की मौत एम्स में दूसरी लहर के दौरान दर्ज की गई थी। वहीं रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, आइवरमेक्टिन जैसी दवाएं देने के बाद भी मौत की आशंका को कम नहीं कर सके। 

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