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कोरोना ने बदली आदतें , छिन गई कैंपस की रौनक

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 24 Sep 2021 06:34 PM IST
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कोरोना ने बदली आदतें , छिन गई कैंपस की रौनक
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- कक्षाएं खुलने के बाद भी कॉलेजों में उपस्थिति कम - छात्र अभी भी ऑनलाइन पढ़ाई को दे रहे तरजीह प्रगति मिश्रा नोएडा कोरोना महामारी का संकट धीरे धीरे थमने लगा है। केसों में कमी के साथ लोग अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट रहे हैं। स्कूल, कॉलेज खुले लंबा वक्त हो गया है। लेकिन शिक्षा पर कोरोना का प्रभाव अभी भी नजर आ रहा है। जिले के कॉलेजों में आज भी छात्रों की उपस्थिति औसतन कम हैं। कैंपस की चहल पहल अब बीते दिनों की बात सी लगने लगी है। कॉलेज के गलियारों में मौज मस्ती करते छात्र, कक्षाओं में लेक्चर सुनाते शिक्षक और कैंटीन की मस्तियां अब पहले जैसी नहीं नजर आती हैं। शहर के सभी कॉलेजों का हाल फिलहाल एक जैसा ही है। हालांकि निजी की अपेक्षा सरकारी कॉलेजों में छात्र संख्या अधिक है। सरकारी निजी में क्यों अलग हैं हालात - सरकारी स्कूल कॉलेजों में उपस्थिति बेहतर होने का एक कारण आर्थिक स्थिति का अंतर भी माना जा रहा है। अमूमन निजी शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रुप से संपन्न परिवारों के छात्र होते हैं। वहीं सरकारी में कई ऐसे छात्र मिल जाएंगे जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में सरकारी संस्थानों के छात्रों को संसाधनों के अभाव में ऑनलाइन शिक्षा रास नहीं आती है। वहीं निजी संस्थानों के छात्र घर में आराम से ऑनलाइन लैपटॉप या मोबाइल पर पढ़ने को वरीयता देते हैं। राजकीय परास्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि उनके कई छात्र लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन शिक्षा पाने में परेशानी महसूस करते थे। ऐसे छात्र कॉलेज खुलने से बेहद खुश नजर आ रहे हैं।
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बदली आदतों से डगमगाया धैर्य - आईएमएस कॉलेज की डीन डॉ मंजू गुप्ता के अनुसार कोविड महामारी को आए करीब 2 साल हो गए हैं। इन दो सालों ने लोगों की आदतें बदल जी हैं। जिसके चलते छात्रों को अब कैंपस आने में दिलचस्पी नहीं नजर आती है। घर पर ऑनलाइन कक्षा के दौरान छात्र आरामदायक स्थिति में बैठते हैं, बीच बीच में ब्रेक लेकर खाते पीते रहते हैं। लगातार एक स्थिति या एक जगह उन्हें बैठना नहीं पढ़ता । कॉलेज आने के लिए सुबह सुबह उठकर तैयार नहीं होना पड़ता है। इसलिए छात्रों को ऑनलाइन क्लासें समय के साथ अच्छी लगने लगी हैं। ऐसे में कैंपस खुलने के बाद भी छात्रों की उपस्थिति आधे से भी कम हैं। छात्रों का नुकसान ना हो इसलिए हम ऑनलाइन एवं सामान्य कक्षाएं दोनों का संचालन कर रहे हैं।
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प्रायोगिक विषयों में जरूरी है कैंपस - सेक्टर 62 स्थित पाक कला संस्थान के डॉ सुनील कुमार के अनुसार थ्योरी बचे ऑनलाइन पढ़े या ऑफलाइन ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन प्रायोगिक विषयों वाले छात्रों के लिए कक्षाओं में आना जरूरी हो जाता है। बिना प्रयोग किए आप विषय को उतना बेहतर नहीं समझ सकते हैं। हमने सरकार से अनुमति मिलने के बाद तुरंत कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया था। अब तो नए सत्र की कक्षाएं भी लगने लगी हैं। लेकिन छात्रों की उपस्थिति पहले की अपेक्षा थोड़ी कम ही है। हम ज्यादा से ज्यादा छात्रों को कैंपस आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जल्द ही संस्थान में कुछ नए एवं रोचक आयोजन भी होने वाले हैं।
गया नहीं कोरोना का डर - भले ही कोरोना केसों में रिकॉर्ड गिरावट आ चुकी हो, लेकिन अभी भी इसका डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वहीं मौसमीय बीमारियों का बढ़ता प्रकोप भी कई परिवारों में समस्या बनकर आया है। ऐसे में कई छात्र आज भी बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। क्षेत्रिय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ मंडल प्रो राजीव गुप्ता ने कहा कि छात्रों की उपस्थिति बढ़े इसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। हर शैक्षणिक संस्थान में एक सुरक्षित माहौल देने की कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन माहौल बदलने में अभी समय लग रहा है। --------- प्रगति मिश्रा 
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