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बेसहारा और बेजुबान जानवरों का सहारा बने युवा

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2020 03:45 PM IST
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Youth become the support of destitute and unruly animals
लॉकडाउन में बेजुबान कुत्तों को खाना खिलाते टेकचंद्र - फोटो : AMAR UJALA
प्रद्युम्न उपाध्याय गाजियाबाद। लॉकडाउन में बेजुबान और बेसहारा जानवरों पर आफत टूटी है। सड़कों और गलियों में घूमने वाले इन बेजुबान जानवरों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। ऐसे में शहर के कई युवा बेसहारा जानवरों को सहारा बन नई मिसाल पेश कर रहे हैं। जानवरों को खाना खिलाना और उनकी देखभाल करना, अब उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है। बीमार पड़ने वाले जानवरों का अपने खर्च पर ईलाज करा यह युवा अन्य लोगों के लिए मिसाल बनकी सामने आ रहे हैं। बेजुबान जानवरों पर लॉकडाउन में टूटी आफत में उनका सहारा बनने के लिए इन युवाओं की तरह लोगों को आगे आना चाहिए। --- जानवरों को खाना खिलाने व इलाज में अमन कर रहे मदद अशोकनगर में रहने वाले बीटेक छात्र अमन कौशिक लॉकडाउन में इन बेजुबानों केतारणहार बनकर सामने आए हैं। रोजाना क्षेत्र में घूमने वाली गाय और कुत्तों को नियमित खाना खिला रहे हैं। अगर कोई जानवर उन्हें बीमार दिखाई देता है तो वह उसका अपने खर्च पर ईलाज करवाने का प्रयास करते हैं। अमन को जानवरों से प्यार और उनकी मदद करने की प्रेरणा परिजनों से ही मिली। अमन ने संकट की इस घड़ी में गरीब लोगों के साथ इन बेजुबान जानवरों की मदद करने की लोगों से अपील की। --- लॉकडाउन में जानवरों का सहारा बने हैं टेकचंद्र एमएमएच में एलएलबी फाइनल ईयर के छात्र टेकचंद्र लॉकडाउन में सड़कों पर घूमने वाले बेजुबान जानवरों का सहारा बने है। विजयनगर के पास बिहारीपुरा में रहने वाले टेकचंद्र रोजाना सुबह-शाम सामान लेने के बहाने जानवरों को खाना खिलाने निकल जाते हैं। टेकचंद्र के मुताबिक इन बेजुबानों की मदद करने में काफी सुकून मिलता है। लॉकडाउन में लोगों के घरों में कैद होने से इनकी मदद करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में उनकी तरह लोगों को आगे आने की जरूरत है। --- बेजुबानों की भूख को मिटा रहे जावेदखान कैलाभट्टा निवासी जावेद खान सैफ कोरोना के चलते चल रहे लॉकडाउन का पूरा पालन कर रहे हैं। लेकिन सुबह शाम सब्जी व जरूरी सामान लेने निकलते वक्त बेजुबानों की भूख मिटा रहे हैं। जीटी रोड व कैला भट्टा क्षेत्र में ही घूमने वाले आवास कुत्तों व जानवरों को नियमित खाना खिलाना उन्होंने अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। उन्होंने शहरवासियों से अपने आसपास घूमने वाले इन बेजुबानों को खाना खिलाकर पुण्य कमाने की बात कही। --- इनसेट: बेजुबानों की मदद को आगे आएं लोग लॉकडाउन में भूख से परेशान गरीबों के साथ बेजुबान और बेसहारा जानवरों की मदद को लोगों को आगे आने की जरूरत है। तमाम घरों में गाय के लिए पहली रोटी निकालने का चलन बरकरार है। ऐसे में लॉकडाउन के वक्त आवारा गाय के अलावा कुत्तों व अन्य जानवरों व पक्षियों की भूख मिटाने को शहरवासियों को आगे आने की जरूरत है। ---
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