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नौकरी, कारोबार में पिछड़े तो तैयार कर लीं अपनी राहें

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 08:27 PM IST
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फोटो सहित
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----- नौकरी, कारोबार में पिछड़े तो तैयार कर लीं अपनी राहें - अपनी दुकान और कारोबार शुरू कर की नई शुरुआत माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। कोरोना काल के दौरान कोरोना कर्फ्यू और लॉकडाउन जैसे मुश्किल हालात में नौकरी और कारोबार में कई लोग पिछड़ गए। किसी की नौरी गई तो किसी का कारोबार भी पिट गया लेकिन ऐसे मुश्किल हालातों में अपनी राहें तैयार करने वाले युवा भी सामने आए। जिले के युवाओं ने नौकरी जाने का गम मनाने के बजाय अपना काम शुरू करने की ठानी। कोई चाय की दुकान चला रहा है तो किसी ने प्रोपर्टी डीलिंग में अपनी धाक जमा ली है। ----- मार्केटिंग में थी जॉब, पिछले साल चली गई: शास्त्रीनगर निवासी हिमांशु गर्ग एक फैन (पंखा) उत्पादन करने वाली कंपनी में काम करते थे। उन्होंने बताया कि मार्केटिंग डिपार्टमेंट में वह सेल्स का काम देखते थे। पिछले साल अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान उनकी जॉब चली गई। इसके बाद उन्होंने एक छोटी सी दुकान शुरू कर कन्फेक्शनरी उतापड बेचने शुरू किए। पांच से 10 हजार रुपए के उत्पाद लेकर दुकान शुरू की लेकिन अब उनका खुद का कारोबार अच्छा चल रहा है।
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----- प्रॉपर्टी डीलिंग में रखा कदम: बबली बताते हैं कि वह एक फैक्ट्री में सुपरवाइजर का काम करते थे। इसके बाद कोरोना काल में उनकी जॉब चली गई। पिछले साल अप्रैल से जून तक काफी संघर्ष झेला। इसके बाद घर से प्रॉपर्टी डीलिंग की शुरुआत की। इस क्ष्रेत्र में उनके संपर्क बनते चले गए। उन्होंने बताया कि फिलहाल काम की कमी है लेकिन नौकरी जाने के बाद ज्यादा परेशानी हुई थी। एक डीलिंग में पांच हजार से लेकर लाखों तक मिल जाते हैं।
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---- इंजीनियर की चाय की दुकान: बजरिया निवासी संतोष कौशिक पैसे से इंजीनियर हैं। लॉकडाउन में नोएडा में उनकी जॉब चली गई। इसके बाद सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रोजेक्ट से लोगों को लाभ दिलाता हूं। खर्च चलाने के लिए एक चाय की दुकान भी खोली है, जहां कुछ लड़कों को जिम्मेदारी दी है। उन्होंने कहा कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अपना काम हो ये बड़ी बात है।
---- ई- कॉमर्स की शुरुआत: मॉडल टाउन निवासी अभिनव सिंघल ने बताया कि वह लोहे की ट्रेडिंग का कारोबार कर रहे थे। साल 2020 में लॉकडाउन रहने से कारोबार प्रभावित हुआ। करीब छह महीने खरीद-फरोख्त बिलकुल बंद रही। इसके बाद ई-कॉमर्स के ट्रेड में जाने का विचार आया। ऑनलाइन सेल बाजार के नाम से पोर्टल बनाया। यह ठीक बड़ी ई- कॉमर्स कंपनियों की तरह ही है। पिछले छह महीने में 40 दुकानदार और उत्पादक इस पर जुड़े हैं। -----
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