{"_id":"5f8edbcd8ebc3e9ba43c05d5","slug":"ghaziabad1603197901","type":"story","status":"publish","title_hn":"आयोडीन की कमी से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास होता है प्रभावित","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
आयोडीन की कमी से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास होता है प्रभावित
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयोडीन की कमी से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास होता है प्रभावित
विज्ञापन
- आयोडीन की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी होती है प्रभावित
- सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित होंगे जागरूकता कार्यक्रम
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। आयोडीन की कमी के कारण बच्चों का मानसिक विकास बाधित हो सकता है। आयोडीन की कमी के कारण
सीखने की क्षमता कम हो जाती है और बच्चा मंद बुद्धि का शिकार हो जाता है। इसके अलावा शरीर में आयोडीन की कमी से मुख्य रूप से घेंघा रोग होता है। इसमें गला फूल जाता है। अमीनो एसिड के साथ मिलकर आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि को हार्मोन का उत्पादन करने की ताकत देता है। यह हार्मोन शारीरिक विकास के लिए जरूरी होते हैं। आयोडीन की कमी के चलते थायरायड अनियंत्रित हो जाता है। शरीर में आयोडीन की कमी मानसिक गतिविधियों को अवरुद्ध करती है। आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होने पर मन शांत रहता है। तनाव कम होता है। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 21अक्टूबर को पूरे विश्व में आयोडीन अल्पता दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोग आयोडीन के महत्व को समझें।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. नीरज अग्रवाल का कहना है कि आयोडीन शिशु के दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मां में आयोडीन की कमी से पैदा होने वाले बच्चे का शारीरिक विकास भी पूरा नहीं हो पाता। भ्रूण के समुचित विकास के लिए आयोडीन एक जरूरी पोषक तत्व है। यह शिशु के दिमाग के विकास में अहम भूमिका अदा करता है। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का काम भी आयोडीन करता है। कोविड काल के चलते हमें यह जानना बड़ा जरूरी है कि अन्य विकारों के अलावा शरीर में आयोडीन की कमी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करती है। उन्होंने बताया विश्व आयोडीन अल्पता दिवस पर बुधवार को जनपद के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे, जिसमें आशा और एएनएम को आयोडीन का महत्व समझाया जाएगा, ताकि वह क्षेत्र में लोगों को ठीक से इसके प्रति जागरूक कर सकें।
आयोडीन की कमी से बचाव कैसे करें
शरीर में आयोडीन की कमी न होने पाए, इसके लिए आयोडाइज्ड नमक का प्रयोग करें। एक ग्राम नमक में करीब 77 माइक्रो ग्राम आयोडीन होता है। इसके अलावा आलू, दूध, अंडा, दही, स्ट्राबेरी और केला भोजन में शामिल करने से आयोडीन की पर्याप्त मात्रा मिल जाती है।
विज्ञापन
आयोडीन के कमी के लक्षण
कमजोरी होना, वजन बढ़ना, थकान महसूस होना, त्वचा में रूखापन, बाल झड़ना, दम घुटना, नींद अधिक आना, माहवारी अनियमित होना, हृदय गति धीमी होना, यादाश्त कमजोर होना।
-----------
आशुतोष यादव
विज्ञापन
विज्ञापन