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सरकारी स्कूल में पढेंगे कॉलेज के विद्यार्थी
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:53 PM IST
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गांव मोहना के प्रस्तावित सरकारी कॉलेज के भवन का निर्माण भले न हुआ हो, लेकिन दाखिला प्रक्रिया नए सत्र से शुरू हो जाएगी। हालांकि अभी कक्षाएं कहां लगाई जाएंगी, इस पर संशय बरकरार है। गांव के सरकारी हाई स्कूल को कक्षाएं लगाने के लिए चिंहित किया गया है। इसकी मंजूरी आनी बाकी है। माना जा रहा है कि कॉलेज शुरू होने से आसपास के 100 गांवों को फायदा पहुंचेगा।
पृथला के विधायक टेकचंद शर्मा ने ग्रामीणों की यह मांग 18 मई को मोहना अनाज मंडी की रैली में मुख्यमंत्री मनोहरलाल के समक्ष रखी थी। उनकी इस मांग को सीएम ने मंजूरी देते हुए कहा था यदि पंचायत जमीन देगी तो यहां कॉलेज बना दिया जाएगा।
उनकी इस घोषणा पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने पंचायत से मुफ्त जमीन देने के लिए प्रस्ताव मांगा था। कालेज बनाने के लिए 10 से 12 एकड़ भूमि की जरूरत है। प्रशासन की मांग पर पंचायत ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित भेज दिया है। इसलिए अब घोषणा को अमल में लाने का काम किया है।
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विधायक टेकंचद शर्मा की मानें तो प्रदेश सरकार ने सरकारी कॉलेज की मांग को पूरा कर दिया। खास बात तो यह कि कॉलेज में आगामी सत्र के दौरान दाखिले की प्रकिया को भी मंजूरी दे दी है। आगामी सत्र में छात्रों को दाखिले के लिए बल्लभगढ़, फरीदाबाद या पलवल नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि गांव में ही शिक्षा ग्रहण करने को मौका मिलेगा। उनका कहना है कि जब तक इमारत नहीं बनेगी। तब तक सरकारी स्कूल में कॉलेज की कक्षाएं लगाई जाएंगी।
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पृथला के विधायक टेकचंद शर्मा ने ग्रामीणों की यह मांग 18 मई को मोहना अनाज मंडी की रैली में मुख्यमंत्री मनोहरलाल के समक्ष रखी थी। उनकी इस मांग को सीएम ने मंजूरी देते हुए कहा था यदि पंचायत जमीन देगी तो यहां कॉलेज बना दिया जाएगा।
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उनकी इस घोषणा पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने पंचायत से मुफ्त जमीन देने के लिए प्रस्ताव मांगा था। कालेज बनाने के लिए 10 से 12 एकड़ भूमि की जरूरत है। प्रशासन की मांग पर पंचायत ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित भेज दिया है। इसलिए अब घोषणा को अमल में लाने का काम किया है।
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विधायक टेकंचद शर्मा की मानें तो प्रदेश सरकार ने सरकारी कॉलेज की मांग को पूरा कर दिया। खास बात तो यह कि कॉलेज में आगामी सत्र के दौरान दाखिले की प्रकिया को भी मंजूरी दे दी है। आगामी सत्र में छात्रों को दाखिले के लिए बल्लभगढ़, फरीदाबाद या पलवल नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि गांव में ही शिक्षा ग्रहण करने को मौका मिलेगा। उनका कहना है कि जब तक इमारत नहीं बनेगी। तब तक सरकारी स्कूल में कॉलेज की कक्षाएं लगाई जाएंगी।