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छात्र संगठन नहीं चाहते अप्रत्यक्ष चुनाव, सरकार के खिलाफ निकाली भड़ास

Mon, 27 Jun 2016 03:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Mon, 27 Jun 2016 03:00 AM IST
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Student organizations do not want indirect elections, derived outburst against the government
सीएम मनोहर लाल खट्टर - फोटो : amar ujala

प्रदेश सरकार द्वारा छात्र संघ चुनाव बहाली की घोषणा से छात्र संगठनों की बांछें खिल गई हैं। लेकिन वे किसी भी सूरत में अप्रत्यक्ष प्रक्रिया नहीं चाहते। शनिवार देर शाम सैनिक कॉलोनी स्थित शांति निकेतन स्कूल में आयोजित एक परिचर्चा में छात्र संगठन व राजनैतिक दलों के नुमाइंदों ने सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली।

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जबकि एबीवीपी सरीखे छात्र संगठन ने सरकार का बचाव भी किया। परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे पदमश्री डॉ. ब्रह्मदत्त ने छात्रों को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें पढ़ने की नसीयत दी। जबकि सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. एमपी सिंह ने छात्रों को लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित किया।
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 इस मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(तकनीकी छात्र) के प्रदेश सहसंयोजक दामोदर भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार ने छात्र संघ चुनाव बहाली का निर्णय देकर एक मजबूत सरकार और छात्र हितैषी सरकार होने का परिचय दिया है।
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क्योंकि 1996 से बंद छात्र संघ बहाली का मुद्दा राजनैतिक पार्टियों ने अपने घोषणा पत्र तक ही सीमित रखा। सत्ता मिलने के बाद उन्होंने कभी उस पर चर्चा तक नहीं की।

जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष व कांग्रेसी नेता भूदत्त पाराशर ने चुनाव बहाली को छात्रों के साथ भद्दा मजाक बताया और कहा कि सरकार इस निर्णय से भाजपा एवं आरएसएस से संबंधित छात्रों को बैकडोर से कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी पर कब्जा करना चाहती है।

युवा कांग्रेसी नेता सुमित गौड़, रिंकू चंदीला ने छात्र संघ चुनाव बहाली को एक छलावा बताया। गांव भनकपुर के सरपंच व पूर्व छात्र नेता सचिन माढोतिया ने सरकार के निर्णय की सराहना की और कहा कि पढ़ी-लिखी पंचायत की घोषणा के बाद सरकार ने छात्र संघ चुनाव बहाली की घोषणा कर छात्र व युवा हितैषी होने का सबूत दिया है।


युवा आगाज के संयोजक जसवंत सैनी ने अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अप्रत्यक्ष चुनाव से प्रतिभावान छात्र नेता आगे नहीं बढ़ पाएगा। सरकार की कठपुतली बनने वाले छात्र नेता ही इसका लाभ उठाएंगे।

 

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