फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Social media will prevent ragging in colleges of the district

सोशल मीडिया से जिले के कॉलेजों में रैगिंग रोकी जाएगी

Mon, 22 Aug 2016 12:02 AM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 22 Aug 2016 12:02 AM IST
विज्ञापन
Social media will prevent ragging in colleges of the district
रै‌‌गिंग - फोटो : Demo Pic

रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस ने कॉलेजों के साथ मिलकर इस बार सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू कर दिया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पुलिस और कॉलेज प्रबंधन व्हाटस एप ग्रुप पर फ्रेशर छात्रों को जोड़ा गया है। 

विज्ञापन


इनके अलावा कॉलेजों के कुछ मुख्य अफसरों को भी इन ग्रुपों में शामिल करते हुए इलाके के चौकी इंजार्ज को जोड़ना  शुरू कर दिया है। इससे न सिर्फ नए छात्र सुरक्षा महसूस करेंगे बल्कि कॉलेज में किसी भी प्रकार की गतिविधि की पुलिस को जानकारी हासिल हो सकेगी। 
विज्ञापन


दरअसल, सोमवार से नया सत्र चालू हो जाएगा और जिले में लाखों की तादाद में छात्र-छात्राएं आ जाएंगे। नए छात्र आएंगे तो रैगिंग की भी संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

जिले  में रैगिंग न हो इसके लिए पिछले सप्ताह ही कॉलेज प्रबंधन और संबंधित थानाप्रभारियों के साथ डीएम ने बैठक कर साफ कर दिया था कि किसी भी हालत में रैगिंग की घटना नहीं होनी चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


डीएम ने ही कॉलेज प्रबंधन और पुलिस को सलाह दी थी कि वह सोशल मीडिया का लाभ उठाएं और व्हाटसऐप ग्रुप के माध्यम से नए छात्रों को जोडे़। जिससे नए सत्र के छात्र-छात्राओं में सुरक्षा का माहौल भी पैदा होगा और कॉलेज से संबंधित कोई भी खबर होगी तो वह भी पुलिस तक पहुंच जाएगी।

कॉलेजों की तैयारी पूरी
नोएडा स्थित एमिटि यूनिवर्सिटी, जेएसएस, आईएमएस समेत अन्य कॉलेजों ने भी एंटी रैगिंग के लिए पूरी तैयारी करने का दावा किया है। इन कॉलेजों ने सीसीटीवी कैमरे, पोस्टर और पुलिस-कॉलेज प्रबंधन के नंबर जगह-जगह लिखवा रखे हैं। जिससे रैगिंग न हो पाए। यदि किसी तरह की कोई समस्या हो तो उसे तुरंत बताया जा सके। कॉलेजों ने हॉस्टल से लेकर मैस और गैलरी आदि में सीसीटीवी कैमरे लगवाएं हैं।

नए छात्रों का कैंपस अलग और फैकल्टी भी रहेगी साथ
ग्रेनो के जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ने बीटैक प्रथम वर्ष के छात्रों का कैंपस अलग बनाया गया है। फ्रेशर छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल बनाए हुए हैं।

इनका मैस भी अलग से बनाया हुआ है। शाम पांच बजे के बाद फ्रेशर को कैंपस से बाहर जाने पर पांबदी है। इससे न तो वह रात में सीनियर छात्रों से मिलेंगे और न ही रैगिंग की घटना होगी। 

कई बार सीनियर और जूनियर छात्रों में आपसी विवाद को भी रैगिंग का नाम दे दिया जाता है।  कॉलेज चेयरमैन ने बताया कि रैगिंग रोकने के लिए वह एक और कार्य करने जा रहे हैं। उन्होंने कॉलेज में आवास बना दिए हैं और उनकी फैकल्टी कॉलेज में ही रहेगी।


क्या कहते हैं अधिकारी
जिले के सभी शिक्षण संस्थान प्रबंधनों के साथ वह बैठक कर चुकेहैं और लगातार उनके साथ वार्ता होती रहती है। चूंकि नया शैक्षिक सत्र शुरू हो रहा है तो ऐसे में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया का भी इसमें सहारा लिया जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed