फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Faridabad News ›   Parents persist on to not submit grew fees

बढ़ी फीस न देने पर अड़े अभिभावक, स्कूल ने भेजने शुरु किए नोटिस

Wed, 13 Jul 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 13 Jul 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
Parents persist on to not submit grew fees
स्कूल

 नया सत्र शुरू हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन स्कूलों में फीस का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एडमिशन और एनुअल चार्ज स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच खींचतान की वजह बन गया है। शहर के नामी-गिरामी स्कूलों के अभिभावक बढ़ी फीस का भुगतान न करने पर अड़े हुए हैं। वहीं, स्कूलों ने अभिभावकों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस में फीस का भुगतान न करने वाले बच्चों के नाम काटकर स्कूलों से निकाले जाने की चेतावनी तक दी जा रही है।

विज्ञापन


हाल ही में बल्लभगढ़ के एक निजी स्कूल में बढ़ी फीस जमा न करने पर पांच बच्चों को स्कूल से निकाले जाने का मामला सामने आया है। इसके बाद से लगभग सभी स्कूलों के अभिभावक फीस बढ़ोतरी के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। अभिभावकों के मुताबिक, अनुचित तरीके से फीस नहीं बढ़ाई जा सकती। पिछले दिनों मंडलायुक्त की तरफ से दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन स्कूल नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन


शिक्षा का व्यवसायीकरण होने के चलते एलकेजी के बच्चे की फीस 15 से 20 हजार रुपये वसूली जा रही है, जबकि शिक्षा विभाग के नियमानुसार एलकेजी कोई क्लास ही नहीं होती। स्कूल प्रबंधन हर साल एडमिशन और एनुअल चार्ज के तौर पर अभिभावकों से मोटी रकम की मांगडिमांड करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कूल के खिलाफ पुलिस को दी शिकायत
नहर पार स्थित मॉडर्न डीपीएस के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भूपानी थाने में शिकायत दी है। स्कूल के पैरेंट्स एसोसिएशन के सचिव तुलिंद्र कटोच ने बताया कि बढ़ी फीस न देने पर बच्चों को परेशान किया जा रहा है, जबकि मंडलायुक्त की तरफ से रोक लगी हुई है। आरोप है कि स्कूल के प्रधानाचार्य बच्चों को अपने ऑफिस में बार-बार बुलाकर दबाव बना रहे हैं। बढ़ी फीस जमा न करने पर टर्मिनेट करने की चेतावनी दी जा रही है।

ऐसे डाला जा रहा जेब पर बोझ
एनुअल चार्ज : निजी स्कूलों में एनुअल चार्ज के तौर पर अभिभावकों की जेब पर सबसे ज्यादा बोझ डाला जाता है। ट्यूशन फीस में भारी बढ़ोतरी करने के साथ ही एनुअल चार्ज भी बढ़ा दिया जाता है।

एडमिशन फीस : एडमिशन फीस विवाद की वजह बनी हुई है। स्कूल में दाखिले के समय एडमिशन चार्ज वसूला जाता है। प्रतिबंध के बाद भी हर साल एडमिशन चार्ज के तौर पर मोटी रकम वसूली जाती है।

महंगी किताबें व यूनिफॉर्म : शिक्षा के व्यवसायीकरण का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभिभावकों को स्कूलों की बताई दुकान से ही किताबें व यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ती है। कई स्कूल तो खुद इसे उपलब्ध कराते हैं। कमीशन से आमदनी के चलते यूनिफॉर्म व किताबें महंगे दाम पर मिलती हैं।

प्यूपिल फंड: प्यूपिल फंड को अगर समझा जाए तो इसे छात्र कोष कहेंगे और स्कूल डेवलेपमेंट फंड को विद्यालय विकास फंड कहेंगे, यानी ऐसे फंड जिसका पढ़ाई से कोई लेना देना तक नहीं और बच्चों से वसूला जा रहा है। प्यूपिल फंड लेकर छात्रों का स्कूल में बैंक अकाउंट खुलवाया जा रहा है।

निजी स्कूल प्रबंधक सरकार पर हावी हैं। स्कूल वाले तरह-तरह के मदों के तहत अभिभावकों से अनाप-शनाप फीस वसूल रहे हैं। अफसरों के बच्चे निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते हैं और आम लोगों पर बढ़ी फीस का बोझ डाला जाता है।

-एनएल जांगिड़, अध्यक्ष, फरीदाबाद अभिभावक एकता मंच

अवैध तरीके से बढ़ी हुई फीस जमा कराने का दबाव अभिभावकों पर बनाया जा रहा है, जबकि मंडलायुक्त ने इस पर रोक लगाई हुई है। अभिभावक बढ़ी फीस देने से मना कर रहे हैं तो बच्चों को परेशान किया जा रहा है।
-तुलिंद्र कटोच, सचिव-एमडीपीएस स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन

निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी को लेकर फिलहाल हमारे पास किसी अभिभावक ने शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत आती है तो जांच-पड़ताल कर कार्रवाई जरूर की जाएगी।
-सतेंद्र वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी (कार्यवाहक)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed