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छुट्टियों के बाद खुले स्कूल, बच्चे बोले बिना किताब के कैसे पढ़ें अखिलेश अंकल

Sun, 03 Jul 2016 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 03 Jul 2016 01:30 AM IST
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Open school after the holidays, the children how to read the book without uttering Akhilesh Uncle
स्कूल - फोटो : Demo Pic

गर्मी की छुट्टियां पूरी होने के साथ ही शनिवार को जनपद के सभी सरकारी विद्यालय फिर से खुल गए। स्कूल खुलने के पहले ही दिन बच्चों को शिक्षा का आधिकार देने का दावे की पोल खुल गई।

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ज्यादातर स्कूलों में चारो ओर अव्यवस्थाएं दिखाई दी। मूलभूत सुविधाओं का आभाव रहा। गंदगी फैली रही। नल खराब पड़े होने से उन्हें शुद्ध पानी पीने को नही मिला। शौचालयों की स्थिति खराब थी। 
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वहीं सबसे खास बात यह रही कि शासन की लापरवाही के चलते किताबें और यूनिफार्म नही मिलने से बच्चे मायूस दिखे। स्कूलों में होने वाली पढ़ाई और भूलभूत सुविधाओं को लेकर अमर उजाला की टीम द्वारा से हुई बातचीत में ग्रेटर नोएडा के तुगलपुर गांव के सरकारी विद्यालय में पढने वाली छठीं कक्षा की छात्रा पूजा ने मुख्यमंत्री से पूछा है कि वह बिना किताब के कैसे पढ़ाई करें।
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पूजा ने कहा कि टीचर कहते हैं कि शासन से बजट आने के बाद किताबें मिलेंगी। सातवीं कक्षा के छात्र रोहन ने कहा कि एक अप्रैल से स्कूल में पढ़ाई शुरू हुई थी। गर्मी की छुट्टी भी बीत गई लेकिन अभी तक किताबें नही मिली है। 

किताब नही होने से छुट्टियों में घर में पढ़ाई नही हो सकी थी। सातवीं की छात्रा हेमा ने कहा कि स्कूल में एक नल खराब पड़ा हैं। दूसरे में गंदा पानी आता है। पीने के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था नही गई है। 

प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष मेघराज भाटी ने बताया कि स्कूल खुलने से पहले कई बार जिलाधिकारी और बीएसए को पत्र लिखकर किताब, यूनिफार्म और स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की मांग की गई। लेकिन कोई कार्रवाई नही की गई। बच्चे अपने अधिकारों से वंचित है।  

स्कूल में झाडू लगाते दिखे बच्चे
सुबह आठ बजे स्कूल खुलने के साथ ही अमर उजाला की टीम साकीपुर स्थित सरकारी विद्यालय का हाल जानने पहुंची तो वहां बच्चे पढ़ाई करने के बजाए झाडू लगाते दिखाई दिए। 

स्कूलों में बच्चों की संख्या रही कम
ग्रेटर नोएडा के स्कूलों में पहले दिन बच्चों की संख्या काफी कम रही। तुगलपुर प्राथमिक विद्यालय में करीब 350 बच्चों में 100 बच्चे ही आए। साकीपुर, जैतपुर के स्कूल में बच्चों की संख्या करीब 40 से 50 थी। वहीं सूरजपुर में भी बच्चों की संख्या कम रही। लगभग यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों रही।  


पहले दिन पढ़ाई कम मौज मस्ती ज्यादा
छुट्टी बिताकर पहले दिन स्कूल पहुंचे बच्चों में मौज मस्ती की धुन सवार थी। स्कूल में बच्चे पढ़ाई कम और शोरगुल ज्यादा करते दिखाई दिए। थोड़ी देर पढ़ाई करने के बाद बच्चे नए साथियों के साथ खेलकूद में व्यस्त रहे। 

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