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उत्तराखंड: आपदा से उजड़े 83 गांवों को सरकार ने बसाया, लेकिन नहीं हो सका रैणी गांव का पुनर्वास

Thu, 14 Oct 2021 09:41 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 14 Oct 2021 09:41 AM IST
सार

राज्य में आपदा के कारण 400 से अधिक गांव चिन्हित किए गए हैं। सरकार पहले चरण में अत्यधिक संवेदनशील गांवों का पुनर्वास कर रही है। बताया गया कि 2011 में सरकार ने आपदा उपरांत प्रभावित गांवों व परिवारों की पुनर्वास नीति के तहत वर्ष 2017 से पहले दो गांवों के 11 परिवारों का पुनर्वास हुआ था।  

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uttarakhand news: government settled 83 villages destroyed by the disaster, but cannot be rehabilitated in Raini village
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं ने 83 से ज्यादा गांवों को उजाड़ दिया। पिछले साढ़े चार साल में प्रदेश सरकार ने इन गांवों के 1447 परिवारों का सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास किया। गांवों के पुनर्वास पर सरकार अब तक 61.02 करोड़ खर्च कर चुकी है।

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पुनर्वास के कार्यों को प्राथमिकता आधार पर पूरा करें: सीएम
यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सामने आई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा के लिहाज से संवेदनशील गांवों के पुनर्वास के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें। 
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400 से अधिक गांव चिन्हित
बता दें कि राज्य में आपदा के कारण 400 से अधिक गांव चिन्हित किए गए हैं। सरकार पहले चरण में अत्यधिक संवेदनशील गांवों का पुनर्वास कर रही है। बताया गया कि 2011 में आपदा के उपरांत प्रभावित गांवों व परिवारों की पुनर्वास नीति के तहत वर्ष 2017 से पहले दो गांवों के 11 परिवारों का पुनर्वास हुआ था।
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वर्ष 2017 के बाद से 81 गांवों के 1436 परिवारों को पुनर्वासित किया गया। गढ़वाल मंडल के चमोली जिले के 15 गांवों के 279 परिवार, उत्तरकाशी जनपद के पांच गावों के 205 परिवार, टिहरी जिले के 10 गांवों के 429 परिवार एवं रूद्रप्रयाग जनपद के 10 गांवों के 136 परिवार पुनर्वासित किए गए।।

जबकि कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ के 31 गांवों के 321 परिवार, बागेश्वर जिले के नौ गांवों के 68 परिवार, नैनीताल जिले के एक गांव के एक परिवार एवं अल्मोड़ा जिले के दो गांवों के आठ परिवार विस्थापित किए गए। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरूगेशन व वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

पुनर्वास हुए परिवारों को मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं : धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पुनर्वासित परिवारों के लिए पुनर्वास क्षेत्र में बिजली, पानी एवं अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की पर्याप्त व्यवस्था हो। जिन पुनर्वासित गांवों को सड़क से जोड़ा जाना है, उनकी सूची जल्द शासन को उपलब्ध कराई जाए।

पुनर्वासित गांवों में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यवस्था मनरेगा से कन्वरजेंस एवं जिलाधिकारी के नियंत्रणाधीन विभिन्न फंडों से की जाए। इसके बाद भी कोई परेशानी हो तो मामला शासन स्तर पर लाया जाए। मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आठ जिलों के पुनर्वासित गांवों के लोगों से बात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी समस्याओं का उचित हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। 

लगातार होता रहे गांवों का सर्वे 
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील गांवों का लगातार सर्वे किया जाए। सर्वे के बाद जिन गांवों एवं परिवारों को तत्काल पुनर्वासित करने की आवश्यकता है, उसकी सूची भी जल्द उपलब्ध कराई जाए।

रैणी गांव का पुनर्वास अटका

वहीं चिपको आंदोलन की भूमि रैणी गांव का पुनर्वास अटक गया है। रैणी गांव के पुनर्वास के लिए तय की गई भूमि को लेकर सुभांई गांव के ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। अब जिला आपदा प्रबंधन विभाग नीती घाटी में भूमि तलाश रहा है। विगत सात फरवरी को ऋषि गंगा में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ के बाद रैणी गांव भू-धंसाव और भूस्खलन की चपेट में आ गया था। गांव के निचले हिस्से में कई मकान भूस्खलन की जद में आ गए थे।

गांव के 55 परिवारों का पुनर्वास किया जाना है। जिला प्रशासन ने गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण करवाया था। भूवैज्ञानिकों ने सुभांई गांव में पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित की थी, लेकिन सुभांई गांव के ग्रामीणों ने इस भूमि पर आपत्ति दर्ज की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह खेती की जमीन है। पूर्व में अन्य गांवों के परिवारों के पुनर्वास के लिए भी भूमि दी जा चुकी है। लिहाजा गांव की शेष भूमि को पुनर्वास के लिए नहीं दिया जा सकता। 

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि रैणी गांव के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है। गांव के 55 परिवारों के पुनर्वास की सूची शासन को भेज दी गई है। नीती घाटी में अन्य जगहों पर गांव के पुनर्वास के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जनपद में अभी तक आपदा प्रभावित 15 गांवों के 279 परिवारों का पुनर्वास किया जा चुका है। घाट ब्लॉक के सरपाणी गांव के 25 और झलिया के दो परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। 

डर के साए में जी रहे ग्रामीण
ऋषि गंगा की बाढ़ के बाद से रैणी गांव के लोग आफत झेल रहे हैं। यह गांव ऋषि गंगा नदी के किनारे स्थित है। बारिश होने पर ऋषिगंगा का जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे आपदा से डरे ग्रामीण रातभर सो नहीं पा रहे हैं। ग्रामीण संग्राम सिंह और पूरन सिंह का कहना है कि गांव में कई भवन भू-धंसाव से जर्जर हो चुके हैं। ग्रामीण भारी बारिश होने पर अपने घरों को छोड़कर जंगल में रात बिताने को मजबूर हैं।

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