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लोकप्रिय छात्रनेता और मेधावी छात्रा थीं हरिद्वार में भीख मांगने को मजबूर हुई हंसी प्रहरी 

Thu, 22 Oct 2020 12:09 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 22 Oct 2020 12:09 AM IST
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Uttarakhand: Literate Beggar Hansi Prahari Was Very Intelligent and Famous Student Leader
hansi - फोटो : amar ujala

हरिद्वार में भिक्षा मांगकर गुजारा कर रहीं हंसी प्रहरी छात्र जीवन में एसएसजे परिसर में काफी लोकप्रिय छात्रनेता थीं। वह परिसर में निर्विरोध छात्रा उपाध्यक्ष भी चुनी गईं थीं। वह खासकर गरीब विद्यार्थियों और महिला हितों के लिए लगातार संघर्षरत रहीं। छात्र-छात्राओं की मदद के लिए वह सदैव तत्पर रहतीं थीं। उनके साथ छात्रसंघ में रहे पदाधिकारी भी हंसी की वर्तमान स्थिति से दुखी हैं। उन्होंने भी हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। 

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हंसी ने एसएसजे परिसर से अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। सरल स्वभाव और व्यवहार कुशल हंसी छात्र-छात्राओं के मध्य काफी लोकप्रिय रहीं। लोकप्रियता के चलते ही वह सत्र 1999-2000 में एसएसजे परिसर में छात्रसंघ की निर्विरोध छात्रा उपाध्यक्ष चुनीं गईं। उस वर्ष उनके खिलाफ किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन कराने की हिम्मत नहीं जुटाई। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाएं बोलती थीं। 
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तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष रहे ख्याली पांडे कहते हैं कि हंसी गरीब परिवार की होनहार छात्रा रही। वह काफी व्यवहार कुशल रही। छात्र-छात्राओं के मध्य उनकी अच्छी पैठ थी। हर किसी की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहीं। तब वह छात्रसंघ में निर्विरोध छात्रा उपाध्यक्ष भी बनीं। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह बिष्ट (डिंपल) का कहना है कि हंसी काफी व्यवहार कुशल थीं। होशियार और दूसरे से काफी अच्छी तरीके से बोलते थीं।
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सौम्यता और सादगी उनके जीवन में थी। पूर्व छात्रसंघ उपसचिव चंदन रावत बताते हैं कि छात्र जीवन में हंसी में कोई दिखावा नहीं था। छात्र-छात्राएं यदि उन्हें कोई समस्या बताते थे। वह स्वयं परिसर के विभागों में जाकर उनकी समस्याओं का समाधान करवाता थी। महिला हितों के लिए वह सतत संघर्षरत रहीं। उनकी मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

बहुत मेधावी थी हंसी

एसएसजे परिसर के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. जगत सिंह ने बताया कि हंसी मेधावी छात्रा रहीं। पढ़ाई में उनकी काफी रुचि थी। परिसर में पढ़ने के दौरान मैंने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्हें कुछ समय ट्यूटर भी रखा। हंसी प्रहरी की वर्तमान स्थित से काफी दुख है। उनकी मदद को सभी लोगों को आगे आना चाहिए।

शादी के बाद मायके से संपर्क टूट गया था हंसी का
अपनी मर्जी से शादी के बाद हंसी का मायके रणखिला गांव से संपर्क काफी कम रहा। प्रशासन के अधिकारी जब गांव में मदद के लिए गए तो पता लगा कि वह काफी समय से गांव नहीं आती हैं। एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, डॉ. अजीत तिवारी ने गांव में रहने वाली हंसी की छोटी बहन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुष्पा से उसके बारे में जानकारी ली।

एसडीएम ने बताया कि परिजनों का कहना था कि हंसी ने पिता की मर्जी के खिलाफ 2003 में लखनऊ निवासी नन्हे लाल से विवाह किया। विवाह के बाद हंसी की दिक्कतें बढ़तीं गईं। मायके से भी उसका संपर्क कटा रहा। वर्ष 2004 में हंसी की पुत्री हुई, लेकिन पुत्री को पालने में असमर्थता जताकर मायके में छोड़ गई। हंसी की बेटी नवोदय विद्यालय ताड़ीखेत में 11वीं में पढ़ती हैं। एसडीएम ने बताया कि हंसी का भाई अनुराग दिल्ली में नौकरी करता है।

उसकी माता दिल्ली में अनुराग के साथ रहती हैं। लॉकडाउन पर कुछ समय के लिए घर आई हैं। परिजनों को हंसी के पुत्र होने की कोई जानकारी नहीं है। वह पुत्र को लेकर कभी गांव नहीं आई। परिजनों ने बताया कि जब भी रणखिला गांव आती थी तो जल्दी लौटने की बात कहती थीं कि हरिद्वार में उसे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना है। एसडीएम ने बताया कि पिछले सालों में हंसी को सीएम राहत कोष से सहायता राशि के कई चेक जारी हुए हैं। इनकी तिथि और राशि संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है। 

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