Joshimath: कम मुआवजे की खबर मिली तो राहत कैंप छोड़ अपने क्षतिग्रस्त घरों मे लौटे लोग, ठंड में ऐसे गुजारी रात
पीड़ितों का कहना है कि हमारे भवनों पर अभी तक रेड क्रॉस के निशान तक नहीं लगाए गए हैं। प्रशासन से हमारी यही मांग है कि हमें इसका स्थायी समाधान चाहिए।
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जोशीमठ में भू-धंसाव से प्रभावित होटल माउंटव्यू के पीछे रहने वाले आठ परिवार के लोग रविवार रात फिर से अपने पुराने भवन में वापस लौट आए। लोग कड़ाके की ठंड मे अपने घरों की छत पर आग जलाकर बैठ गए।
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पीड़ित दिगंबर सिंह बिष्ट का कहना है हमें जानकारी मिली है कि सरकार होटल मालिकों को 3250 रुपये स्क्वायर फीट के हिसाब से मुहावजा दे रही है और हमें 2750 रुपये स्क्वायर फीट के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। उन्होंने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। कहा कि प्रशासन ने हमें लिखित में भी कुछ नहीं दिया है।
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हमारे भवनों पर अभी तक रेड क्रॉस के निशान तक नहीं लगाए गए हैं। प्रशासन से हमारी यही मांग है कि हमें इसका स्थायी समाधान चाहिए।
होटलों को डिस्मेंटल करने में लगेंगे अभी 15 दिन
माउंट व्यू और मलारी इन होटल को डिस्मेंटल करने का काम रविवार को चौथे दिन भी जारी रहा। डिस्मेंटल में लगी 80 मजदूरों की टीम ने अब होटल की दीवारों को तोड़ना शुरु कर दिया है। सीबीआरआई के चीफ डा. डीपी कानूनगो ने बताया कि भवन को डिस्मेंटर करने में अभी करीब 15 दिन और लगेंगे।
डिस्मेंटल के काम में लगी टीम के साथ ही निचले हिस्से के मकानों को भी सुरक्षित रखने की चुनौति है। हमारी पांंच लोगों की टीम के साथ लोनिवि और एसडीआरएफ के 80-80 लोगों की टीम भी हमारे साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सीबीआरआई की टीम मकानों में क्रैकोमीटर लगाने का काम भी कर रही है। इससे मकानों में कितनी दरार पड़ी है और किस भवन को कितना नुकसान हुआ है, उसका आंकलन भी किया जा रहा है।