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भारत-नेपाल सीमा: विवादित प्यारेताल झील पर नेपाली नागरिकों ने फिर शुरू किया नौकायन, पांच साल पहले एक को मार दी थी गोली

Sat, 19 Mar 2022 04:16 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, चंपावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चंपावत Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 19 Mar 2022 04:16 PM IST
सार

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगी प्यारेताल झील को लेकर करीब 21 साल से विवाद चल रहा है। पांच वर्ष पूर्व कंचनपुर के एक व्यक्ति की विवाद के दौरान गोली लगने से मौत भी हो गई थी। नेपाल ने इसका जिम्मेदार भारत के सुरक्षा बलों को ठहराया था।

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Indo-Nepal border: Nepalese citizens started sailing on the disputed Pyaretal lake in Uttarakhand  Champawat
प्यारेताल झील - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-नेपाल सीमा से लगे कंचनपुर (महेंद्रनगर) जिले के विवादित प्यारेताल प्राकृतिक झील पर नेपाली नागरिकों ने लंबे अंतराल बाद फिर से नौकायन शुरू कर दिया है। नाव पर नेपाल का झंडा भी लगाया है। उसके इस कदम से फिर से विवाद भड़कने का अंदेशा पैदा हो गया है। 

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उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगी प्यारेताल झील बनबसा से करीब 40 किमी दूर कंचनपुर जिले के नजदीक है। सीमा से लगी इस झील को लेकर करीब 21 साल से विवाद चल रहा है। इस प्राकृतिक झील पर भारत अपना हक जताता है तो नेपाल इसे अपने अधिकार क्षेत्र में मानता है। दोनों देशों के बीच कई बार इसे लेकर विवाद पैदा हो चुका है।
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पांच वर्ष पूर्व कंचनपुर के एक व्यक्ति की विवाद के दौरान गोली लगने से मौत भी हो गई थी। नेपाल ने इसका जिम्मेदार भारत के सुरक्षा बलों को ठहराया था। इसके बाद से यहां नौकायन भी बंद हो गया था लेकिन 11 मार्च को नगरपालिका वार्ड नंबर पांच के नेता राम रोकाया, ज्ञान सिंह हमाल के अलावा लक्ष्मण भूसाल, बबलू बिसनेत ने प्यारेताल प्राकृतिक झील पर लकड़ी की नाव बनाकर फिर से नौकायन शुरू कर दिया है।
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यूथ एसोसिएशन ऑफ नेपाल रिहेबिलिटेशन के अध्यक्ष राम रोकाया ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने और घरेलू और विदेशी पर्यटकों को लुभाने के लिए इस झील में नाव चलाई जा रही है। महेंद्रनगर निवासी मेजर (सेवानिवृत्त) एपीएफ भवानीनाथ का कहना है कि करीब दो दशक से झील के अधिकार क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद होता रहा है।


उन्होंने संवाद के जरिए इस विवाद को खत्म करने का सुझाव दिया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद के समाधान के लिए सर्वे ऑफ इंडिया और सर्वे ऑफ नेपाल की मदद ली जानी चाहिए। इधर, भारतीय अधिकारियों और सुरक्षा बल ने इस पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया है। 

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