उलझन में रेलवे चालक, हाथी को बचाएं या हजारों यात्रियों को?
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हाथियों के रेलवे ट्रैक पर आने की स्थिति में तुरंत क्या निर्णय लेना है, इसे लेकर रेलवे के लोको पायलट उलझन में हैं।
ट्रेन से हाथियों के घायल या मौत हो जाने पर वन विभाग द्वारा लोको पायलट (चालक) और सह लोको पायलट (परिचालक) के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से यह उलझन बढ़ी है। लोको पायलटों का कहना है कि हाथी अचानक ट्रैक पर आ जाए तो तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाने से ट्रेन में सवार यात्रियों की जान पर बन सकती है।
लोको और सहायक लोको पायलटों के समर्थन में रेलवे की कर्मचारी यूनियनें भी उतर गई हैं। कर्मचारी यूनियनों ने वन विभाग के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान किया है। जरूरत पड़ने पर ट्रेनों का संचालन बंद रखने के भी चेतावनी दी है।
वन क्षेत्र के बीचोबीच आने वाले दून-हरिद्वार रेलवे ट्रैक पर हाथियों के ट्रेन की चपेट में आने की बड़ी समस्या रही है। जिस ट्रेन की चपेट में आने से हाथी की मौत होती है, वन विभाग उस ट्रेन के पायलट और सहायक पायलट के खिलाफ वन्य जीव अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा देता है।
15 अक्तूबर को रायवाला के समीप ट्रेन की टक्कर से हाथी की मौत के बाद इस पर फिर से बहस छिड़ गई है। लोको पायलटों का कहना है कि जंगल से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर कई जगह घुमाव हैं। इस कारण दूर से हाथी नजर नहीं आता है। हाथी के अचानक ट्रैक पर आ जाने से तत्काल ब्रेक लगाना रेलवे सेफ्टी नियमों के अनुरूप नहीं है। इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन लगभग 50 मीटर की दूरी पर रुकती है।
30 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने पर भी यह समस्या रहती है। उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष दीपक बौड़ाई कहते हैं कि तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगने से ट्रेन डीरेल होने और कोचों के डैमेज होने की आशंका रहती है। ऐेसे में ट्रेन में सवार यात्रियों खासकर टायलेट आदि में गए यात्रियों की जान पर बन सकती है। बौड़ाई का कहना है कि कोच में टायलेट वाला हिस्सा कमजोर रहता है।
निहत्थे संविदाकर्मियों के हवाले पेट्रोलिंग
हरिद्वार-देहरादून के बीच कई जगह रेलवे ट्रैक वन क्षेत्र से गुजरता है। हाथियों को रेलवे ट्रैक पर जाने से रोकने के लिए वन विभाग की पेट्रोलिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। अमर उजाला के रायवाला संवाददाता ने इस बारे में मोतीचूर वन रेंज अधिकारी महेंद्र गिरी गोस्वामी से बात की। गोस्वामी ने बताया कि रायवाला से कांसरो मिलान तक चार किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर राजाजी पार्क के दो संविदा कर्मी और वन्य जीव प्रेमी एनजीओ के दो कर्मी संयुक्त गश्त करते हैं।
इसके अलावा रायवाला से हरिद्वार की और मोतीचूर फाटक तक पार्क के दो संविदा कर्मी रहते हैं। इस गश्ती दल के किसी भी सदस्य को बंदूक या दूसरा कोई हथियार साथ ले जाने की अनुमति नहीं है। बहुत कम मौकों पर पार्क के नियमित स्टाफ के गश्ती दल में रहने के दौरान ही बंदूक ले जाई जाती है। हालांकि सूचनाओं का आदान प्रदान करने के लिये टीम के पास वायरलेस सेट रहता है।
रेलकर्मियों की हो चुकी है मौत
ट्रैक की पेट्रोलिंग ड्यूटी कर रहे रेलवे के एक कर्मचारी को कुछ साल पहले कांसरो में हाथी ने पटक पटक कर जान से मार दिया था। इससे पूर्व भी रेलकर्मी कई बार हाथी का शिकार हो चुके हैं। रेलवे की यूनियनों का कहना है कि वन विभाग की समुचित पैट्रोलिंग न होने की वजह से यह स्थिति बनती है।
रेलकर्मी को हो चुकी है सजा
दून हरिद्वार ट्रैक पर वन क्षेत्र में हाथी की मौत के मामले में करीब सात साल पहले एक लोको पायलट को अदालत से सजा हो चुकी है। रेलकर्मियों का कहना है कि वन विभाग अपनी गलती छुपाने के लिए गलत तरीके से लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों पर मुकदमा दर्ज करते हैं।
15 अक्तूबर वाले केस में यह भी स्पष्ट नहीं है कि हाथी की मौत ट्रेन से हुई। वैसे भी रेलवे ट्रैक पर अगर हाथी आ रहा है तो यह वन विभाग या पार्क प्रशासन की लापरवाही है। इसके बावजूद रेलकर्मियों पर कोई कार्रवाई हुई तो यूनियन ट्रेनों का संचालन रोकने तक को मजबूर होगी।
- दीपक बौड़ाई, मंडल उपाध्यक्ष उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन
‘हाथी के अचानक ट्रैक के बीच आने और उससे ट्रेन की दूरी कम होने पर तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाना खतरनाक है। इससे कोच एक-दूसरे के ऊपर आ सकते हैं और यात्रियों के जीवन को खतरा हो सकता है। हमारे लोको पायलट परेशान हैं, कि आखिरकार उन्हें करना क्या है? उनके लिए एक तरफ कुंआ दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति बनी हुई है। वन विभाग ने अगर उन पर कार्रवाई की तो, उग्र आंदोलन किया जाएगा।’
- राजेंद्र गुसाई, शाखा सचिव, नार्दर्न रेलवे मैंस यूनियन