कोरोना वायरस: चीन से नेपाल लौटे छात्र में मिले लक्षण, स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट
- कोरोना संक्रमित होने की आशंका से सीमा पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें अलर्ट
- नैनीताल के डॉक्टरों की विशेष टीम भेजने के आदेश, फिलहाल नहीं पहुंची टीम
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ की सीमा से सटे नेपाल के कैलाली जिले के मुख्यालय धनगढ़ी में संदिग्ध मरीज में कोरोना वायरस के लक्षण मिलने की खबर से स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। बनबसा के चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सीमा पर तैनात मेडिकल टीमों को हाई अलर्ट कर दिया है। नेपाल से आने वाले हर व्यक्ति की गहनता से जांच के निर्देश दिए गए हैं। एंबुलेंस में आने वाले मरीजों की विशेष रूप से जांच करने को कहा गया है।
बृहस्पतिवार को बनबसा से करीब 75 किलोमीटर दूर नेपाल के कैलाली जिला मुख्यालय धनगढ़ी में एक संदिग्ध मरीज को वहां के प्रादेशिक सेती अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष देखरेख में रखे जाने की खबर ने सीमा के इस पार स्वास्थ्य विभाग की टेंशन बढ़ा दी है।
बनबसा के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद उमर ने बताया कि रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजकर सीमा पर अतिरिक्त सुरक्षात्मक कदम उठाए जाने की जरूरत बताई गई है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी ने बताया कि डीजी हेल्थ की ओर से नैनीताल जिले से आठ डॉक्टरों की विशेष टीम की टनकपुर और बनबसा के अस्पताल में तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन डॉक्टरों की टीम अभी नहीं पहुंची है।
संदिग्ध मरीज हाल ही में चीन से लौटा है नेपाल
सीमा पार नेपाल के सूत्रों के मुताबिक कैलाली जिले के धनगढ़ी में हाल ही में चीन से लौटे एक छात्र में कोरोना वायरस से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं। उसे धनगढ़ी के प्रादेशिक सेती अस्पताल में विशेष निगरानी में रखा गया है। बताया गया कि डॉक्टरों ने जांच के लिए मरीज का सैंपल लिया है जिसे शुक्रवार को परीक्षण के लिए काठमांडू लैब में भेजा जाएगा।
बनबसा के रास्ते सितारगंज जाना चाहता था चीनी नागरिक
तीन दिन पहले नेपाल से भारत आने की कोशिश करने वाले चीनी नागरिक सुन यून कैन को 11 फरवरी को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वापस नेपाल लौटा दिया गया था। उसने सितारगंज स्थित सिडकुल में एक कंपनी योयोगो में इंजीनियर होना बताया था।
बनबसा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. मो. उमर ने बताया कि सितारगंज स्थित योयोगो कंपनी में काम करने वालों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर दिया गया है। किसी भी कर्मी में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए हैं।
पता चला है कि सितारगंज स्थित योयोगो कंपनी में कार्य करने वाले चीनी नागरिक ने दिल्ली से प्रवेश नहीं मिलने पर भारत-नेपाल की खुली सीमा का लाभ उठाकर इस रास्ते से भारत में प्रवेश की योजना बनाई। पर वह सफल नहीं हो पाया और उसे 11 फरवरी को बनबसा सीमा से भारत सरकार के निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियों ने वापस नेपाल लौटा दिया।
चीन सीमा के पास मेडिकल टीम गठित, एंबुलेंस तैनात
चीन सीमा से लगे चमोली जिले में कोरोना वायरस को लेकर विशेष एहतियात बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीमावर्ती ब्लाक जोशीमठ में एक मेडिकल टीम का गठन किया गया है। टीम के साथ एक एंबुलेंस भी 24 घंटे तैनात की गई है। जिला चिकित्सालय के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है। डीएम स्वाति एस भदौरिया और मुख्य चिकित्साधिकारी डा. केके सिंह ने जिले के होटलों में चीन से पहुंचने वाले पर्यटक व तीर्थयात्री की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को देने के निर्देश जिला पर्यटन अधिकारी को दिए।
चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. केके सिंह ने बताया कि जिले में चीन से लगी सीमा के गांव लौंग, फाक्ती, पंगरासू, गाड़ी ब्रिज, सुरांई थोटा, तोलमा, सूकी, भलगांव, लाता, रैंणी, पैंग, सुभांई, भविष्य बदरी, तपोवन, पांडुकेश्वर, बैनाकुली और हनुमान चट्टी आदि क्षेत्र में भोटिया जनजाति के गांवों में कोरोना वायरस के प्रति जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण एक विषाणु जनित रोग है। यह वायरस संक्रमण प्रभावित व्यक्ति के खांसने, छींकने और संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क से फैलता है। हालांकि जिले में अभी तक किसी भी व्यक्ति में कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं।
चीन से जिले में पहुंचे दो व्यक्ति अस्पताल में भर्ती
चमोली जिले के घाट ब्लाक निवासी एक व्यक्ति बीते 31 दिसंबर को चीन से अपने गांव पहुंचा था। स्वास्थ्य विभाग को पांच फरवरी को इसकी जानकारी मिली तब से उनका सीएचसी में नियमित चेकअप किया जा रहा है। वहीं एक अन्य व्यक्ति भी चीन से 31 दिसंबर को गांव पहुंचा था और तबियत खराब होने के कारण एम्स ऋषिकेश में भर्ती है। हालांकि दोनों में कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं मिले हैं।
संचार सेवा ठप, नहीं हो पाई वीडियो कांफ्रेंसिंग
कोरोना वायरस को लेकर जिले में स्थिति से सीएमओ डा. केके सिंह को स्वास्थ्य विभाग की डीजी डा. प्रीती बहुगुणा को वीडियो कांफ्रेंस से अवगत कराना था। जिले में संचार सेवा ठप होने से वे अपराह्न ग्यारह बजे से दोपहर बारह बजे तक वीसी कक्ष में बैठे रहे लेकिन संचार सेवा सुचारु न होने के कारण उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
प्रत्येक जिला अस्पताल में हो वेंटिलेटर आईसीयू की व्यवस्था
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जिलों के सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) को वेंटिलेटर व आईसीयू की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में चीन और नेपाल से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग के लिए निगरानी व सतर्कता बढ़ाई जाए।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने बृहस्पतिवार को गढ़वाल, कुमाऊं मंडल के निदेशक और सभी जनपदों के सीमएओ के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोरोना से बचाव व उपचार से संबंधित तैयारियों पर फीड बैक लिया। डीजी ने कहा कि प्रदेश में किसी भी रोगी में कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
15 जनवरी, 2020 के बाद चीन के वुहान व हुबई से आने वाले यात्रियों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाने पर सैंपल जांच के लिए भेजा जाए। जिन जिलों के सरकारी अस्पतालों में आईसीयू व वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है।
वहां पर मेडिकल कालेज व प्राइवेट हास्पिटल से समन्वय बना कर व्यवस्था की जाए। स्वास्थ्य महानिदेशक ने चंपावत, पिथौरागढ़, नैनीताल, हरिद्वार व देहरादून जनपदों में सीमावर्ती क्षेत्र व एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ाई जाए। वीडियो कांफ्रेंसिंग में निदेशक डॉ. एसके गुप्ता, निदेशक गढ़वाल डॉ. एसपीएस नेगी, सीएमओ देहरादून डॉ. मीनाक्षी जोशी, एनएचएम निदेशक डॉ. अंजलि नौटियाल, नोडल अधिकारी पंकज सिंह, संयुक्त निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. वीसी रमोला आदि मौजूद थे।