कोरोना वायरस: चीनी नागरिक को भारत में नहीं करने दिया प्रवेश, जांच के बाद वापस लौटाया
- चीन से नेपाल के रास्ते आ रहा था भारत, परीक्षण में नहीं मिले कोरोना के लक्षण
- इमिग्रेशन चेकपोस्ट के भारतीय अफसरों से भी स्वास्थ्य परीक्षण को कहा
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देशभर में कोरोना वायरस को लेकर फैले खौफ के बीच भारत-नेपाल सीमा पर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम सतर्क है। मंगलवार रात को नेपाल से भारत आ रहे एक चीनी नागरिक को सुरक्षा के तहत इमिग्रेशन चेकपोस्ट से नेपाल वापस लौटा दिया गया।
कोरोना वायरस के चलते वहां चीनी नागरिक के स्वास्थ का परीक्षण भी किया गया। इस दौरान वहां मौजूद भारतीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी सतर्क रहने व स्वास्थ परीक्षण करने को कहा गया है।
बता दें कि मंगलवार को एक चीनी नागरिक नेपाल से भारत की ओर आ रहा था। उसे इमिग्रेशन चेक पोस्ट बनबसा में रोक कर डाक्टरों के दल ने कोराना वायरस के तहत उसके स्वास्थ का परीक्षण किया। हालांकि उसमें कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते उसे नेपाल वापस लौटा दिया गया।
एसीएमओ डॉ. एचएस ह्यांकी ने बताया कि सीधे चीन से आ रहे चीनी नागरिक को भारत नहीं आने देने के निर्देशों के तहत उसे वापस लौटाया गया है। बताया गया कि चीनी नागरिक सुन यून कैन लिली सिटी सन्डाउन के एक शहर का रहने वाला है, जो 6 जनवरी को दिल्ली से चीन गया था और वहां से 9 फरवरी को नेपाल के काठमांडू आया था।
वह मंगलवार 11 फरवरी को नेपाल से बनबसा के रास्ते भारत प्रवेश करना चाह रहा था। लेकिन स्वास्थ विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उसे बनबसा इमिग्रेशन चेकपोस्ट पर रोक वापस नेपाल जाने को कहा गया।
उसके पास पासपोर्ट एवं वीजा सही पाए गए हैं। इस मौके पर डा. संजय, एचवी गणेश चंद, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एचएस ह्यांकी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी बनबसा डा. मोहम्मद उमर तथा फार्मेसिस्ट प्रकाश भट्ट, धर्मवीर सिंह के अलावा एसएसबी के जवान और इमीग्रेशन चेक पोस्ट के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे।
एसीएमओ ने डॉ. एचएस ह्यांकी ने उक्त चीनी नागरिक के इमिग्रेशन चेकपोस्ट में जांच के दौरान मौजूद रहने वाले भारतीय अधिकारियों एवं कर्मियों को 14 दिन तक स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में रहने की हिदायत दी है। उन्हें किसी भी अप्पर रेस्पिरेट्री ट्रैक इंफेक्शन के लक्षण होने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग की टीम को सूचित करने को कहा है।