चारधाम यात्रा 2019: दशहरे पर घोषित हुआ चारों धाम के कपाट बंद होने का दिन और समय
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देश के प्रमुख चार धामों में शामिल बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवंबर को शाम 5:13 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। मंगलवार को विजयदशमी पर्व पर बदरीनाथ धाम के परिक्रमा मंडप में पंचांग गणना के बाद आचार्य ब्राह्मणों की उपस्थिति में बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित की।
रुद्रप्रयाग जिले में भगवान केदारनाथ के कपाट परंपरानुसार भैयादूज पर 29 अक्तूबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में आचार्यगणों व वेदपाठियों द्वारा पूजा-अर्चना एवं पचांग गणना के आधार पर भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने का समय तय कर घोषणा की गई।
द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट 21 नवंबर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को बंद होंगे। इसी तरह उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के कपाट दीपावली के अगले दिन 28 अक्तूबर को अन्नकूट पर्व पर पूर्वाह्न 11:40 बजे और यमुनोत्री धाम के कपाट 29 अक्तूबर को भैया दूज के दिन बंद किए जाएंगे। समय अभी तय नहीं किया गया है।
अगले साल की यात्रा के लिए भंडार की जिम्मेदारी सौंपी
अगले साल 2020 में छह माह तक बदरीनाथ के भंडार का जिम्मा भागवत मेहता, जगमोहन सिंह भंडारी, किशोर पंवार और राजदीप सनवाल को सौंपा गया। बीकेटीसी के अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल और सीईओ बीडी सिंह ने चारों भंडारियों के सिर पर पगड़ी बांधकर अगले साल की तीर्थयात्रा में बदरीनाथ के भंडार का जिम्मा सौंपा। ब्यूरो
बदरीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व ये प्रक्रियाएं होंगी संपन्न
13 नवंबर- गणेश व महाभिषेक पूजा के बाद शाम सात बजे गणेश मंदिर के कपाट बंद होंगे।
14 नवंबर- मध्याह्न में आदि केदारेश्वर मंदिर के कपाट होंगे बंद।
15 नवंबर- धाम में वेद ऋचाएं बंद, गुप्त मंत्रों का जाप।
16 नवंबर- लक्ष्मी मंदिर में पूजा व कढ़ाई भोग का आयोजन।
17 नवंबर-माता लक्ष्मी का बदरीनाथ गर्भगृह में प्रवेश और शाम 5 बजकर 13 मिनट पर बदरीनाथ के कपाट बंद।
भगवान केदारनाथ की डोली का कार्यक्रम
29 अक्तूबर-प्रात:8.30 बजे केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होंगे। इसी दिन बाबा केदार की पंचमुखी भोगमूर्ति चल विग्रह उत्सव डोली में पहले पड़ाव रामपुर पहुंचेगी।
30 अक्तूबर-डोली रामपुर से प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए काशी-विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में प्रवास करेगी।
31 अक्तूबर-डोली गुप्तकाशी से प्रस्थान कर पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पहुंचेगी, जहां छह माह तक भगवान की पूजा-अर्चना और दर्शन होंगे।
द्वितीय केदार मद्महेश्वर का डोली कार्यक्रम
21 नवंबर-सुबह 8.30 बजे वृश्चिक लग्न में द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसी दिन आराध्य की चल विग्रह डोली रात्रि प्रवास के लिए पहले पड़ाव गौंडार गांव पहुंचेगी।
22 नवंबर-गौंडार से प्रस्थान कर द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर रांसी गांव में प्रवास करेंगे। 23 को रांसी से प्रस्थान कर गिरिया गांव में रात्रि प्रवास होगा।
24 नवंबर-द्वितीय केदार शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में विरारजमान होंगे, जहां आराध्य की छह माह की पूजा होगी।
तृतीय केदार तुंगनाथ का डोली कार्यक्रम
6 नवंबर-पूर्वाह्न 11.30 बजे तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसी दिन आराध्य की चल विग्रह उत्सव डोली रात्रि प्रवास के लिए पहले पड़ाव चोपता पहुंचेगी।
7 नवंबर-भगवान तुंगनाथ चोपता से प्रस्थान कर हुए रात्रि प्रवास के लिए भुनकुन गुफा पहुंचेंगे।
8 नवंबर-तृतीय केदार शीतकाल की छह माह पूजा के लिए शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ में विराजमान होंगे।