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उत्तराखंड: केदारनाथ में तीर्थपुरोहितों के आंदोलन को हुए दो माह, आने वाले दिनों में तेज होगा आंदोलन
Thu, 12 Aug 2021 06:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 12 Aug 2021 06:00 PM IST
सार
बता दें कि देवस्थानम बोर्ड भंग करने के लिए केदारनाथ के तीर्थपुरोहित संतोष त्रिवेदी ने खून से लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है।
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तीर्थ पुरोहितों ने पीएम मोदी को खून से लिखा था पत्र
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थपुरोहितों के आंदोलन को दो माह हो गए हैं। बीते 12 जून से तीर्थपुरोहित बोर्ड के विरोध में धरना दे रहे हैं। लेकिन अभी तक सरकार ने उनकी सुध नहीं ली है।
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गुरुवार को केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में तीर्थपुरोहितों ने मंदिर परिसर में एकत्रित होकर देवस्थानम बोर्ड के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इसके बाद सभी तीर्थपुरोहितों ने मंदिर परिसर पर बैठक धरना दिया। कहना था कि जब तक मांगपूर्ति नहीं होती, वे आंदोलनरत रहेंगे और आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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आचार्य संतोष त्रिवेदी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने देवस्थानम बोर्ड का गठन कर अपनी हठधर्मिता का परिचय दिया है, जिसका खामियाजा उसे भुगतना होगा। उन्होंने बताया कि भाजपा से जुड़े सभी तीर्थपुरोहित चरणबद्ध तरीके से पार्टी की सदस्या व पदों से इस्तीफा दे रहे हैं।
कहा कि सरकार चारधाम में यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के बजाय वहां की परंपराओं को बदलने का प्रयास कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि 1 सितंबर को केदारघाटी के प्रत्येक गांव के तीर्थपुरोहित व उनके परिवारों के सदस्य देवस्थानम बोर्ड के विरोध में रुद्रप्रयाग में प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद केदारघाटी के बाजारों व कस्बों में क्रमिक अनशन, चक्काजाम और भूख हड़ताल को लेकर रूपरेखा तैयार की जाएगी।
पीएम को भेजा खून से लिखा पत्र
देवस्थानम बोर्ड भंग करने के लिए केदारनाथ के तीर्थपुरोहित संतोष त्रिवेदी ने खून से लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में तीर्थपुरोहितों की रक्षा के लिए यथाशीघ्र देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की है। उन्होेंने लिखा है कि सनातन धर्म की पौराणिक परंपराओं के साथ छेड़छाड़ किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।