उत्तराखंड बोर्ड दसवीं और बारहवीं के नतीजे जारी हो गए हैं। ऐसे में जिनके नंबर कम आएं उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। इस बार उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा में हाईस्कूल में 1 लाख 46 हजार और इंटरमीडिएट में 1 लाख 30 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी है। नतीजों के संबंध में मनोचिकित्सक डॉ. नताशा वाही का कहना है कि नंबर हाईस्कूल के हों या इंटरमीडिएट के, जिंदगी में अहम होते हैं। लेकिन, यह भी ध्यान रखें कि नंबरों का महत्व तभी तक है, जब तक आप हैं। आपके इर्द-गिर्द ही परीक्षा और परिणाम का ताना-बाना बुना जाना है।
UK Board Result 2018: अगर मार्क्स कम आएं तो निराश न हों, इन 07 बातों पर ध्यान दें...
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परीक्षा और रिजल्ट के दिन जिंदगी की एक्सरसाइज में वॉर्मअप सेशन की तरह हैं। जैसे कार्डियो वैस्कुलर एक्सरसाइज से पहले वॉर्मअप किया जाता है, वैसे ही जिंदगी के मैदान में उतरने से पहले परीक्षा और नतीजे वॉर्मअप सेशन हैं। आपके व्यावहारिक जीवन में नंबर महत्वपूर्ण नहीं हैं, जिसकी शुरुआत आने वाले समय में होनी है। इसलिए इन दिनों को किसी बोझ नहीं, बल्कि बोनांजा की तरह जीना सीखिए।
परीक्षाएं गोल्डन पीरियड हैं। इस समय को खोना नहीं चाहिए। सिर्फ सीखते जाने की जरूरत है। नंबर अच्छे न आएं तो और भी अच्छा। इससे और अधिक सीखने की ललक पैदा करनी चाहिए न कि हताश या उदास हो जाएं। यही ललक आगे ले जाती है। जिंदगी अंकों और परीक्षाओं से नहीं, सीखने से आगे बढ़ती है। खुद को एक सामान्य छात्र कहने वाले प्रो. वर्मा सीखने को ही जीवन का आनंद मानते हैं।
- बच्चों को किसी न किसी एक्टिविटी में व्यस्त रखें।
- बच्चों के साथ अच्छे अनुभव बांटें।
- अच्छा रिजल्ट आने को लेकर उन्हें कोई प्रलोभन न दें।
- अपने बच्चों की दूसरों से तुलना न करें
- तीन दिन तक बच्चों को डांटें नहीं, उनके साथ रहें
- बच्चों को विश्वास में लें और उनसे बातचीत करें
- बच्चों के साथ मूवी देखें, बाहर खाना खाएं और समय बिताएं
- बच्चों को प्रोत्साहित व समर्थन करें न कि घर को जंग का मैदान बनाएं
- परिजन बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी बनने से बचें