फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Budget 2021 in Uttarakhand News: Congress Questions and Attack Bjp Government for Budget

Uttarakhand Budget 2021: सीएम त्रिवेंद्र के बजट को कांग्रेस ने बताया झूठ का पिटारा, उठाए कई सवाल 

Thu, 04 Mar 2021 11:54 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 04 Mar 2021 11:54 PM IST
विज्ञापन
Budget 2021 in Uttarakhand News: Congress Questions and Attack Bjp Government for Budget
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

चुनावी वर्ष में पेश किए गए बजट को कांग्रेस ने झूठ का पिटारा करार दिया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि सरकार ने जो बजट पेश किया है। उसमें महंगाई और बेरोजगारी का कोई जिक्र नहीं है। बजट में न तो जनहित के मुद्दे और न ही कर्मचारियों के मुद्दे हैं। बढ़ती महंगाई से आम लोग परेशान है।

विज्ञापन


उपनल कर्मचारी, भोजन माताएं नियमितीकरण, वेतन के लिए आंदोलनरत है। सरकार अपने ही एजेंडे पर काम रही है। आम लोगों के हितों की सरकार कोई फिक्र  नहीं है। सरकारी संस्थाओं व उद्योगों से कर्मचारियों को कोविड महामारी के दौरान नौकरी से हटाया गया। रोडवेज व तदर्थ कर्मचारियों को कई माह से वेतन नहीं मिला है। 
विज्ञापन


ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिए क्या किया जो अब गैरसैंण मंडल के लिए करेंगे
कांग्रेस ने पूछा है कि त्रिवेंद्र सरकार को यह बताना चाहिए कि ग्रीष्मकालीन राजधानी में ऐसा क्या किया गया जो अब नए मंडल में किया जाएगा। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि बजट में रोजगार को लेकर सरकार ने स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं रखी है। महंगाई पर सरकार ने चुप्पी साध ली है और यह नहीं बताया है कि महंगाई से कराह रहे लोगों को किस तरह से राहत दी जाएगी। गैरसैंण को मंडल घोषित कर दिया गया, लेकिन सरकार यह नहीं बता रही है कि ग्रीषमकालीन राजधानी के विकास का क्या रोडमैप है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भी बजट को हवा हवाई बताया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रदेश सरकार का यह बजट पूरी तरह से निराश करने वाला है। सरकार का यह अंतिम बजट था। आर्थिक विकास को इससे बूस्टर डोज मिलनी चाहिए थी। आर्थिक संकट के कारण जो लोग कर्ज लेने पर मजबूर हुए, उन्हें सरकार राहत देती। युवा वर्ग की अनदेखी की गई है। पर्यावरणीय सरोकार दरकिनार किए गए। साफ है कि मुख्यमंत्री ने यह अंतिम अवसर भी गंवा दिया।

कोरोना काल में राज्य की ध्वस्त आर्थिक व्यवस्था को इस समय बूस्टर देने की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने इस बजट में किसानों, व्यवसायियों, पर्यटन, उद्योग और सरकारी कर्मचारियों की बजट में उपेक्षा की गई है। बजट में वित्तीय प्रबंधन का अभाव है। सरकार कर्ज के ब्याज की अदायगी कैसे करेगी। विकास की बात तो दूर की कौड़ी है। युवा वर्ग की भी उपेक्षा की गई है। बजट में राहत व समाधान दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही है। 
-किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस। 

सरकार किसानों को दोगुनी आय के सपने दिखा रही है। आय कैसे बढ़ेगी बजट में इसका कोई पता नहीं है। किसान, बेरोजगार और आम आदमी के लिए बजट में कुछ नहीं है। पुरानी योजनाओं का जिक्र कर बजट में आंकड़ों की बाजीगरी की गई है। प्रदेश की जनता महंगाई की मार झेल रही है। बजट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
-प्रीतम सिंह, विधायक व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

बजट में सिर्फ जुमलेबाजी की गई है। बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार, महंगाई, कर्मचारी जैसे मुद्दों को बजट में कोई उल्लेखन नहीं किया गया। सरकार के बजट में कहीं राज्य का विकास नजर नहीं आ रहा है। 
- करन माहरा, उप नेता प्रतिपक्ष

गैरसैंण को नया मंडल बनाने पर आंदोलनकारियों ने किए सवाल

गैरसैंण को नया मंडल घोषित किए जाने संबंधी राज्य सरकार के फैसले को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने जहां खुशी जताई है, वहीं सरकार व आला अधिकारियों की मंशा पर सवाल भी खड़े किए हैं। 

राज्य आंदोलनकारियों का मानना है कि कहीं नवसृजित गैरसैंण मंडल का भी वही हाल न हो जो कुमाऊं और गढ़वाल मंडल का हुआ है। राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि गैरसैंण को मंडल घोषित किया जाना बड़ा मुद्दा नहीं है। मुद्दा यह है कि मंडल मुख्यालय पर मंडलायुक्त समेत तमाम आला अधिकारी बैठें और पहाड़ के लोगों की समस्याओं का समाधान करें। अमर उजाला ने जब राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर कुछ राज्य आंदोलनकारियों से उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो आंदोलनकारियों ने कुछ इस अंदाज में प्रतिक्रियाएं दीं।

गैरसैंण को मंडल घोषित किया जाना सरकार का सही फैसला है। लेकिन, सरकार का यह फैसला तब सही माना जाएगा जब मंडलायुक्त समेत मंडल स्तर के तमाम अधिकारी मुख्यालय पर बैठें और पहाड़ के लोगों की समस्याओं का समाधान करें। राज्य आंदोलन के साथ ही मांग उठाई गई थी कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया जाए। लेकिन, फिलहाल गैरसैंण को स्थायी राजधानी का दर्जा नहीं मिल पाया है। सरकार को गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के साथी गैरसैंण मंडल मुख्यालय पर भी अधिकारियों को उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
- सुशीला बलूनी, राज्य आंदोलनकारी

कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के अलावा राज्य में एक और मंडल का गठन किए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। सरकार ने गैरसैंण को मंडल घोषित करने का फैसला तो ले लिया है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कहीं नवसृजित मंडल का हाल नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जैसे मंडल मुख्यालयों जैसा न हो। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि मंडल सृजित करने के साथ ही तमाम आला अधिकारी मंडल मुख्यालयों पर बैठें और आमजन की समस्याओं का समाधान करें। 
- प्रदीप कुकरेती, राज्य आंदोलनकारी

राज्य में कुमाऊं और गढ़वाल मंडल पहले से ही वजूद में हैं। नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल मंडल मुख्यालय बनाए गए हैं। लेकिन, इन दोनों मंडलों के मंडल आयुक्त समेत तमाम अधिकारी मुख्यालयों के बजाय देहरादून और हल्द्वानी में डेरा जमाए रहते हैं। ऐसे में मंडलायुक्त के स्तर से समस्याओं के निराकरण में आमजन को तमाम समस्याएं आती हैं। जब पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल जैसी जगहों पर अधिकारी उपलब्ध नहीं रहते तो भला इन दोनों शहरों से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित गैरसैंण में अधिकारी कहां रुकेंगे। सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि मंडलायुक्त समेत तमाम अधिकारी मंडल मुख्यालयों में बैठें और आमजन की समस्याओं का समाधान करें। 
 - रवींद्र जुगरान , राज्य आंदोलनकारी

बजट पर विस अध्यक्ष, मंत्रियों ने कही ये बात

पिछले साल सरकार बजट पेश करते समय गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की थी। इस बार मुख्यमंत्री ने गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने की घोषणा की है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है।
- प्रेमचंद अग्रवाल, अध्यक्ष विधानसभा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के समग्र विकास को गति देने वाला बजट पेश किया है। जिसमें महिलाओं, युवाओं के साथ ही खेती किसानी, अवस्थापना विकास के लिए बजट का प्रावधान किया है। इसके साथ ही गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने की फिर से ऐतिहासिक घोषणा की है।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्य मंत्री

सरकार का बजट बहुत ही अच्छा है। जिसमें विकास को अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय की सोच थी कि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसे सरकार ने आगामी बजट में साकार किया है। पर्यटन के साथ ही किसानों को सिंचाई सुविधा देने पर बजट में विशेष प्रावधान किया गया। -सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री 

सरकार की राज्य के विकास के प्रति जो सोच है। उसकी झलक बजट में दिखाई दे रही है। नई योजनाओं के लिए बजट का प्रावधान करने के साथ ही विकास की रफ्तार बढ़ेगी। शिक्षा के क्षेत्र के बजट में खास प्राथमिकता दी गई है।
- अरविंद पांडे, शिक्षा मंत्री

बजट में खेती किसानी से लेकर हर क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने किसानों की दोगुनी आय करने का संकल्प लिया है। इस पूरा करने के लिए सरकार ने जैविक खेती के साथ ही अन्य योजनाओं के लिए बजट की व्यवस्था की है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा।
- सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री

सरकार ने ऐतिहासिक बजट पेश किया है। उत्तराखंड के हर क्षेत्र के विकास को बजट में प्राथमिकता दी गई है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी को एक साल पूरा होने के दिन सरकार ने गैरसैंण के लिए कमिश्नरी की घोषणा की है। इससे यह साबित होता है कि सरकार पहाड़ के विकास के लिए कितनी गंभीर है।
- डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री 

सरकार ने संतुलित बजट पेश किया है। हर वर्ग का ख्याल रख कर उनका दिल छूने का प्रयास किया है। सरकार की सोच प्रदेश का समग्र विकास की है। जो बजट में साफ नजर आ रही है।
- खजान दास, विधायक 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed