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बिंद्रा का पीछा नहीं छोड़ रही ये 'काली छाया'
रविंद्र थलवाल
Updated Fri, 28 Jun 2013 02:06 PM IST
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कभी बिंद्रा के आंगन में भी सुख का सूरज खेलता था। उसका आंगन भी चहल-पहल से गूंजता था। सात वर्ष पहले धूमधाम से बेटी की शादी की तो लगा एक जिम्मेदारी निभा दी।
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हंसी-खुशी दिन गुजर रहे थे, कि एक वर्ष पहले पति की मौत हो गई।
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बस उसके बाद तो जैसे सुख के सूरज ने उनसे मुंह ही मोड़ लिया। परेशानियों की काली छाया पीछा नहीं छोड़ रही है। जिस बेटी के जीवन में तमाम सुखों का आशीर्वाद देकर विदा किया, कुछ समय पहले उसका भी सुहाग उजड़ गया। अब बाढ़ ने घर-आंगन और खेत ही बहा दिए।
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नम हो जाती हैं आंखें
अपनी यह व्यथा सुनाते प्रकृति का कहर झेल रही न्यू डिडसारी गांव की 40 वर्षीय बिंद्रा देवी की आंखें नम हो जाती है। उनके दो बेटे और तीन बेटी हैं। सबसे बड़ी बेटी उत्तरा की शादी रैथल में प्यारे लाल से सात वर्ष पहले हो गई थी। बड़ा बेटा अमित 12वीं और छोटा बेटा सुमित चौथी कक्षा में पढ़ रहा है।
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पति की हार्ट अटैक से हुई मौत
बिंद्रा बताती है कि उसके पति कुंदन लाल ठेकेदारी करते थे। सितम्बर 2012 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। पति के स्वर्गवास हुए दो माह भी नहीं बीते थे कि वाहन दुर्घटना में बड़ी बेटी का पति भी परलोक सिधार गया। इसके बाद बिंद्रा के ऊपर दुखों का पहाड़ सा आ गया।
बड़ी बेटी अपने दो बच्चों के साथ मायके आ गई। बिंद्रा खेती-बाड़ी कर किसी तरह परिवार का लालन-पालन कर रही थी, लेकिन 17 जून को भागीरथी में आई बाढ़ ने न उसके घर और 10 नाली खेती भी बहा ले गई।
बेघर हुई बिंद्रा
बेघर हुई बिंद्रा अब गांव के जूनियर हाईस्कूल में रह रही है। उसके पास खाने के लिए राशन तक नहीं है। बताती है कि न तो उसकी विधवा पेंशन लग पाई और न ही कोई सरकारी मदद मिली।
उसके समक्ष स्वयं के साथ ही सात सदस्यों के पेट भरने और सिर ढकने की चुनौती है। ऐसे में देखना यह होगा कि क्या सरकार और स्वयं सेवी संस्थाएं उसकी मदद के लिए आगे आएगी।