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उत्तराखंडः अभी भी 1400 गांव में नहीं पहुंची राहत
देहरादून/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2013 08:41 AM IST
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आपदा राहत के दावे भले बड़े-बड़े हो रहे हैं, पर हकीकत यह है कि कई गांव अभी भी राहत का इंतजार का रहे हैं। सड़क मार्ग से कटे ये गांव विपदा के कारण अलग-थलग पड़ गए हैं।
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खराब मौसम के कारण पिथौरागढ़ में सोमवार को कोई राहत सामग्री पहुंचाई ही नहीं जा सकी।
टूटा मुसीबतों का पहाड़
खुद प्रदेश सरकार स्वीकार कर रही है कि प्रदेश के करीब 1400 गांव संपर्क मार्ग से कटे हुए हैं। सड़क को पहाड़ की लाइफलाइन कहा जाता है, जिसके टूटने से इन गांवों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। हाल यह है कि बदरीनाथ रूट पर ही लामबगड़ के सामने का गांव पटोड़ी राहत का इंतजार कर रहा है।
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अलकनंदा में उफान के कारण यह गांव पूरी तरह से कट गया है और गांव में फंसे हुए लोग कहीं आ-जा नहीं पा रहे हैं। इसी तरह अगासी, बिनौला में भी राहत नहीं पहुंच पाई है। वहीं खीरों गांव भी पूरी तरह से कटा हुआ है। इसी तरह नीति घाटी में गमसाली, बंपा, नीति, दोनागिरी जैसे गांव सड़क टूटने के कारण दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं।
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बेहद बुरे हैं इन गांवों के हाल
ये गांव धौलीगंगा में आए उफान के कारण अपने रास्तों को गंवा चुके हैं। चमोली जिले की उर्गम घाटी में ही दवग्राम, भरकी, कपिनखी, अरूसी, मरला जैसे गांव के हालात अभी तक पूरी तरह से सामने नहीं आ पाए हैं। यही हाल मंदाकिनी में आए उफान के कारण संपर्क से कटे हुए गांवों का है।
मुसीबत यह है कि इन गांवों तक राहत पहुंचाने केलिए पहले गांव की जरूरत का अंदाजा लगाना जरूरी है। फूड पैकेट के जरिए गांवों को तात्कालिक राहत तो दी जा सकती है, पर गांवों की अन्य कई जरूरतों को पूरा करना मुश्किल है।
प्रभावित गांवों के हर व्यक्ति को राहत मिल जाए, इसके लिए कोशिश हो रही है। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हर जिले में एक कमेटी का गठन किया गया है। इसमें स्थानीय विधायक, जिलाधिकारी और क्षेत्र के एक सम्मानित व्यक्ति को शामिल किया गया है। यह कमेटी राहत वितरण की निगरानी करेगी और जरूरतें सरकार को बताएगी।
-अंबिका सोनी, प्रभारी कांग्रेस
जिलाधिकारियों को स्पष्ट कह दिया गया है कि जहां भी जरूरत हो राहत पहुंचाई जाए। राहत सामग्री की कोई कमी नहीं है। संपर्क से कटे हुए गांवों की खोज खबर ली जा रही है।
-विजय बहुगुणा, मुख्यमंत्री
जिले के गांवों में भेजी गई सामग्री
रुद्रप्रयाग- चौमासी, गौरीगांव, जलमल्ला, कोटमा, त्रिजुगीनारायण, कालीमठ, जोखी, कुडजेटी, सिलौढ़, गौनीगांव (186 क्विंटल)
चमोली- उर्गम, घोड़ापड़ाव, लामबगड़, पुलमा, पांडुकेश्वर (10 क्विटंल)
उत्तरकाशी- भटवाड़ी, मनेरी, हर्षिल (29 क्विंटल)
पिथौरागढ़- मौसम खराब होने से हेलीकाप्टर नहीं उड़ पाए
बागेश्वर- बधियाकोट (तीन क्विंटल)
-हेलीकाप्टर से कुल 81 चक्कर लगा कर 228 क्विंटल मात्रा के 2038 पैकेट गिराए गए।
-देहरादून से गुप्तकाशी के लिए 11, जोशीमठ के लिए 5, उत्तरकाशी के लिए 10 ट्रक सामग्री भेजी गई है। चमोली, जोशीमठ, रुद्रप्रयाग के लिए एक-एक ट्रक कंबल भेजे गए हैं।