फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   किसी कांधे के सहारे की जरूरत नहीं रही

किसी कांधे के सहारे की जरूरत नहीं रही

Sun, 28 Jul 2013 05:34 AM IST
Dehradun
Dehradun Updated Sun, 28 Jul 2013 05:34 AM IST
विज्ञापन
देहरादून। नेत्रदान कितना महान कार्य है, इसकी बानगी सहारनपुर के इस रोगी से जानिये। इसने पूरे चार साल नेत्रहीन का जीवन गुजारा है। आंखों में संक्रमण के बाद कार्नियल अंधता हो गई।
विज्ञापन


कार्निया ट्रांसप्लांट के बाद रोगी की जिंदगी बदल गई। एक साल पहले तक यह रोगी दो लोगों के कांधे के सहारे हिमालयन इंस्टीट्यूट जोली ग्रांट अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में आया था। अब सहारनपुर से अकेले चेक अप के लिए आते हैं।
विज्ञापन


कुछ नियम कायदे की वजह से हम इस रोगी का नाम पता नहीं छाप रहे हैं। लेकिन इस रोगी की पूरी कहानी हम आपको बताएंगे। मकसद लोगों को सिर्फ नेत्रदान की अहमियत बताना है कि एक इंसान की अंधेरी जिंदगी किस तरह रोशन हो जाती है। हिमालयन इंस्टीट्यूट के नेत्र रोग विभाग की आई बैंक प्रभारी डा. नीती गुप्ता बताती हैं कि सहारनपुर के इस रोगी की दोनों आंखों में रोशनी नहीं थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


आंखों में संक्रमण से अल्सर बना और फिर कार्निया खराब हो गई। रोगी इलाज के लिए कई जगह भटका। एक साल पहले जोली ग्रांट अस्पताल आया। जांच के बाद कार्निया ट्रांसप्लांट हुई। पट्टी हटी, आंख में रोशनी की किरण फूट पड़ी। 60 साल की उम्र में भी रोगी की जिंदगी सामान्य है। डा. गुप्ता बताती हैं कि चेक अप के लिए रोगी अकेले अस्पताल आ जाता है। सहारनपुर के इस रोगी की कहानी तो हमने आपको बतौर बानगी सुनाई है। इस तरह के 14 रोगी और हैं जिनकी आंखों की रोशनी बिल्कुल चली गई थी। लेकिन नेत्रदानियों की बदौलत आज वे सब कुछ अपनी आंखों से देख सकते हैं। नेत्रदानी खुद तो दुनिया से रुखसत हुए लेकिन दूसरों को आबाद कर गए।
---
कार्निया के ट्रांसप्लांट में रोगी का लगभग दो हजार रुपए खर्च आता है। सात-आठ सौ रुपए पैथोलोजिकल जांचों में खर्च होते हैं। इसके अलावा दवाओं और कन्ज्युमेबिल आइटम में बाकी पैसा खर्च होता है। बीपीएल कार्ड धारक के लिए सब कुछ मुफ्त है।
---
-जो रोगी कार्नियल अंधता से पीड़ित हैं और कार्निया ट्रांसप्लांट कराना चाहते हैं, वे ओपीडी में आकर चेक-अप कराएं। इसके बाद आई बैंक में रजिस्ट्रेशन करा लें। कार्निया मिलने पर जांच के बाद ट्रांसप्लांट हो जाएगा।
---
-अगर कोई व्यक्ति अपने परिजन के देहांत के बाद उसके नेत्र दान करना चाहता है तो वह जोली ग्रांट अस्पताल के आई बैंक प्रभारी को फौरन फोन कर दे। आई बैंक की टीम उसके घर आकर पार्थिव शरीर से नेत्र सुरक्षित कर लेगी।

---
.जोली ग्रांट अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आरसी नागपाल ने बताया कि कार्नियल अंधता से पीड़ित 45 रोगी अभी लाइन में हैं। कार्निया मिलते ही ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। अस्पताल में अत्याधुनिक उपकरण और तकनीक उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed