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अब एमडी से कौन मांगे जवाब...
Dehradun
Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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देहरादून। आरोपी खुद कोतवाल बन जाए तो उससे फिर भला कौन पूछताछ करेगा। कुछ ऐसा ही चल रहा है ऊर्जा निगम में। एके जौहरी आज भले ही निगम के प्रबंध निदेशक पद तक पहुंच चुके हों, लेकिन यहां तक की उनकी राह कई गड़बड़ियों से होकर गुजरी है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि वर्ष 2004-05 की कैग रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 सितंबर 1998 से 14 मई 1999 तक जौहरी कोटद्वार में अधिशासी अभियंता रहे। इस दौरान औद्योगिक इकाइयों को ‘राहत’ देकर उन्होंने ऊर्जा निगम को करोड़ों रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाई। पद का दुरुपयोग भी खूब किया। वर्ष 2011 में तत्कालीन एमडी जैन ने जौहरी से जवाब तलब किया। तब तक जौहरी निदेशक परिचालन हो चुके थे। लेकिन जौहरी का जवाब मिलता उससे पहले ही जैन को सरकार ने हटा दिया। इसके साथ ही पांच पेज के जैन के सवाल भी चले गए ठंडे बस्ते में। अब जौहरी खुद एमडी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अब आखिर एमडी साहब से जवाब मांगेगा कौन?
ये थे आरोप
-भारी बिजली कनेक्शन के 12 उपभोक्ताओं पर पेनल्टी नहीं लगाई, इससे ऊर्जा निगम को करीब 86.32 लाख रुपये राजस्व का नुकसान हुआ
-मै. कुकरेती स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड पर लगाई गई 2.16 लाख रुपये की पेनल्टी और अधिभार की रकम गलत तरीके से समाप्त कर दी गई
-चार स्टील फर्नेंस पर आठ माह का विलंब अधिभार चार्ज नहीं किया गया, इससे निगम को 45.71 लाख रुपये राजस्व की हानि हुई
-पांच स्टील फर्नेंस इकाइयों में मीटर क्षतिग्रस्त होने पर नियमानुसार निर्धारण न कर इकाइयों को 16.47 लाख रुपये का लाभ पहुंचाया गया
-नौ इकाइयों को 33.88 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया
-राना कास्टिंग और पाम एग्रोटेक कंपनी की बिलिंग में हेरफेर की, इससे ऊर्जा निगम को 85.18 लाख रुपये का नुकसान हुआ
इनका कहना है
यह प्रकरण संज्ञान में नहीं है। अगर तत्कालीन एमडी ने कोई रिपोर्ट तलब की थी तो उसकी पड़ताल कराकर वर्तमान प्रबंध निदेशक से पूछताछ की जाएगी।
-एमसी उप्रेती, अपर सचिव ऊर्जा
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ये थे आरोप
-भारी बिजली कनेक्शन के 12 उपभोक्ताओं पर पेनल्टी नहीं लगाई, इससे ऊर्जा निगम को करीब 86.32 लाख रुपये राजस्व का नुकसान हुआ
-मै. कुकरेती स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड पर लगाई गई 2.16 लाख रुपये की पेनल्टी और अधिभार की रकम गलत तरीके से समाप्त कर दी गई
-चार स्टील फर्नेंस पर आठ माह का विलंब अधिभार चार्ज नहीं किया गया, इससे निगम को 45.71 लाख रुपये राजस्व की हानि हुई
-पांच स्टील फर्नेंस इकाइयों में मीटर क्षतिग्रस्त होने पर नियमानुसार निर्धारण न कर इकाइयों को 16.47 लाख रुपये का लाभ पहुंचाया गया
-नौ इकाइयों को 33.88 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया
-राना कास्टिंग और पाम एग्रोटेक कंपनी की बिलिंग में हेरफेर की, इससे ऊर्जा निगम को 85.18 लाख रुपये का नुकसान हुआ
इनका कहना है
यह प्रकरण संज्ञान में नहीं है। अगर तत्कालीन एमडी ने कोई रिपोर्ट तलब की थी तो उसकी पड़ताल कराकर वर्तमान प्रबंध निदेशक से पूछताछ की जाएगी।
-एमसी उप्रेती, अपर सचिव ऊर्जा