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दून से ग्राम स्वराज यात्रा का जयघोष
Dehradun
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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देहरादून। महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे की ग्राम विकास परंपरा को आगे बढ़ाने का जयघोष उत्तराखंड की राजधानी से हुआ। यह यात्रा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और हरियाणा में कई स्थानों से होते हुए दिल्ली स्थिति राजघाट तक जाएगी।
मंगलवार को गांधीवादी विचारकों ने तपोवन स्थित वैदिक सेवा आश्रम परिसर में जल जंगल, जमीन को बचाने को लेकर शुरू हुई स्वराज यात्रा में लोगों से बड़ी संख्या में भागेदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांव को बचाने के लिए फिर से सत्याग्रह जैसा आंदोलन शुरू करना होगा। यह यात्रा इसका प्रथम चरण है। गांवों के प्रबंधन का अधिकार जब तक गांव के लोगों के पास नहीं होगा, देश की नींव मजबूत नहीं हो पाएगी। गांव नहीं बचेंगे तो भारत की संस्कृति भी नहीं बचेगी। यह तभी संभव है जब हम अपनी जमीन को पूंजीवाद के चंगुल में आने से रोकेंगे।
प्रसिद्ध समाजसेवी पीवी राजगोपाल ने कहा कि पंचायत विस्तार अधिनियम और वनाधिकार कानून के तहत प्रस्तावित एजेंडे को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। सर्व सेवा संघ की अध्यक्ष राधा भट्ट ने कहा कि बिना स्वराज के हम आगे बढ़ नहीं सकते। पूर्व सांसद और गांधीवादी डा.रामजी सिंह ने कहा कि सामंतशाही, राजतंत्र और लोकतंत्र सत्ता के वर्गीकरण के हर स्तर पर संपत्तियों को लेकर छीना झपटी हुई है। विनोबा भावे ने ‘सबै भूमि गोपाल की’ यह नारा जरूर दिया, लेकिन वह सामाजिक रूप में आने के बजाए धार्मिक बनकर रह गया। इस मौके पर सुरेश भाई, अशोक भारत, महादेव विद्रोही, अमरनाथ सहित कई अन्य विचारक भी मौजूद रहे।
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यह होगा यात्रा का रूट
देहरादून, नौगांव, उत्तरकाशी, घनशाली तिलवाड़ा (रुद्रप्रयाग), श्रीनगर, उफरैल, सतपुली, कोटद्वार, ऋषिकेश, पोंटा साहिब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा फिर दिल्ली।
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मंगलवार को गांधीवादी विचारकों ने तपोवन स्थित वैदिक सेवा आश्रम परिसर में जल जंगल, जमीन को बचाने को लेकर शुरू हुई स्वराज यात्रा में लोगों से बड़ी संख्या में भागेदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांव को बचाने के लिए फिर से सत्याग्रह जैसा आंदोलन शुरू करना होगा। यह यात्रा इसका प्रथम चरण है। गांवों के प्रबंधन का अधिकार जब तक गांव के लोगों के पास नहीं होगा, देश की नींव मजबूत नहीं हो पाएगी। गांव नहीं बचेंगे तो भारत की संस्कृति भी नहीं बचेगी। यह तभी संभव है जब हम अपनी जमीन को पूंजीवाद के चंगुल में आने से रोकेंगे।
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प्रसिद्ध समाजसेवी पीवी राजगोपाल ने कहा कि पंचायत विस्तार अधिनियम और वनाधिकार कानून के तहत प्रस्तावित एजेंडे को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। सर्व सेवा संघ की अध्यक्ष राधा भट्ट ने कहा कि बिना स्वराज के हम आगे बढ़ नहीं सकते। पूर्व सांसद और गांधीवादी डा.रामजी सिंह ने कहा कि सामंतशाही, राजतंत्र और लोकतंत्र सत्ता के वर्गीकरण के हर स्तर पर संपत्तियों को लेकर छीना झपटी हुई है। विनोबा भावे ने ‘सबै भूमि गोपाल की’ यह नारा जरूर दिया, लेकिन वह सामाजिक रूप में आने के बजाए धार्मिक बनकर रह गया। इस मौके पर सुरेश भाई, अशोक भारत, महादेव विद्रोही, अमरनाथ सहित कई अन्य विचारक भी मौजूद रहे।
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यह होगा यात्रा का रूट
देहरादून, नौगांव, उत्तरकाशी, घनशाली तिलवाड़ा (रुद्रप्रयाग), श्रीनगर, उफरैल, सतपुली, कोटद्वार, ऋषिकेश, पोंटा साहिब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा फिर दिल्ली।