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पाक क्रिकेटर वसीम अकरम ने उठाए आईसीसी की बॉल पर स्लाइवा न लगाने वाली पाबंदियों पर सवाल

Wed, 10 Jun 2020 05:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 10 Jun 2020 05:57 PM IST
सार

  • थूक लगाने पर प्रतिबंध लगाने से गेंदबाज रोबोट की तरह गेंदबाजी करेंगे, स्विंग नहीं करा पाएंगे
  • अकरम का आरोप, आईसीसी के ज्यादातर फैसले बल्लेबाजों को ध्यान में रखकर होते हैं

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Pak cricketer Wasim Akram raised questions on  ICC sanctions for not apply saliva on ball
वसीम अकरम - फोटो : Dawn

विस्तार

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पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर वसीम अकरम ने कोरोना को लेकर आईसीसी की ओर से खिलाड़ियों पर लगाई गई बंदिशों पर एतराज जताया है। उन्होंने आईसीसी को कहा है कि गेंद को चमकाने के लिए खिलाड़ियों को स्लाइवा (थूक) के इस्तेमाल पर रोक लगाने से गेंदबाज रोबोट हो जाएंगे।


उनका कहना है कि वे बॉल को स्विंग नहीं कर पाएंगे। उनके मुताबिक गेंद को थूक या पसीने से चमकाने और बेहतर तरीके से स्विंग कराने के लिए ये जरूरी है। हालांकि आईसीसी ने पसीने के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई है।

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वसीम अकरम ने कहा है कि वो इस मुश्किल समय में एहतियात बरतने के पक्ष में हैं, लेकिन खिलाड़ियों पर लगी इस पाबंदी की वजह से गेंद को स्विंग करवाने के लिए अब गेंदबाजों को गेंद पुरानी होने तक का इंतजार करना पड़ेगा या फिर बगैर स्विंग कराए वे रोबोट की तरह सीधी गेंद ही फेंक पाएंगे।
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वसीम ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही गेंद को स्विंग कराने के लिए थूक और पसीने का इस्तेमाल किया है और उन जैसे खिलाड़ियों के लिए ऐसा न कर पाने से गेंदबाजी की धार खत्म होने का खतरा है।

अकरम ने अपने करियर के टेस्ट मैचों में 414 वन डे मैचों में 502 विकेट लिए हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत से शुरू हो रहे वेस्टइंडीज और इंग्लैंड सीरीज के दौरान इन प्रतिबंधों का असर देखने को मिलेगा लेकिन उनके लिए ये एक नया अनुभव है।


उन्होंने कहा कि आईसीसी को इसके विकल्प के तौर पर वेसलीन जैली के इस्तेमाल की छूट देनी चाहिए। सिर्फ पसीने से गेंद को ठीक से स्विंग नहीं कराया जा सकता।

पसीने के ज्यादा इस्तेमाल से गेंद के गीले होने का खतरा होता है और पसीना हर मौसम में नहीं आता। ज्यादातर ठंडे देशों में तो पसीना नहीं आता।

ऐसे में गेंदबाजों की जरूरत को देखते हुए आईसीसी को इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर फैसले बल्लेबाजों को ध्यान में रखकर लिए जाते रहे हैं, ऐसे में गेंदबाज क्या करें।

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