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जब विराट कोहली के कारण तेंदुलकर की आंखों में आ गए थे आंसू
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 09 Jun 2016 04:22 PM IST
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सचिन तेंदुलकर
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मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर बेहद संयत स्वभाव के हैं और वह कभी भी अपनी भावनाओं को बाहर आने नहीं देते, लेकिन एक समय ऐसा भी आया कि जब उनकी आंखों में आंसू आ गए और इसका कारण बने विराट कोहली।
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बात 2013 के नवंबर की है जब तेंदुलकर 24 साल के अपने लंबे और बेमिसाल करियर को खत्म कर चुके थे और वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के बाद प्रभावशाली भाषण देने के बाद उनकी आंखें नम थीं।
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इसके बाद तेंदुलकर ड्रेसिंग रूम चले गए जहां वह चुपचाप बैठे थे, इस बीच कोहली उनके पास पहुंचे और उन्होंने उनके हाथों में धागा बांध दिया जिसे वह हमेशा गुड लक के लिए अपनी कलाई में पहना करते थे। कोहली ने उनसे कहा कि यह उनके पिता ने उन्हें दिया था और वह हमेशा चाहते थे कि यह आपको दे सकूं। फिर कोहली ने उनका पैर छूने से पहले यह धागा गिफ्ट कर दिया।
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कोहली के इस सम्मान से वह बहुत ही अभिभूत हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने कोहली को यह कहते हुए गले लगा लिया कि तुम मेरे छोटे भाई जैसे हो और तुम्हारी जगह पैरों में नहीं है। यह एक ऐसा क्षण है जिसे मैं कभी भी नहीं भूल सकता।
तेंदुलकर बनने के लिए कोहली को करना होगा लंबा सफर
सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली अपनी-अपनी पीढ़ी के बेजोड़ बल्लेबाज हैं। कोहली को क्रिकेट वर्ल्ड का अगला तेंदुलकर माना जा रहा है लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो बताती हैं कि नई रन मशीन यानी कोहली को मास्टर ब्लास्टर के समकक्ष जाने के लिए अभी काफी कुछ करना होगा।
दोनों बल्लेबाजों के बीच तुलना करने के आलोचक यह भी कहते हैं कि तेंदुलकर के जमाने में दिग्गज गेंदबाजों की फौज हुआ करती थी। उस समय वसीम अकरम, कर्टली एंब्रोस, ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वार्न, वकार युनूस और मुथैया मुरलीधरन जैसे धाकड़ गेंदबाज हुआ करते थे, लेकिन आज कोहली के सामने ऐसे खतरनाक गेंदबाज नहीं हैं।
दूसरी ओर, महान क्रिकेटर बनने के लिए कोहली को तेंदुलकर से शालीनता सीखनी होगी। वह मैदान पर अपना आपा नहीं खोते थे जबकि कोहली बेहद आक्रामक रहते हैं। कोहली को चाहिए कि उन्हें महान बनने के लिए आक्रामकता के साथ-साथ संयत भी रहना सीखना होगा।
खैर, कोहली इस समय बेजोड़ फॉर्म में हैं और लगातार रन बना रहे हैं। हर समय स्थितियां अलग-अलग होती हैं और खिलाड़ी वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार ही खेलता है। डॉन ब्रेडमैन के समय स्थिति अलग थी तो तेंदुलकर और कोहली के समय की स्थितियां अलग-अलग रही हैं। ऐसे में देखना होगा कि कोहली क्रिकेट और टीम इंडिया को कितना दे पाते हैं।
दोनों बल्लेबाजों के बीच तुलना करने के आलोचक यह भी कहते हैं कि तेंदुलकर के जमाने में दिग्गज गेंदबाजों की फौज हुआ करती थी। उस समय वसीम अकरम, कर्टली एंब्रोस, ग्लेन मैक्ग्रा, शेन वार्न, वकार युनूस और मुथैया मुरलीधरन जैसे धाकड़ गेंदबाज हुआ करते थे, लेकिन आज कोहली के सामने ऐसे खतरनाक गेंदबाज नहीं हैं।
दूसरी ओर, महान क्रिकेटर बनने के लिए कोहली को तेंदुलकर से शालीनता सीखनी होगी। वह मैदान पर अपना आपा नहीं खोते थे जबकि कोहली बेहद आक्रामक रहते हैं। कोहली को चाहिए कि उन्हें महान बनने के लिए आक्रामकता के साथ-साथ संयत भी रहना सीखना होगा।
खैर, कोहली इस समय बेजोड़ फॉर्म में हैं और लगातार रन बना रहे हैं। हर समय स्थितियां अलग-अलग होती हैं और खिलाड़ी वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार ही खेलता है। डॉन ब्रेडमैन के समय स्थिति अलग थी तो तेंदुलकर और कोहली के समय की स्थितियां अलग-अलग रही हैं। ऐसे में देखना होगा कि कोहली क्रिकेट और टीम इंडिया को कितना दे पाते हैं।