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क्या लौट पाएगा विंडीज क्रिकेट का सुनहरा इतिहास
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 23 Jan 2015 03:39 PM IST
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लंबा समय बीत चुका है उस बात को जब वेस्टइंडीज की टीम का शुमार दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम के रूप में होता था। बात चाहे बल्लेबाजी की हो या गेंदबाजी की, इस खेल पर उसका एकछत्र राज था। 70 के दशक से यह सिलसिला 90 के दशक तक जारी रहा।
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अब मौजूदा विंडीज टीम पुरानी टीम की परछाई मात्र बनकर रह गई है। रही सही कसर खिलाड़ियों और बोर्ड की आपसी खींचतान ने पूरी कर दी है।
इसी का नतीजा है कि इस बार टीम बिना कीरोन पोलार्ड और ड्वेन ब्रावो के वर्ल्ड कप खेलने उतर रही है। ऐसे में बल्लेबाजी में जहां सारा दारोमदार क्रिस गेल के अनुभवी कंधों पर होगा, वहीं गेंदबाजी का जिम्मा रहस्यमयी स्पिनर सुनील नारायन संभालेंगे। मगर इन सबके बीच सवाल अपनी जगह कायम है कि क्या यह टीम विंडीज क्रिकेट का सुनहरा इतिहास दोहरा पाएगी।
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टीम दो बार 1975 और 1979 में वर्ल्ड कप जीत चुकी है जबकि 1983 के फाइनल में उसे टीम इंडिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
खास बातें
1928 में आईसीसी से टेस्ट दर्जा मिला।
कप्तान : जेसन होल्डर
कोच : रिची रिचर्डसन (वेस्टइंडीज)
वेस्टइंडीज टीम- जेसन होल्डर (कप्तान), मार्लोन सैमुअल्स, सुलेमान बेन, डेरेन ब्रावो, जोनाथन कार्टर, शेल्डन कोटरेल, क्रिस गेल, सुनील नारायन, दिनेश रामदीन (विकेटकीपर), केमार रोच, आंद्रे रसेल, डेरेन सैमी, लिंडल सिमंस, ड्वेन स्मिथ और जेरोम टेलर।
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