{"_id":"618a4f1434eb3c54bd047dcf","slug":"things-to-know-about-ravi-shastri-apart-from-his-achievements-and-failures","type":"story","status":"publish","title_hn":"रवि शास्त्री: नाकामियों और उपलब्धियों से दूर, भारत के पूर्व कोच की वह बातें जिसने बनाया उन्हें सबसे अलग","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
रवि शास्त्री: नाकामियों और उपलब्धियों से दूर, भारत के पूर्व कोच की वह बातें जिसने बनाया उन्हें सबसे अलग
Tue, 09 Nov 2021 04:06 PM IST
Rajeev Rai
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Tue, 09 Nov 2021 04:06 PM IST
सार
रवि शास्त्री एक ऐसा नाम जिसने बतौर क्रिकेटर भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया। लेकिन उसके बाद एक कोच के तौर पर उससे भी ज्यादा देने की कोशिश की। हालांकि कई बार उन्हें आलोचनाओं और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा बावजूद इसके वह टीम और अपने खिलाड़ियों के साथ हमेशा खड़े दिखे।
विज्ञापन
भारतीय टीम के साथ रवि शास्त्री
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रवि शास्त्री एक ऐसा नाम जिसने बतौर क्रिकेटर भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया। लेकिन उसके बाद एक कोच के तौर पर उससे भी ज्यादा देने की कोशिश की। हालांकि कई बार उन्हें आलोचनाओं और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा बावजूद इसके वह टीम और अपने खिलाड़ियों के साथ हमेशा खड़े दिखे। शास्त्री की नाकामियों खासतौर पर आईसीसी टूर्नामेंट की असफलताओं पर काफी बात होती है लेकिन आंकड़ें उन्हें एक सफल प्रशासक बताते हैं और उनकी उपलब्धियों को भी दर्शाते हैं।
विज्ञापन
रवि शास्त्री 2017 में टीम इंडिया के साथ कोच के तौर पर जुड़े थे और इसके बाद कप्तान विराट कोहली के साथ मिलकर टीम को नई ऊंचाइयों पर ले गए। उनकी कोचिंग में भारतीय टीम ने 57 प्रतिशत टेस्ट मुकाबले जीते (42 मैच में 24 जीत), 67 प्रतिशत एकदिवसीय मुकाबलों में जीत (79 में 53 जीत) और 65 प्रतिशत टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में जीत (67 में 43 जीत)। कुल मिलाकर पांच साल के उनके कार्यकाल में भारतीय टीम ने सभी प्रारूपों में 65 प्रतिशत जीत हासिल की।
विज्ञापन
शास्त्री टीम के हर खिलाड़ी के साथ हर परिस्थिति में खड़े रहे। वह खिलाड़ियों के दर्द में साथ रहे, दुःख में हौसला बढ़ाया और जीत का जश्न भी भरपूर मनाया। फटाफट और 365 दिन के आज के क्रिकेट के दौर में उन्होंने खिलाड़ियों को कभी कमजोर नहीं होने दिया।
विज्ञापन
कई सालों तक टीम के मैनेजर रहे सुनील सुब्रमण्यम अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि कैसे धर्मशाला में श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम की करारी हार के बाद रवि शास्त्री खिलाड़ियों से मिले थे। उन्होंने बताया, 'हार के बाद शास्त्री ने रात में टीम मीटिंग बुलाई। सभी लोग आठ बजे बॉनफायर में पहुंचेंगे। सभी को तब लगा कि वह किसी की क्लास लगाएंगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। शास्त्री ने कहा कि वे अंताक्षरी खेलेंगे। धोनी रात के दो बजे तक पुराने गाने गाते रहे, इसके बाद सभी खिलाड़ी खुश नजर आए और हार के गम को भुलाकर लौट गए। सभी को पता था कि उन्हें आगे भविष्य में क्या करना है।
शास्त्री के कार्यकाल में चयन समिति का हिस्सा रह चुके जतिन परांजपे भी अपना अनुभव साझा करते हुए उनकी खूबियों को गिनाते हैं। वह बताते हैं, 'शास्त्री अलग खिलाड़ी के साथ अलग-अलग तरह से बात करते थे। उन्हें मालूम होता था कि किससे क्या और कितना बात करना है। अगर वह वाशिंगटन सुंदर से बात करेंगे तो वह अलग होगा और शमी के साथ उनकी बातचीत अलग होगी।'
जतिन ने कहा, 'मुझे लगता है कि शास्त्री सुंदर में खुद को देखते हैं। एक गेंदबाज जो बल्लेबाजी ज्यादा अच्छी समझ के साथ कर सकता है। वह चाहते थे कि सुंदर टेस्ट टीम का हिस्सा बनें और यह सिर्फ एस संयोग नहीं है कि सुंदर ने ऑस्ट्रलिया में शानदार काम किया। शास्त्री ने सुंदर को तराशने में अहम योगदान दिया।
सुनील सुब्रमण्यम बताते हैं कि टेस्ट में रोहित को सलामी बल्लेबाजी करने के लिए तैयार करना हो, खिलाड़ियों खासकर तेज गेंदबाजों की फिटनेस को विश्वस्तरीय बनाए रखने के लिए यो-यो टेस्ट की शुरूआत हो या फिर विराट कोहली की पांच तेज गेंदबाजों को तैयार करने की मांग को पूरा करना, ये सब शास्त्री ने किया।