मोगा (पंजाब) के 23 वर्षीय एथलीट तेजिंदर पाल सिंह ने पांचवें प्रयास में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर एशियाई खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया और देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। पंजाब के इस 23 वर्षीय लंबे-चौड़े एथलीट पर पूरे देश को गर्व है।
बता दें कि बेशक आज पूरी दुनिया इन्हें एक एथलीट के रूप में जानने लगी है, लेकिन तेजिंदर की दिलचस्पी कभी भी शॉट पुट के खेल में आने की नहीं थी। उन्हें मैदान में उतरा जरूर था, लेकिन किसी और खेल के साथ। तेजिंदर पाल सिंह उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब 2017 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्हें रजत पदक मिला था।
पंजाब के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले तेजिंदर पाल सिंह तूर बचपन में एक क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता के कहने पर उन्होंने शॉटपुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ। युवा तजिंदर को इसमें काफी सफलता मिली। हालांकि इस खेल में आने से पहले उन्हें कड़ी चुनौतियां का सामना भी करना पड़ा।
इस खेल के लिए जिम, उच्च क्वालिटी के सप्लीमेंट्स और महंगे जूतों की जरूरत होती है। हालांकि एक सामान्य किसान का बेटा होने के नाते इतना कुछ कर पाना आसान नहीं था। ऊपर से उनके पिता कैंसर पीड़ित भी थे। इसके बावजूद उन्होंने अपना कदम पीछे नहीं खींचा।
तेजिंदर की उपलब्धियों को देखते हुए इस मुश्किल की घड़ी में भारतीय नौसेना ने उनकी मदद की। नौसेना ने उन्हें न सिर्फ नौकरी दी बल्कि उनके पिता के इलाज का खर्च भी उठाया। बता दें कि एशियाई खेलों में अब तक भारत को 29 मेडल मिल चुका है, जिसमें 7 गोल्ड 5 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज मेडल शामिल है।