वर्ल्ड कप में भारतः गिरे, उठे और आखिर में फिर लुढ़के
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वर्ल्ड कप क्रिकेट सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से 95 रनों से हार जाने के बाद टीम इंडिया टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। अब रविवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया का फ़ाइनल मुक़ाबला न्यूज़ीलैंड से होगा।
लेकिन इस वर्ल्ड कप के शुरू होने से पहले जहां टीम इंडिया एक जीत के लिए तरस रही थी, यह बात ताज्जुब कर देने वाली है कि कैसे वह टीम 14 टीमों को पार कर टॉप 4 में पहुंच गई। वर्ल्ड कप से पहले तो टीम इंडिया के सेमीफाइनल तक पहुंचने को लेकर क्रिकेट पंडित तक गंभीर नहीं थे। वहीं, सेमीफ़ाइनल से पहले भारत ने लगातार सात मैच जीते और एक नया भरोसा हासिल किया।
पूल मैचों और क्वार्टर फ़ाइनल में ज़बरदस्त प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में अपनी चिर-प्रतिद्द्वी टीम पाकिस्तान को शिकस्त देकर वर्ल्ड कप का इतिहास कायम रखा। इतना ही नहीं दक्षिण अफ्रीका की जीत के तिलिस्म को तोड़ने में भी कामयाबी हासिल की। भारत वर्ल्ड कप के इतिहास में दक्षिण अफ्रीका पर कभी जीत हासिल नहीं कर पाया था।
टीम इंडिया का वर्ल्ड कप सफर
वर्ल्ड कप 2015 फतह करने का सपना अब टीम इंडिया के ध्वस्त हो चुका है। क्रिकेट के इस महाकुंभ में टीम इंडिया के सफर पर नजर दौड़ाए तो भारत का ऑस्ट्रेलियाई धरती में वर्ल्ड कप का सफर औसतन रहा। वर्ल्ड कप के खिताब को बचाने में नाकाम रही टीम इंडिया ने कुल आठ मैचों में सिर्फ एक में खराब मैच खेला और वह भी सेमीफाइनल जैसा महत्वपूर्ण मुक़ाबला।
लीग मैचों से जीत के अजेय रथ पर सवार टीम इंडिया ने क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश को मात दी। हांलाकि बांग्लादेश को भारत के मुकाबले कम ही आंका जाता है। लेकिन 2007 वर्ल्ड कप में इसी टीम ने भारत को हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर उलटफेर किया था।
वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज के अलावा किसी बड़ी टीम के खिलाफ सामना नही हुआ। सभी मैचों में भारत एक तरफा मुकाबले में जीता। सात मैचों में विपक्षी टीम के 70 खिलाड़ियों को आउट करने वाली टीम सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को ऑलआउट करने में नाकाम रही।
वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का सबसे बड़ा ट्रंप गेंदबाजी थी। लेकिन आखिर में उसी ने टीम की नैय्या डुबाई। ऑस्ट्रेलियाई टीम के बल्लेबाजों के हाथों भारतीय गेंदबाजों ने खूब रन लुटाए। सेमीफाइनल में भारतीय गेंदबाज़ी दबाव और तनाव में नज़र आई।