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सिफारिश हुई ध्यानचंद की, भारत रत्न मिला सचिन को
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 18 Nov 2013 12:22 PM IST
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सरकार ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को नजरअंदाज करते हुये अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की शनिवार को घोषणा कर दी।
सचिन ने मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में अपना 200वां और आखिरी टेस्ट खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। सचिन का विदाई मैच पूरा होने के कुछ घंटें बाद ही सरकार ने घोषणा कि सचिन को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।
सरकार ने सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा करते हुये कहा कि वह निस्संदेह एक अद्भुत क्रिकेटर हैं जो अपनी शानदार उपलब्धियों से लिविंग लीजेंड बन चुके हैं। सचिन ने दुनियाभर में करोड़ प्रशंसकों को अपनी बल्लेबाजी से सम्मोहित किया है।
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सचिन को भारत रत्न देने के फैसले से खिलाड़ियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने सचिन को भारत रत्न देने के लिये ही इस पुरस्कार के नियम में संशोधन किया था और इसमें यह बात शामिल की थी कि खिलाड़ियों को भी भारत रत्न दिया जाना चाहिये।
खेल मंत्रालय की सिफारिश ध्यानचंद को मिले भारत रत्न
हालांकि केंद्रीय खेल मंत्रालय ने इस वर्ष अगस्त में सरकार को सिफारिश की थी कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाए। केंद्रीय खेल मंत्री जितेंद सिंह ने संसद के मानसून सत्र में इस बात की जानकारी दी थी। खेल मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में कहा था कि वह स्वर्गीय ध्यानचंद को सचिन के ऊपर प्राथमिकता देते हुये उन्हें भारत रत्न देने के लिये सिफारिश कर रहा है।
खेल मंत्रालय ने उस समय अपनी सिफारिश में कहा था कि भारत रत्न के लिये एकमात्र पसंद ध्यानचंद ही हैं। मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय को इस सर्वोच्च पुरस्कार के लिये सिर्फ एक नाम की सिफारिश करनी थी और उसने तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण विजेता ध्यानचंद के नाम की सिफारिश करते हुये कहा था कि वही इस पुरस्कार के लिये एकमात्र पसंद है।
अंजलि को बस एक ही चिंता, क्रिकेट बिना कैसे रहेंगे सचिन
मंत्रालय ने कहा था कि हमें भारत रत्न के लिये एक नाम देना था और हमने ध्यानचंद का नाम दिया है। सचिन के लिये हम गहरा सम्मान रखते हैं लेकिन ध्यानचंद भारतीय खेलों के लीजेंड हैं इसलिये यह तर्कसंगत बनता है कि ध्यानचंद को ही भारत रत्न दिया जाए क्योंकि उनके नाम पर अनेक ट्राफियां दी जाती हैं।
हॉकी इंडिया ने भी इस वर्ष के शुरू में ध्यानचंद के नाम की भारत रत्न के लिये सिफारिश की थी। ध्यानचंद 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे। उन्हें हॉकी की दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ माना जाता है।
भारत रत्न के लिए नियमों में हुआ संशोधन
सरकार ने सचिन के लिये अपने दो नियमों में संशोधन कर डाले। पहला भारत रत्न के लिये खिलाड़ियों के वर्ग को शामिल किया जाना और दूसरा जीवित व्यक्ति पर डाक टिकट जारी करने के लिये नियमों का संशोधन। सचिन पर वानखेडे स्टेडियम में उनके 200वें टेस्ट के पहले दिन डाक टिकट जारी किया गया था। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले मदर टेरेसा के बाद दूसरे जीवित व्यक्ति बने थे। इस डाक टिकट जारी करने के 48 घंटे बाद सरकार ने सचिन को भारत रत्न देने का फैसला कर दिया।
राजीव शुक्ला ने किया फैसले का बचाव
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बजाय सचिन तेंदुलकर को पहले भारत रत्न देने के भारत सरकार के फैसले का बचाव करते हुए बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि सचिन इस सम्मान के हकदार हैं। शुक्ला ने कहा कि ध्यानचंद के नाम पर पहले ही देश में कई सम्मान दिए जा रहे हैं।
शुक्ला से जब पूछा गया कि ध्यानचंद के बजाय सचिन को क्यों यह सम्मान पहले दिया गया तो उनका जवाब था, ‘ध्यानचंद हॉकी के महान खिलाड़ी थे। पूरे देश में कई सम्मान उनके नाम पर दिए जा रहे हैं। मीडिया को चाहिए कि पहले इसकी जांच कर ले फिर इस तरह का सवाल करे।’ शुक्ला कानपुर में वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले तीसरे वनडे से पूर्व स्टेडियम में तैयारियों का जायजा लेने आए थे।
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सचिन ने मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में अपना 200वां और आखिरी टेस्ट खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। सचिन का विदाई मैच पूरा होने के कुछ घंटें बाद ही सरकार ने घोषणा कि सचिन को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।
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सरकार ने सचिन को भारत रत्न देने की घोषणा करते हुये कहा कि वह निस्संदेह एक अद्भुत क्रिकेटर हैं जो अपनी शानदार उपलब्धियों से लिविंग लीजेंड बन चुके हैं। सचिन ने दुनियाभर में करोड़ प्रशंसकों को अपनी बल्लेबाजी से सम्मोहित किया है।
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सचिन को भारत रत्न देने के फैसले से खिलाड़ियों को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने सचिन को भारत रत्न देने के लिये ही इस पुरस्कार के नियम में संशोधन किया था और इसमें यह बात शामिल की थी कि खिलाड़ियों को भी भारत रत्न दिया जाना चाहिये।
खेल मंत्रालय की सिफारिश ध्यानचंद को मिले भारत रत्न
हालांकि केंद्रीय खेल मंत्रालय ने इस वर्ष अगस्त में सरकार को सिफारिश की थी कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाए। केंद्रीय खेल मंत्री जितेंद सिंह ने संसद के मानसून सत्र में इस बात की जानकारी दी थी। खेल मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में कहा था कि वह स्वर्गीय ध्यानचंद को सचिन के ऊपर प्राथमिकता देते हुये उन्हें भारत रत्न देने के लिये सिफारिश कर रहा है।
खेल मंत्रालय ने उस समय अपनी सिफारिश में कहा था कि भारत रत्न के लिये एकमात्र पसंद ध्यानचंद ही हैं। मंत्रालय को प्रधानमंत्री कार्यालय को इस सर्वोच्च पुरस्कार के लिये सिर्फ एक नाम की सिफारिश करनी थी और उसने तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण विजेता ध्यानचंद के नाम की सिफारिश करते हुये कहा था कि वही इस पुरस्कार के लिये एकमात्र पसंद है।
अंजलि को बस एक ही चिंता, क्रिकेट बिना कैसे रहेंगे सचिन
मंत्रालय ने कहा था कि हमें भारत रत्न के लिये एक नाम देना था और हमने ध्यानचंद का नाम दिया है। सचिन के लिये हम गहरा सम्मान रखते हैं लेकिन ध्यानचंद भारतीय खेलों के लीजेंड हैं इसलिये यह तर्कसंगत बनता है कि ध्यानचंद को ही भारत रत्न दिया जाए क्योंकि उनके नाम पर अनेक ट्राफियां दी जाती हैं।
हॉकी इंडिया ने भी इस वर्ष के शुरू में ध्यानचंद के नाम की भारत रत्न के लिये सिफारिश की थी। ध्यानचंद 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते थे। उन्हें हॉकी की दुनिया का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ माना जाता है।
भारत रत्न के लिए नियमों में हुआ संशोधन
सरकार ने सचिन के लिये अपने दो नियमों में संशोधन कर डाले। पहला भारत रत्न के लिये खिलाड़ियों के वर्ग को शामिल किया जाना और दूसरा जीवित व्यक्ति पर डाक टिकट जारी करने के लिये नियमों का संशोधन। सचिन पर वानखेडे स्टेडियम में उनके 200वें टेस्ट के पहले दिन डाक टिकट जारी किया गया था। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले मदर टेरेसा के बाद दूसरे जीवित व्यक्ति बने थे। इस डाक टिकट जारी करने के 48 घंटे बाद सरकार ने सचिन को भारत रत्न देने का फैसला कर दिया।
राजीव शुक्ला ने किया फैसले का बचाव
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बजाय सचिन तेंदुलकर को पहले भारत रत्न देने के भारत सरकार के फैसले का बचाव करते हुए बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा कि सचिन इस सम्मान के हकदार हैं। शुक्ला ने कहा कि ध्यानचंद के नाम पर पहले ही देश में कई सम्मान दिए जा रहे हैं।
शुक्ला से जब पूछा गया कि ध्यानचंद के बजाय सचिन को क्यों यह सम्मान पहले दिया गया तो उनका जवाब था, ‘ध्यानचंद हॉकी के महान खिलाड़ी थे। पूरे देश में कई सम्मान उनके नाम पर दिए जा रहे हैं। मीडिया को चाहिए कि पहले इसकी जांच कर ले फिर इस तरह का सवाल करे।’ शुक्ला कानपुर में वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले तीसरे वनडे से पूर्व स्टेडियम में तैयारियों का जायजा लेने आए थे।