क्रिकेट के मैदान पर रीटेक नहीं होते: सचिन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्रिकेट की दुनिया में 24 साल तक अपनी बादशाहत कायम रखने वाले भारत रत्न सचिन तेंदुलकर रिटायरमेंट के 4 साल बाद अब अपनी नई पारी बड़े पर्दे पर खेलने के लिए तैयार हैं। जल्द ही आपको सचिन अपनी बायोपिक 'सचिन द बिलयन ड्रीम्स' मे नजर आएंगे। सचिन ने अमर उजाला टीवी के साथ इस एक्सक्लूसिव बातचीत में फिल्म और क्रिकेट की दुनिया के कई सारे अनसुने किस्से शेयर किए।
सचिन, आप क्रिकेट के मैदान से एक्टिंग की दुनिया में कदम रख चुके हैं अपनी इस नई फिल्मी पारी के बारे में बताएं?
सचिन : सबसे पहले मैं आप सब को बताना चाहूंगा की मैंने फिल्म में एक्टिंग नहीं की है। जब रवि (फिल्म के प्रोड्यूसर) ने मुझे अप्रोच किया और मैं फिल्म के लिए मान गया तो मैंने पहली शर्त रखी कि मैं एक्टिंग नही करूंगा, क्योंकि मैं एक्टिंग नहीं कर सकता। मैं एक स्पोर्टसमैन हूं, मैं कैमरे के सामने खड़ा रहता हूं मगर मैं खेलता हूं।
रवि ने मुझे बताया कि वह मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण लम्हों के पीछे की कहानी लोगों को बताने चाहते हैं जिनके बारे में दुनिया नहीं जानती है लेकिन जानना चाहती है। मुझे कभी लगा नहीं था कि मेरे ऊपर कभी कोई फिल्म बनेगी या लोग मुझे 70 एमएम की स्क्रीन पर देखेंगे। एक अच्छा एक्सपीरियंस रहा, मगर मैं ये कहना चाहूंगा कि ‘वंस अ स्पोर्टसमैन ऑलवेज अ स्पोर्टमैन’।
क्रिकेट के मैदान पर रीटेक नहीं होते, वहां कोई स्क्रिप्ट नहीं होती
आपके लिए ज्यादा मुश्किल क्या रहा, मैदान पर शोएब अख्तर की 150 किलोमीटर की स्पीड से आती गेंद को खेलना या अपनी लाइफ को दोबारा से रील पर जीना?
सचिन- रील और रियल लाइफ दोनों मुश्किल है। जब आप ग्राउंड पर होते हैं तो बॉलर आपसे लगातार बॉल के सहारे सवाल पूछता रहता है और आपको हल निकालना होता है। क्रिकेट के मैदान पर रीटेक नहीं होते, वहां कोई स्क्रिप्ट नहीं होती, जो हम स्क्रिप्ट लिखते हैं वो कैमरा कैप्चर करता है, इसलिए दोनों अलग-अलग चीजें हैं। फिल्म में मैंने वही रखा है जो मेरी सहूलियत के हिसाब से ठीक लगा।
हमने वहीं चीजें रखी हैं जो लोगों को मेरे बारे में पसंद आई और हमने सोचा कि जो चीज लोगों को पसंद आई है उन्हें हम क्यों बदलें। इसके अलावा क्या नया हम फिल्म में दिखा सकते हैं, इस पर ध्यान दिया है। फिल्म में मेरी मां, मेरी पूरी फैमिली, सबने रोल निभाया है। फिल्म में मेरे कुछ बहुत पर्सनल वीडियोज हैं और ये वीडियोज अब तक मेरे परिवार के अलावा किसी ने नहीं देखे।
आपने बताया कि फिल्म में हमें आपके कुछ पर्सनल वीडियोज देखने के मिलेंगे, तो क्या कुछ बाते ड्रेसिंग रूम की भी हमें देखने को मिलेंगी?
सचिन- हां कुछ बातें ड्रेसिंग रूम की भी देखने को मिलेंगी, कुछ हसीन पल, ड्रेसिंग की मस्ती, ड्रेसिंग रूम में प्लेयर्स के बर्थ डे सेलिब्रशेन इस तरह की चीजें आपको देखने को मिलेंगी। बस टीम मीटिंग के बारे में कुछ भी नहीं होगा क्योंकि मैंने हमेशा कहा कि टीम मीटिंग से जुड़ी बातें कभी बाहर नहीं आनी चाहिए, मस्ती तक ही ये ठीक है।
बायोग्राफी में मेरे जीवन और मेरे संघर्ष की बात
सचिन - दोनों में बहुत चीजें अलग हैं, सबसे बड़ा अंतर है कि बायोग्राफी में मेरे जीवन और मेरे संघर्ष की बात थी, मेरे सफर की बात थी। फिल्म में मेरे साथ मेरे परिवार का सफर भी देखने को मिलेगा कि कैसे उन्होंने मेरी लाइफ के सबसे बुरे दौर में मेरा साथ दिया, और मुझे आगे बढ़ने में मदद की।
फिल्म को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आपकी बात हुई , थोड़ा उस मुलाकात के बार में भी बताएं?
सचिन- हमने प्रधानमंत्री को फिल्म के बारे में ब्रीफ किया और उनकी तरफ से हमें काफी पॉजिटिव रेस्पॉन्स मिला। उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद सिर्फ बच्चे ही नहीं हर उम्र हर वर्ग के व्यक्ति को प्रेरणा मिलेगी।