रोहित शर्मा को बचाने के लिए टीम इंडिया ने दे दी रहाणे की 'बलि'
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वनडे क्रिकेट में दो बार दोहरा शतक लगाने वाले रोहित शर्मा टेस्ट में भी अपना जलवा दिखाना चाहते हैं लेकिन 5 दिन खेले जाने वाले इस क्रिकेट में वह कभी भी बढ़िया नहीं कर सके। हालांकि यह अलग बात है कि उन्होंने 12 टेस्ट मैचों की 21 पारियों में 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाए साथ ही शुरुआती 2 मैचों में लगातार 2 शतक भी जमाए थे।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण के 8 साल से भी ज्यादा समय के इंतजार के बाद उन्हें अपना टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला था। उन्होंने अपना पहला वनडे मैच 23 जून, 2007 को आयरलैंड के खिलाफ खेला लेकिन इसके बाद उन्होंने पहला टेस्ट खेलने के लिए सौ से ज्यादा वनडे मैच तक खेल डाला लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।
2013 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के अंतिम टेस्ट सीरीज में उन्होंने टेस्ट करियर का आगाज किया और वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले ही मैच में 177 रनों की पारी खेल डाली, इसके बाद दूसरे मैच में नाबाद 111 रन बनाए। दो मैचों की सीरीज के दोनों मैच में उन्होंने शतक लगाए।
रोहित ने शुरुआत में वनडे टीम में भी जगह बचाए रखने के लिए काफी संघर्ष किया लेकिन बाद में उन्होंने कुछ शानदार पारी खेली और अपनी जगह पक्की कर ली लेकिन टेस्ट में उनका संघर्ष जारी है। आलोचक तो यहां तक कहते हैं कि टेस्ट टीम में उनकी जगह इसलिए भी है क्योंकि वह मुंबई के हैं। मुख्य चयनकर्ता (संदीप पाटिल) और टीम डायरेक्टर (रवि शास्त्री) दोनों ही मुंबईकर हैं और इनकी कोशिश होती हैं कि यहां के ज्यादा से ज्यादा क्रिकेटरों को टीम इंडिया में जगह दी जाए। फिलहाल मुंबई से रोहित के अलावा अजिंक्य रहाणे ही भारतीय टीम के नियमित सदस्य हैं।
कोलंबो टेस्ट में रोहित की जगह नहीं बनती थी लेकिन रहाणे की बलि के दम पर उन्हें टीम एकादश में शामिल किया गया।
रोहित के लिए पुजारा को नहीं मिली जगह, रहाणे भी हुए नाकाम
पहले टेस्ट में अप्रत्याशित हार के बाद भारत के पास काफी दबाव है कि वह कोलंबो टेस्ट में जीत हासिल करे और सीरीज बचाए। इसके लिए कप्तान विराट कोहली को मैच के लिए कुछ कड़े फैसले लेने थे और 3 बदलाव करने के बावजूद वह आउट ऑफ फॉर्म रोहित शर्मा को टीम से बाहर नहीं कर पाए। उनकी जगह टीम में बनाए रखने के नाम पर एक प्रयोग किया गया कि तीसरे क्रम पर अजिंक्य रहाणे को बल्लेबाजी के लिए भेजा जाएगा। यह प्रयोग भी फेल हो गया।
मैच में टॉस जीतकर भारत ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया लेकिन चौथी ही गेंद पर मुरली विजय आउट हो गए। भारी दबाव के बीच रहाणे टेस्ट करियर में पहली बार तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए और सिर्फ 4 रन बनाकर लौट गए।
रहाणे ने 16 मैचों की 30 पारियों में 5, 6 या 7वें नंबर पर बल्लेबाजी की है और इस दौरान 3 शतक और 7 अर्धशतक भी लगाए। इस क्रम में वह सबसे ज्यादा 22 बार पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए, एक बार उन्होंने सातवें नंबर पर भी बैटिंग की है बाकी छठे नंबर। टेस्ट में वह टीम के मध्य क्रम के बल्लेबाज हैं लेकिन टीम ने रोहित की जगह बचाने के लिए ऊपर भेज दिया और सस्ते में आउट हो गए। परिणाम यह हुआ कि भारत ने महज 12 रन पर 2 विकेट गंवा दिए।
अपने नियमित क्रम में रहाणे ने टीम को कई बार संकट से बाहर निकाला है। एक आउट ऑफ फॉर्म बल्लेबाज के लिए बेहतरीन फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज का क्रम बदलना वाकई में एक बल्लेबाज के लिए बलि लेने जैसा है और वह भी तब जब टीम पर यह मैच जीतने का दबाव है।
जबकि रोहित इस मैच के पहले पिछली 19 पारियों में सिर्फ 2 फिफ्टी जमा सके हैं और इस दौरान 9 बार दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके।
टीम इंडिया रोहित पर इतनी मेहरबान क्यों हैं यह तो टीम प्रबंधन ही बता पाएगी। लेकिन रोहित की जगह अगर चेतेश्वर पुजारा को मौका दिया जाता तो बेहतर होता। पुजारा लंबे समय से टेस्ट में बड़ी पारी खेलने को बेताब हैं लेकिन उन्हें मौका ही नहीं दिया जा रहा। वह भले ही 11 टेस्ट में कोई शतक नहीं लगा सके हो लेकिन 30-40 की पारी तो खेल ही लेते हैं।