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Republic Day 2020: कभी गुलाम रहे भारत ने जब अंग्रेजों को पहली बार उन्हीं के राष्ट्रीय खेल में हराया

Sun, 26 Jan 2020 08:20 AM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Sun, 26 Jan 2020 08:20 AM IST
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Republic Day 2020: When India registered their first test win of history over England
भारत बनाम इंग्लैंड 1951 - फोटो : अमर उजाला

26 जनवरी 1950 यानी वह तारीख जिस दिन हमारा देश पूर्ण गणतंत्र बना। लगभग 200 सालों की गुलामी के बाद भारत को आजादी मिली। अंग्रेज तो चले गए, लेकिन विरासत में हमें थमा गए गेंद और बल्ला। आजादी के पहले तक, भारत में क्रिकेट सिर्फ राजघरानों, राजे-रजवाड़ों, नवाबों और रईसों तक ही सीमित था। सिर्फ वे ही लोग क्रिकेट खेलते, जो अंग्रेज लाट-साहबों के करीब आना चाहते थे, उन्हें खुश रखना चाहते थे। कुछ लोग ऐसे भी होते, जो क्रिकेट की बदौलत, राजघरानों, रियासतों में नौकरी पाना चाहते थे। आजादी के बाद क्रिकेट, राजमहलों के तंग गलियारों से निकलकर आम आदमी के आंगन तक पहुंचा। इस खेल में वैसे तो हमें सभी सफलताएं आजादी के बाद ही मिल पाई, लेकिन सबसे सुखद तस्वीर आई लंबे सूखे के बाद, जब हिंदुस्तानियों ने अंग्रेजों को उन्हीं के खेल में पटका।

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विजय हजारे बनाए गए कप्तान

Republic Day 2020: When India registered their first test win of history over England
विजय हजारे - फोटो : ट्विटर

बात 1951-52 की है। जब नील हॉवर्ड और डोनाल्ड कार की अगुवाई में इंग्लिश टीम भारत दौरे पर आई। यह दोनों देशों के बीच पांचवीं सीरीज थी। इसके पहले तीन बार भारतीय टीम इंग्लैंड तो एक बार अंग्रेज भारत आ चुके थे। इस सीरीज के लिए टीम इंडिया के कप्तान चुने गए विजय हजारे। तब इस फैसले से हर किसी को हैरानी हुई थी..क्योंकि लाला अमरनाथ और विजय मर्चेंट जैसे दिग्गजों को दरकिनार किया गया था।

क्रिकेट कोच अक्सर याद दिलाया करते हैं कि लेग स्टंप पर आई लूज बॉल को कभी छोड़ना मत। हजारे भी मंझे हुए खिलाड़ी थे। दरअसल, जब कप्तानी के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया गया तब वह इंग्लैंड में ही थे। बस फिर क्या था, हजारे मौके पर चौका लगाने से नहीं चूके। इस सीरीज के लिए खास रणनीति बनाई। अंग्रेजों को घेरने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया। तब आज की तरह न तो कोचों की लंबी फौज हुआ करती थी और न ही विपक्षी की कमजोरी बताने वाले स्टेटिशियन। विजय खुद मैनचेस्टर और ओवल के स्टेडियम में घुमते और अंग्रेजी खिलाड़ियों की कमजोरी और मजबूती पर नोट्स तैयार करते।

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शुरुआती तीन टेस्ट ड्रॉ रहे

Republic Day 2020: When India registered their first test win of history over England
भारत बनाम इंग्लैंड 1951 - फोटो : ट्विटर

इस सीरीज में पांच टेस्ट खेले जाने थे। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में हुए शुरुआती मुकाबले ड्रॉ पर छूटे थे। मगर तीनों ही मैच में भारत को पहली पारी में बढ़त मिली थी। अब सीरीज का चौथा मैच कानपुर के ग्रीन पार्क में खेला जाना था। विकेट नया था। इस टर्फ पर पहला ही टेस्ट मैच खेला जा रहा था। उम्मीद थी कि पिच स्पिनर्स के मुफीद होगी।

शायद यही कारण था कि भारत की प्लेइंग इलेवन में चार फिरकी गेंदबाज थे। इंग्लैंड भी पहली बार लेफ्ट आर्म स्पिनर मेल्कम हिल्टन को सीरीज में खिलाने जा रही थी। मैच शुरू होता है। और उम्मीद के मुताबिक स्पिनर्स ने इस पिच पर तांडव मचा दिया। मैच सिर्फ तीन दिन में ही खत्म हो गया।

अगर आप सोच रहे होंगे कि इस मैच को भारत ने जीता तो आप पूरी तरह गलत है। वो कमाल दिखाने वाले स्पिनर्स भारतीय नहीं बल्कि अंग्रेज थे। शुरुआती दो टेस्ट में शतक बनाने वाले कप्तान विजय हजारे कानपुर टेस्ट की दोनों पारियों में खाता तक नहीं खोल पाए।

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ऐसे मिली आजाद भारत को पहली टेस्ट जीत

अब श्रृंखला के चार टेस्ट खेले जा चुके थे और इंग्लिश टीम 1-0 से आगे चल रही थी। अभी तक भारतीय खिलाड़ियों का निजी प्रदर्शन तो शानदार रहा था, लेकिन एक टीम के रूप में भारत अपनी साख नहीं बना पाया था। पांचवां और आखिरी टेस्ट चेन्नई में होना था। भारत के पास खोने के लिए कुछ नहीं और पाने को पूरा आकाश था।

पिछले चार टेस्ट में बुरी तरह फेल होने रहने वाले पॉली उमरीगर को इस टेस्ट से ड्रॉप कर दिया गया था, उनकी जगह टीम में शामिल किए गए अधिकारी के घायल होने के कारण उमरीगर की टीम में दोबारा एंट्री हुई और उन्होंने ऐन मौके पर शतक ठोक दिया और इस तरह भारत ने अपने इतिहास का पहला टेस्ट आठ रन से जीता।

यह प्रभावशाली जीत थी। इस भारतीय टीम में मुश्ताक अली, अमरनाथ जैसे कई अनुभवी खिलाड़ी थे तो पंकज राय, गोपीनाथ, दिवेचा और फड़कर जैसे युवा जांबाज भी थे। कभी भारत पर शासन करने वाले इंग्लैंड को उसी के राष्ट्रीय खेल में हराकर आजाद भारत के इन खिलाड़ियों को कितनी खुशी और कितना गर्व हुआ होगा इसकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते।

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