जानिए, आखिर कैसे होती है क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग?
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आईपीएल-6 में सट्टेबाजी की जांच करने वाली सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति ने चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया।
इसके साथ ही चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा पर भी आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है।
लोढा कमेटी के इस फ़ैसले से आईपीएल के साथ क्रिकेट जगत को भी बड़ा झटका लगा है। इससे न सिर्फ क्रिकेट बल्कि बड़े से छोटे खिलाड़ियों को भविष्य खतरे में डाल दिया है।
तीन क्रिकेटरों और 11 सटोरिए हुए थे गिरफ्तार
आईपीएल-6 के दौरान स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामना आने के बाद देश ही नहीं पूरी दुनिया में हलचल बढ़ गई थी। मई 2013 इस मामले में तीन खिलाड़ियों और 11 सटोरियों को गिरफ़्तार किया गया था।
गिरफ्तार होने वाले क्रिकेटरों में वर्ल्ड कप 2011 में टीम इंडिया का हिस्सा रहे एस श्रीसंत भी शामिल थे। जिस स्पॉट फिक्सिंग को लेकर इतना तूफ़ान उठा और उठ रहा है वो है क्या?
क्या होती है मैच फिक्सिंग
किसी ख़ास क्रिकेट मैच का परिणाम (हार-जीत-ड्रा) पहले से तय कर लिया जाए तो इसे 'मैच फिक्सिंग' कहते हैं। इसी तरह मैच के दौरान किसी एक या एक से अधिक खिलाड़ियों का प्रदर्शन को पहले से तय कर लिया जाए तो इसे 'स्पॉट फिक्सिंग' कहते हैं।
स्पॉट फिक्सिंग में पूरे मैच का परिणाम तय करने के बजाय सट्टेबाज़ खेल के किसी एक ख़ास हिस्से के नतीजे को पहले से तय करते हैं।
यह एक बॉल भी हो सकती है जैसे कि कोई ख़ास गेंद 'नो बॉल' फेंकी जाएगी या 'वाइड'। इसी तरह बाउंसर या यॉर्कर की भी स्पॉट फिक्सिंग की जा सकती है।
टॉस और बल्लेबाजी क्रम में होती है फिक्सिंग
फिक्सिंग में यह भी तय किया जा सकता है कि किसी ख़ास गेंद पर या ओवर में बल्लेबाज़ कितने रन बनाएगा या गेंदबाज़ कितने रन देगा।
स्पॉट फिक्सिंग इस पर भी केंद्रित हो सकती है कि कोई ख़ास बल्लेबाज़ एक गेंदबाज़ द्वारा उसे फेंकी गई गेंदों पर कितने रन बनाता है। बल्लेबाज़ के निश्चित रन बनाने, बोल्ड, कैच या रन आउट होने को भी पहले से तय किया जा सकता है।
सिर्फ़ इतना ही नहीं स्पॉट फिक्सिंग मैच के टॉस, टॉस के बाद बल्लेबाजी या गेंदबाजी के चयन, बल्लेबाजी-गेंदबाजी के लिए खिलाड़ियों के क्रम और पिच की जानकारी जैसी चीज़ों पर भी की जाती है।
यह होता स्पॉट फिक्सिंग का तरीका
मैच के दौरान हर ओवर में कितने रन देने हैं, सटोरियों और खिलाड़ियों के बीच इस पर सहमति बनाई जाती थी। ये तय होता था कि उन्हें एक ओवर में कम से कम इतने रन देने हैं।
गेंदबाजों को संकेत देना होता था कि वो रन देने को तैयार हैं। ये संकेत थे: पैंट में तौलिया घुसाना, लॉकेट शर्ट से बाहर निकालना, शर्ट उतारना वगैरह।
मामले की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस का दावा है कि एक मैच में अजित चंडिला संकेत नहीं दे पाए जिसकी वजह से सटोरियों की योजना गड़बड़ाई और बाद में गेंदबाज़ से उनकी बहस हुई।
नौ मई 2013 को हुए मैच में श्रीसंत ने अपने स्पेल के दूसरे ओवर में 13 रन देना स्वीकार किया था। सिग्नल था कि वो दूसरे ओवर के दौरान ट्राउजर में छोटा तौलिया रखेंगे।