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Praveen Kumar Sobti: ट्रैक एंड फील्ड के भीम का एशियाई खेलों में था जलवा, राष्ट्रमंडल खेलों में मिला था स्वर्ण

Tue, 08 Feb 2022 10:28 PM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रोहित राज Updated Tue, 08 Feb 2022 10:28 PM IST
सार

एशियाई खेलों में भारत को डिस्कस और हैमर थ्रो में चार पदक जीतने वाले भारत के पूर्व एथलीट प्रवीण की ट्रैक एंड फील्ड से लेकर सुनहले पर्दे तक धूम रही। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अर्जुन अवॉर्डी प्रवीण का सोमवार रात को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

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Praveen Kumar Sobti film industry Bheem was brilliant in Asian Games  Track and field got gold in Commonwealth Games
प्रवीण कुमार सोबती - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एशियाई खेलों में भारत को डिस्कस और हैमर थ्रो में चार पदक जीतने वाले भारत के पूर्व एथलीट प्रवीण कुमार सोबती की ट्रैक एंड फील्ड से लेकर सुनहले पर्दे तक धूम रही। पचास से अधिक फिल्में करने वाले प्रवीण को महाभारत धारावाहिक में भीम के किरदार ने काफी शोहरत दिलाई लेकिन खिलाड़ी के रूप में भी उनकी उपलब्धियां कम नहीं रहीं। वह राष्ट्रमंडल खेलों की थ्रो इवेंट में पदक (रजत) दिलाने वाले भारत के एकमात्र एथलीट रहे। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अर्जुन अवॉर्डी प्रवीण का सोमवार रात को 74 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
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पंजाब के सरहैली कलां के रहने प्रवीण बीसीएफ के पूर्व जवान थे। बड़े हंसमुख स्वभाव के थे।  60 और 70 के दशक में खेल के मैदान में उनका दबदबा रहा। तीन एशियाई खेलों, एक राष्ट्रमंडल खेलों में पदक दिलाने के अलावा उन्होंने दो ओलंपिक 1968 मैक्सिको सिटी और 1972 म्यूनिख में भाग लिया। ओलंपिक में वह पदक तो नहीं जीत सके लेकिन उन्होंने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। मैक्सिको सिटी में उन्होंने हैमर थ्रो में 60. 84 मीटर थ्रो फेंका और म्यूनिख में डिस्कस थ्रो में 53.12 मीटर का प्रदर्शन किया।
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मिल्खा के बाद दूसरा पदक दिलाया: राष्ट्रमंडल खेल किंग्सटन (1966) में उनका हैमर थ्रो में रजत इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक था और दिग्गज मिल्खा सिंह के 1958 राष्ट्रमंडल खेलों में 400 मीटर रेस में जीते स्वर्ण के बाद भारत का दूसरा मेडल था।
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19 साल की उम्र में जीता था पहला गोल्ड: प्रवीण ने एशियाई खेलों (1966)में डिस्कस थ्रो में अपना पहला स्वर्ण पदक 19 साल की उम्र में जीता था तब वह खालसा कॉलेज अमृतसर में थे। उन खेलों में उन्होंने अपना दूसरा पदक हैमर थ्रो में कांस्य पदक के रूप में जीता।  


प्रवीण कुमार सोबती की उपलब्ध्यिां
टूर्नामेंट पदक साल जगह स्पर्धा
एशियाई खेल  स्वर्ण 1966 बैंकॉक डिस्कस थ्रो
एशियाई खेल  कांस्य 1966 बैंकॉक हैमर थ्रो
एशियाई खेल  स्वर्ण 1970 बैंकॉक डिस्कस थ्रो
एशियाई खेल  रजत 1973 तेहरान डिस्कस थ्रो
राष्ट्रमंडल खेल  रजत 1966 किंगस्टन हैमर थ्रो

बहुमुखी प्रतिभा के धनी
  • 1988 में महाभारत में भीम का किरदार निभाकर लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे प्रवीण ने 50 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया।
  • जिन फिल्मों में उन्होंने सहायक कलाकार के रूप में काम किया। उनमें युद्ध, अधिकार, हुकुमत, शहंशाह, घायल और आज का अर्जुन प्रमुख रही।
  •  2013 में आम आदमी पार्टी की ओर से 2013 में दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी लड़ा और 2014 में भारतीय जनता पार्टी में आ गए।

दिग्गजों ने उनके लिए क्या-क्या कहा?
आदिल जे सुमारीवाला ने कहा कि सोबती वर्षों तक खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा रहेंगे। उन्होंने 11 वर्ष तक लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया। वहीं, पूर्व पूर्व एथलीट एवं उनके साथी बहादुर सिंह ने कहा कि वे बड़े हंसमुख स्वभाव के थे, चुटकुले सुनाते थे। चाहे वह ट्रेनिंग, प्रतियोगिता हो या आम दिनचर्या वह हमेशा सकारात्मक और ऊर्जा से भरपूर रहते थे। जितने अच्छे खिलाड़ी थे, उतने अच्छे इंसान भी थे। पूर्व एथलीट श्रीराम सिंह ने कहा कि सोबती का निधन भारतीय खेलों के लिए बड़ी क्षति है। मैं उनके साथ 1972 ओलंपिक में था।उनसे काफी जूनियर था। वह भारत के नामी खिलाड़ी थे लेकिन वह युवा खिलाड़ियों से काफी घुले-मिले रहते थे।
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