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एक फैसले ने पूरी तरह बदल दी सचिन तेंदुलकर की जिंदगी और भारतीय क्रिकेट की तस्वीर

Thu, 19 Apr 2018 05:07 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 19 Apr 2018 05:07 PM IST
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one decision that changed sachin tendulkars life and indian cricket
सचिन तेंदुलकर

1984 की गर्मी का समय था जब प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर ने अपने सबसे छोटे बेटे सचिन तेंदुलकर का स्कूल बदलने का फैसला लिया- यह वही फैसला है, जिसने सचिन की जिंदगी और भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदल दी। यह किस्सा देवेंद्र प्रभुदेसाई द्वारा लिखी नई किताब, 'विनिंग लाइक सचिन: थिंक एंड सक्सीड लाइक तेंदुलकर' में बताया गया है।

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सचिन महज 11 साल के थे, जब उनके बड़े भाई अजित उन्हें कोच रमाकांत आचरेकर के पास लेकर आए। अजित का मानना था कि युवा लड़के में काफी प्रतिभा है और वह प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में काफी आगे बढ़ सकता है। 
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किताब में आगे बताया गया, 'दिक्कत यह थी कि मुंबई के बांद्रा स्थित जिस आईईएस अंग्रेजी माध्यम स्कूल में सचिन पढ़ते थे, उनकी क्रिकेट टीम नहीं थी। आचरेकर ने सलाह दी कि सचिन को शारदाश्रम विद्यामंदिर में शिफ्ट किया जाए, जिनकी इंग्लिश और मराठी मीडियम टीमों को वह कोचिंग दिया करते थे।'

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पिता के पास था सुरक्षित फैसला लेने का विकल्प, लेकिन...

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सचिन तेंदुलकर

सचिन का घर बांद्रा स्थित साहित्य सहवास में था, जो दादर के शारदाश्रम से काफी दूर था। परेशानी यह भी थी कि इन दोनों क्षेत्रों में सीधी बस भी नहीं चलती थी। इसका मतलब था कि सचिन को रास्ते में बस बदलना होती थी। महान क्रिकेटर को सुबह 7 बजे उठकर स्कूल जाना होता था और उसके बाद वह क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए जाते थे।

सचिन की उम्र वाले लड़कों को इंटर-स्कूल क्रिकेट टीम में तब शामिल किया जाता था, जब वह सातवीं या आठवीं क्लास में पढ़ रहे हो। वहीं सचिन ने छठी क्लास से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। किताब में बताया गया कि शारदाश्रम से बांद्रा तक आने-जाने की वजह से सचिन का खाली और पढ़ाई का समय प्रभावित हो रहा था।

किताब के मुताबिक, 'प्रोफेसर तेंदुलकर आसान तरीका निकालकर सुरक्षित फैसला ले सकते थे। वह अपने बेटे को छुट्टियों में क्रिकेट खेलने की इजाजत देकर शेष पूरे साल पढ़ाई के लिए बोल सकते थे। वह स्कूल नहीं बदलने का फैसला भी ले सकते थे। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने और उनके पूरे परिवार ने आखिरी फैसला सचिन को लेने के लिए कहा।'

बदल गई सचिन की जिंदगी और भारतीय क्रिकेट की तस्वीर

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सचिन तेंदुलकर - फोटो : file

परिवार ने सचिन को भरोसा दिलाया कि वह जो भी फैसला लेंगे, उसमें उनका पूरा समर्थन परिवार करेगा। 'परिवार वालों को इस बात की कम ही जानकारी थी कि वह पल आ गया, जब लड़के की जिंदगी बदलने वाली है और भारतीय क्रिकेट के इतिहास ने अविश्वसनीय मोड़ लिया है। उनके परिवार का सबसे छोटा बेटा, जो सभी का लाडला भी रहा, घर वालों को बताता है कि वह बदलाव और चुनौती के लिए तैयार है।'

सचिन ने फैसला लिया कि क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे और आचरेकर सर के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रैक्टिस करना शुरू की। इसके बाद परिणाम सभी के सामने है कि कैसे उनकी जिंदगी और भारतीय क्रिकेट की पूरी तस्वीर बदल गई। रूपा पब्लिकेशंस ने इस किताब का प्रकाशन किया है। किताब में सचिन तेंदुलकर की जिंदगी से जुड़े कई किस्से बताए गए हैं और उनके जीतने की आदत का भी उल्लेख किया गया है।

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