पूर्व दिग्गजों ने कहा, धोनी का अनुभव चैंपियंस ट्रॉफी में अहम साबित होगा
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महेंद्र सिंह धोनी निर्विवाद रूप से भारत के सबसे कामयाब विकेटकीपर बल्लेबाज और कप्तान हैं। आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी चैंपियन भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड में खिताब बरकरार रखना तो धोनी को 2013 की तरह फिर धमाल दिखाना होगा। धोनी कप्तानी की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद और टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की दुनिया की आठ चैंपियन टीमों की चैंपियनशिप में तुरुप के इक्के रहने वाले हैं। चैंपियंस ट्रॉफी में धोनी की भूमिका की बाबत ‘अमर उजाला’ ने भारत के तीन पूर्व बेहतरीन विकेटकीपरों -किरण मोरे, विजय दहिया और सुरिंदर खन्ना से बुधवार को बात की ।
मोरे, दहिया और सुरिंदर खन्ना ने एक सुर में कहा, महेंद्र सिंह धोनी का अनुभव भारत के लिए इंग्लैंड में 1 जून में शुरू हो रही चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे अहम रहेगा। वह चुस्त विकेटकीपर होने के साथ आज भी दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि 36 बरस के धोनी आइपीएल में चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले बल्ले से दमदार प्रदर्शन कर एकदम सही वक्त पर रंग में आने के साथ अपने आलोचकों को बढ़िया जवाब दिया है। उनकी यह लय उनकी राइजिंग पुणे सुपरजाइंट (आरपीएस) को आईपीएल में खिताब के एकदम करीब ले आई है। उन्होंने चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले आईपीएल में खासतौर पर आखिर के ओवरों में आतिशी पारियां खेल कर दिखाया है कि वह भारत को लगातार दूसरी खिताब जितवाने को बेताब हैं।
संतुलित है भारतीय टीम, है खिताब जीतने का दम
धोनी की फिटनेस और फॉर्म बेहतरीन है। धोनी का इंग्लैंड में खेलने का अनुभव वहां के हालात की जानकारी खासतौर पर दबाव के क्षणों में निचले क्रम के भारतीय बल्लेबाजों के लिए बहुत अहम साबित होगी। इंग्लैंड में जहां गेंद बहुत तेज से आने के साथ बहुत मूव और स्विंग होती है और उसे खेलना माही खूब जानते हैं। वह खुद बढ़िया खेलने के साथ अपने साथी से भी बेहतरीन प्रदर्शन कराने का दम रखते हैं। उनके पास तेज गेंदबाजों से निबटने के लिए उनका अपना खास ‘हेलिकॉप्टर’ शॉट है और उम्मीद है कि इंग्लैंड में वह यह शॉट खूब खेलेंगे।
इन तीनों का कहना है, ‘जहां तक भारत के चैंपियंस ट्रॉफी में खिताब बरकरार रखने का सवाल है तो इसके लिए चुनी गई भारतीय टीम बेहद संतुलित है और खिताब जीतने का दम रखती है। फिर भी बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि भारत का इंग्लैंड में आगाज कैसा रहता है। इंग्लैंड की टीम अपने घर में खेलने का कुछ लाभ की स्थिति में जरूर रहेगी। भारत का पहला मैच अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से है।
विराट की अगुवाई वाली टीम इंडिया की खुशकिस्मती है कि उसके पास शीर्ष क्रम में पिछले बार के सबसे कामयाब बल्लेबाज शिखर धवन, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, युवराज सिंह , खुद विराट कोहली और मनीष पांडे जैसे बल्लेबाज हैं और फिर मध्यक्रम में धोनी जैसा ऐसा सदाबहार खिलाड़ी जो निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ उसकी नैया किनारे लगा सकता है। भारत के पास इंग्लैंड के मौसम के मुताबिक गेंदबाजी करना जानने वाले पेसर मोहम्मद शमी और उमेश यादव के साथ भुवनेश्वर कुमार जैसे स्विंग गेंदबाज हैं। साथ ही रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे स्पिन ऑलराउंडर के साथ बेखौफ खेलने वाला हार्दिक पांडया जैसे बेखौफ होकर बल्ले और गेंद से धमाल करने वाला यंग हरफनमौला है।’
धोनी को बखूबी आता है टीम को दबाव से निकालना
‘धोनी का सही वक्त पर रंग में आना भारत के लिए चैंपियंस ट्रॉफी के लिए सबसे अच्छा संकेत है। सबसे बड़ी बात यह है कि धोनी अपने अनुभव के कारण टीम को दबाव से निकालना खूब जानते हैं। अपने अनुभव के कारण माही का रोल टीम के मार्गदर्शक का रहेगा।
-किरण मोरे, भारत के पूर्व विकेटकीपर
‘ धोनी अब कप्तानी के दायित्व से मुक्त होने के बाद खुलकर चैंपियंस ट्रॉफी में खेलेंगे। धोनी अब विराट कोहली की कप्तानी में खेल कर टीम के लिए पूरी शिद्दत से खेलेंगे और अपना अनुभव बांट कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। टीम इंडिया बल्लेबाजी और गेंदबाजी के लिहाज से बेहद संतुलित है। भारत का पहला मैच पाकिस्तान से है और उसे इस सहित ग्रुप मैच में पूरी तरह चौकस होकर खेलना होगा। ’ -
विजय दहिया, भारत के पूर्व विकेटकीपर
‘धोनी अपने अनुभव के कारण आज भी भारतीय टीम के सबसे अहम खिलाड़ी हैं। कप्तान विराट कोहली ही नहीं टीम के बाकी नौजवान खिलाड़ी उनके अनुभव से इस चैंपियंस ट्रॉफी में बहुत कुछ सीख सकते हैं। हकीकत यही है कि भारत की बल्लेबाज टॉप पांच बल्लेबाजों पर है और धोनी के रूप में मध्यक्रम में ऐसा बल्लेबाज है जो टीम के निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ टीम की नैया किनारे लगा सकता है। धोनी को तब तक खेलना चाहिए जब तक वह चाहें। आईपीएल के बाद चैंपियंस ट्रॉफी से पहले एक करीब एक हफ्ते के आराम से टीम इंडिया तरोताजा और जीत के जज्बे के साथ उतरेगी। ’ -सुरिंदर खन्ना, भारत के पूर्व विकेटकीपर