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IND vs NZ: भारत को दुबई में मिला फायदा? बैटिंग कोच कोटक की आलोचकों को दो टूक, कहा- अगर आप अच्छा नहीं खेलते...
Sat, 08 Mar 2025 10:52 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sat, 08 Mar 2025 10:52 AM IST
सार
कोटक ने कहा कि पिच की प्रकृति चाहे जो भी हो, टीम को मैच जीतने के लिए अच्छा क्रिकेट खेलना होगा।
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गंभीर और कोटक
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत रविवार को आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगा। यह मैच दुबई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम ने अब तक अपने सभी मैच दुबई में खेले हैं और इससे कई दूसरे देशों के क्रिकेटर नाराज हैं। दूसरे देशों के क्रिकेटरों का मानना है कि भारतीय टीम को एक स्थान पर रहकर खेलने का फायदा मिला है। भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और कोच गौतम गंभीर इस बयान की आलोचना कर चुके हैं। अब बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने शुक्रवार को कहा कि दुबई में लंबे समय तक रहने से भारत को कोई फायदा नहीं हुआ और इस तरह की आलोचनाएं तभी शुरू हुईं जब टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी के मैच जीतने शुरू किए।
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'हमें इस (पिच) से क्या फायदा मिलता है?'
कोटक ने भारत के नेट सत्र के दौरान कहा, 'मुझे समझ में नहीं आता कि हमें इस (पिच) से क्या फायदा मिलता है। जब हमने मैच जीत लिए तो लोगों को लगा कि भारत को फायदा मिला। मुझे नहीं पता कि इसके बारे में क्या कहूं। हम सिर्फ ड्रॉ के अनुसार खेले।' कोटक ने कहा कि पिच की प्रकृति चाहे जो भी हो, टीम को मैच जीतने के लिए अच्छा क्रिकेट खेलना होगा। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि एक मैच में, आपको हर दिन अच्छा क्रिकेट खेलना होता है। अगर आप अच्छा नहीं खेलते हैं तो आप शिकायत नहीं कर सकते। और अगर आप अच्छा खेलते हैं तो यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि आपको फायदा हुआ या नहीं।'
कोटक ने भारत के नेट सत्र के दौरान कहा, 'मुझे समझ में नहीं आता कि हमें इस (पिच) से क्या फायदा मिलता है। जब हमने मैच जीत लिए तो लोगों को लगा कि भारत को फायदा मिला। मुझे नहीं पता कि इसके बारे में क्या कहूं। हम सिर्फ ड्रॉ के अनुसार खेले।' कोटक ने कहा कि पिच की प्रकृति चाहे जो भी हो, टीम को मैच जीतने के लिए अच्छा क्रिकेट खेलना होगा। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि एक मैच में, आपको हर दिन अच्छा क्रिकेट खेलना होता है। अगर आप अच्छा नहीं खेलते हैं तो आप शिकायत नहीं कर सकते। और अगर आप अच्छा खेलते हैं तो यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि आपको फायदा हुआ या नहीं।'
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भारत आईसीसी क्रिकेट अकादमी में कर रहा अभ्यास
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि हमें सिर्फ इसलिए फायदा मिल रहा है क्योंकि हम यहां अभ्यास कर रहे हैं और हम यहां मैच खेल रहे हैं।' कोटक ने मुख्य कोच गौतम गंभीर के विचार से सहमत होते ही दोहराया कि ट्रेनिंग की सुविधा और आईसीसी क्रिकेट अकादमी में पिचों की प्रकृति काफी अलग थी। उन्होंने कहा, 'हम निश्चित रूप से अलग-अलग विकेट पर अभ्यास करते हैं। हम थोड़ी अलग पिच पर मैच खेल रहे हैं। हम सभी यह जानते हैं। सिर्फ यही चीज है कि हम यहां खेला। लेकिन ड्रॉ ऐसा ही होता है। इसलिए इसमें और कुछ नहीं हो सकता।'
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि हमें सिर्फ इसलिए फायदा मिल रहा है क्योंकि हम यहां अभ्यास कर रहे हैं और हम यहां मैच खेल रहे हैं।' कोटक ने मुख्य कोच गौतम गंभीर के विचार से सहमत होते ही दोहराया कि ट्रेनिंग की सुविधा और आईसीसी क्रिकेट अकादमी में पिचों की प्रकृति काफी अलग थी। उन्होंने कहा, 'हम निश्चित रूप से अलग-अलग विकेट पर अभ्यास करते हैं। हम थोड़ी अलग पिच पर मैच खेल रहे हैं। हम सभी यह जानते हैं। सिर्फ यही चीज है कि हम यहां खेला। लेकिन ड्रॉ ऐसा ही होता है। इसलिए इसमें और कुछ नहीं हो सकता।'
'भारत को मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल नहीं'
उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि यहां आने के बाद उन्होंने कुछ बदल दिया और फायदा उठा लिया।' कोटक ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि भारत ने कुछ दिन पहले ग्रुप मैच में न्यूजीलैंड को हराने के बाद फाइनल में मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की है। सौराष्ट्र के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। हमें बस कोशिश करनी चाहिए और अच्छा क्रिकेट खेलना चाहिए। पिछले मैच के बारे में सोचने का कोई मतलब नहीं है। हमें सोचना होगा कि नौ मार्च को क्या करना है।'
उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि यहां आने के बाद उन्होंने कुछ बदल दिया और फायदा उठा लिया।' कोटक ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि भारत ने कुछ दिन पहले ग्रुप मैच में न्यूजीलैंड को हराने के बाद फाइनल में मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की है। सौराष्ट्र के इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। हमें बस कोशिश करनी चाहिए और अच्छा क्रिकेट खेलना चाहिए। पिछले मैच के बारे में सोचने का कोई मतलब नहीं है। हमें सोचना होगा कि नौ मार्च को क्या करना है।'