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Manipur Violence: मणिपुर मामले पर फूटा हरभजन सिंह का गुस्सा, बोले- दोषियों को मौत की सजा मिले
Fri, 21 Jul 2023 10:54 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Fri, 21 Jul 2023 10:54 AM IST
सार
हरभजन सिंह ने कहा कि मेरी भावनाओं को बयां करने के लिए गुस्सा बहुत छोटा शब्द है। अब सरकार को हर हाल में एक्शन लेना चाहिए और दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जानी चाहिए।
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हरभजन सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत के पूर्व स्पिनर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने उन सभी लोगों के लिए "मृत्युदंड" की मांग की है जो दो मणिपुरी महिलाओं को बिना कपड़े के घुमाने और उनके साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार करने के जघन्य अपराध में शामिल थे। मणिपुर में कई महीनों से दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो रही है। इसमें कई लोगों मारे जा चुके हैं। हालातों को सामान्य करने के लिए सरकार की कोशिशे अब तक पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई हैं।
दो समुदायों के बीच विवाद का एक शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो चार मई का है, जिसमें एक समुदाय की दो महिलाओं को दूसरे समुदाय के पुरुषों का एक समूह कपड़े के बिना परेड कराता और हिंसा करता दिखाई दे रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद दुनियाभर में आक्रोश फैल गया है और हालात सामान्य करने की मांग की जा रही है।
हरभजन सिंह ने ट्वीट कर इस मामले में अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने लिखा "अगर मैं कहता हूं कि मैं गुस्से में हूं, तो यह मेरी भावनाओं को बयां नहीं करेगा। मैं गुस्से से सुन्न हो गया हूं। मणिपुर में जो हुआ उसके बाद मैं आज शर्मिंदा हूं। अगर इस भयानक अपराध के अपराधियों को मौत की सजा नहीं दी जाती है, तो हमें खुद को इंसान नहीं कहना चाहिए। मुझे दुख हो रहा है कि ऐसा हुआ है। बहुत हो गया, सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।''
हरभजन खेल जगत से प्रतिक्रिया देने वाले शुरुआती लोगों में से एक हैं, क्योंकि अभी तक बहुत से खिलाड़ियों ने इस घटना पर टिप्पणी नहीं की है।
मणिपुर में पुलिस ने कहा कि थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन में अज्ञात हथियारबंद व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
तीन मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 150 से अधिक लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हो गए हैं, जब मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था।
मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी लोग, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
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दो समुदायों के बीच विवाद का एक शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह वीडियो चार मई का है, जिसमें एक समुदाय की दो महिलाओं को दूसरे समुदाय के पुरुषों का एक समूह कपड़े के बिना परेड कराता और हिंसा करता दिखाई दे रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद दुनियाभर में आक्रोश फैल गया है और हालात सामान्य करने की मांग की जा रही है।
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If I say I am angry, it's an understatement. I am numb with rage. I am ashamed today after what happened in Manipur. If the perpetrators of this ghastly crime aren't brought to the book and handed capital punishment, we should stop calling ourselves human. It makes me sick that…
विज्ञापन विज्ञापन— Harbhajan Turbanator (@harbhajan_singh) July 20, 2023
हरभजन सिंह ने ट्वीट कर इस मामले में अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने लिखा "अगर मैं कहता हूं कि मैं गुस्से में हूं, तो यह मेरी भावनाओं को बयां नहीं करेगा। मैं गुस्से से सुन्न हो गया हूं। मणिपुर में जो हुआ उसके बाद मैं आज शर्मिंदा हूं। अगर इस भयानक अपराध के अपराधियों को मौत की सजा नहीं दी जाती है, तो हमें खुद को इंसान नहीं कहना चाहिए। मुझे दुख हो रहा है कि ऐसा हुआ है। बहुत हो गया, सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।''
हरभजन खेल जगत से प्रतिक्रिया देने वाले शुरुआती लोगों में से एक हैं, क्योंकि अभी तक बहुत से खिलाड़ियों ने इस घटना पर टिप्पणी नहीं की है।
मणिपुर में पुलिस ने कहा कि थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन में अज्ञात हथियारबंद व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण, सामूहिक बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
तीन मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 150 से अधिक लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हो गए हैं, जब मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था।
मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी लोग, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।